धरती पर 'सूरज' बनाने की रेस में भारत! PRAGYA ने पहली बार बनाया प्लाज्मा

भारत में प्राइवेट फ्यूजन रिसर्च ने नया कदम बढ़ाया है. बेंगलुरु के PRAGYA टोकामक में पहली बार प्लाज्मा बना है. अब इसी डेटा और तकनीक के सहारे कंपनी 2030 तक नेट एनर्जी गेन रिएक्टर बनाने का लक्ष्य रखती है.

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ये है प्रनोस फ्यूजन रिसर्च टीम का प्रज्ञा टोकामक. (Screengrab: X/runtime) ये है प्रनोस फ्यूजन रिसर्च टीम का प्रज्ञा टोकामक. (Screengrab: X/runtime)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:59 PM IST

भारत में न्यूक्लियर फ्यूजन रिसर्च को लेकर प्राइवेट सेक्टर ने एक बड़ा कदम उठाया है. बेंगलुरु की स्टार्टअप प्रनोस फ्यूजन ने अपने टोकामक PRAGYA में पहली बार प्लाज्मा बनाया है. करीब 40 सेंटीमीटर रेडियस वाले इस टोकामक को कंपनी ने लगभग 8 महीने में तैयार किया है. इसका इस्तेमाल प्लाज्मा को कंट्रोल करने, उसकी जांच करने और फ्यूजन से जुड़ी दूसरी तकनीकों को टेस्ट करने के लिए किया जाएगा.

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PRAGYA का काम अभी बिजली बनाना नहीं है. यह एक तरह की टेस्ट मशीन है, जिस पर कंपनी लगातार प्रयोग करेगी. कंपनी इसे करीब 20 साल तक चलाने की योजना बना रही है. इस दौरान हर साल करीब 3,000 प्लाज्मा शॉट लेने का लक्ष्य है. यानी रोजाना करीब 10 से 12 बार प्लाज्मा बनाकर उससे जुड़ा डेटा इकट्ठा किया जाएगा. इस डेटा से आगे बड़े फ्यूजन रिएक्टर बनाने में मदद मिल सकती है.

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क्या होता है टोकामक?

टोकामक एक ऐसी मशीन है जिसमें बहुत गर्म प्लाज्मा को चुंबकीय ताकत की मदद से कंट्रोल किया जाता है. फ्यूजन के लिए गैस को बहुत ज्यादा गर्म किया जाता है. इतनी गर्मी में गैस प्लाज्मा में बदल जाती है.  फ्यूजन में छोटे परमाणुओं को आपस में जोड़कर एनर्जी  बनाने की कोशिश की जाती है. सूरज में भी इसी तरह की प्रक्रिया से एनर्जी  बनती है. वैज्ञानिक कई साल से धरती पर इस प्रक्रिया को कंट्रोल करके एनर्जी  बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

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PRAGYA में क्या होगा?

PRAGYA पर सबसे पहले यह समझने की कोशिश होगी कि प्लाज्मा को बेहतर तरीके से कैसे कंट्रोल किया जाए. इसके अलावा टोकामक के डिजाइन, प्लाज्मा कंट्रोल सिस्टम और प्लाज्मा की जांच करने वाली तकनीक पर भी काम होगा. कंपनी हाई टेम्परेचर सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट पर भी काम करेगी. 

ये खास तरह के मैग्नेट होते हैं, जिनका इस्तेमाल फ्यूजन मशीनों में प्लाज्मा को कंट्रोल करने के लिए किया जा सकता है. लगातार प्रयोगों से कंपनी को बड़ी मात्रा में डेटा मिलेगा. यही डेटा आगे फ्यूजन रिएक्टर की तकनीक को बेहतर बनाने में काम आ सकता है.

2030 तक बड़ा रिएक्टर बनाने का लक्ष्य

प्रनोस फ्यूजन ने आगे के लिए भी लक्ष्य तय किया है. कंपनी की योजना 2027 तक HTS मैग्नेट को चालू करने की है. इसके बाद वह 2030 तक PraniQ नाम का नेट एनर्जी गेन रिएक्टर बनाने का लक्ष्य रखती है. नेट एनर्जी गेन का आसान मतलब है कि फ्यूजन से जितनी एनर्जी  मिले, वह उसे चलाने में  लगाई गई एनर्जी  से ज्यादा हो. हालांकि, यह अभी कंपनी का लक्ष्य है. PRAGYA खुद नेट एनर्जी गेन रिएक्टर नहीं है.

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वैज्ञानिकों को तैयार करने पर भी फोकस

कंपनी PRAGYA के जरिए सिर्फ तकनीक पर काम नहीं करना चाहती. वह ज्यादा से ज्यादा फ्यूजन वैज्ञानिक और प्लाज्मा फिजिसिस्ट तैयार करने की भी योजना बना रही है. इसके लिए PRAGYA पर लंबे समय तक प्रयोग किए जाएंगे, ताकि वैज्ञानिकों और छात्रों को फ्यूजन तकनीक को समझने और उस पर काम करने का मौका मिले. 

कंपनी को उम्मीद है कि इससे भारत में फ्यूजन रिसर्च और इस क्षेत्र से जुड़े काम को बढ़ावा मिलेगा. फिलहाल PRAGYA में प्लाज्मा बनना इस दिशा में शुरुआती कदम है. आगे के प्रयोगों से पता चलेगा कि कंपनी अपने बड़े फ्यूजन लक्ष्यों तक कितनी दूर पहुंच पाती है.

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