गुजरात के मोरबी जिले के विपरदा गांव में एक नया खोदा गया कुआं इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. करीब 18 फीट चौड़े कुएं में पानी लगातार लहरों की तरह ऊपर-नीचे हो रहा है. आसपास के अन्य कुओं का पानी पूरी तरह शांत है. इस अजीब घटना ने स्थानीय लोगों में उत्सुकता और चिंता दोनों पैदा कर दी है.
जिला कलेक्टर ने इसकी वजह पता लगाने के लिए जांच के आदेश दे दिए हैं. विशेषज्ञ अभी कोई पक्का नतीजा नहीं निकाल पाए हैं और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार है.
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विपरदा गांव में हाल ही में खोदे गए इस कुएं में पानी की लहर जैसी हलचल लगातार दिख रही है. गांव वाले पहले तो हैरान हुए और फिर डरने भी लगे. कई लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किए जिससे यह खबर तेजी से फैली. आसपास के कुओं में पानी बिल्कुल स्थिर होने के कारण यह घटना और भी रहस्यमयी लग रही है.
प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया. जिला कलेक्टर ने संबंधित विभागों को जांच करने का निर्देश दिया. अभी तक कोई कारण सामने नहीं आया है इसलिए विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष न निकाला जाए.
भूवैज्ञानिकों ने बताई ये वजहें
जियोलॉजिस्ट नीतीश प्रियदर्शी ने इस घटना की तीन संभावित वजहें बताई हैं...
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लेकिन प्रियदर्शी साफ कहते हैं कि इन तीनों में से कोई भी कारण तभी सही माना जाएगा जब कुएं की सही गहराई और आसपास की भूगर्भीय स्थिति का पूरा पता चल जाए. उन्होंने 2017 से पहले म्यांमार में आए भूकंप के बारे में बताया. इस भूकंप के चलते रांची के कई इलाकों में अंडरग्राउंड ट्यूबवेल और पंप टूट गए थे. जमीन के अंदर पानी के स्रोत खिसक गए थे.
विशेषज्ञ भूमिगत भूजल दबाव, भूगर्भीय गतिविधि या किसी अनोखे एक्वीफर कनेक्शन को संभावित कारण बता रहे हैं. नई खुदाई वाले कुओं में कभी-कभी ऐसी अस्थाई घटनाएं देखने को मिलती हैं जब पानी का स्तर अचानक संतुलित होने की कोशिश करता है.
जांच क्यों जरूरी है?
इस तरह की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि गुजरात भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है. 2001 के भुज भूकंप की याद अभी भी ताजा है. इसलिए प्रशासन सतर्क है. जांच तेज की गई है. भूजल विभाग, भूगर्भ वैज्ञानिक और स्थानीय प्रशासन मिलकर कुएं की गहराई, पानी के रासायनिक गुण, आसपास की मिट्टी की संरचना और भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन करेंगे.
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अगर यह सिर्फ एक्वीफर दबाव की वजह से है तो चिंता की बात नहीं. लेकिन अगर भूगर्भीय हलचल से जुड़ा संकेत निकला तो आगे की निगरानी बढ़ानी पड़ सकती है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो पानी की लहर जैसी गति कई बार प्राकृतिक कारणों से होती है.
भूमिगत जल प्रवाह में बदलाव, दबाव का अंतर या छोटी भूगर्भीय हलचलें ऐसी घटनाओं को जन्म दे सकती हैं. आसपास के कुओं के शांत रहने से लगता है कि यह घटना किसी खास एक्वीफर से जुड़े स्थानीय प्रभाव की वजह से हो सकती है.
विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि अफवाहों से बचें और आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करें. सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के दावे फैलाने से अनावश्यक भय फैल सकता है. प्रशासन ने गांव वालों को शांत रहने और किसी भी असामान्य गतिविधि की जानकारी तुरंत देने को कहा है. फिलहाल कुएं की निगरानी जारी है.
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यह घटना याद दिलाती है कि प्रकृति के कई रहस्य अभी भी वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बने हुए हैं. भूमिगत जल प्रणाली कितनी जटिल हो सकती है यह ऐसे उदाहरणों से पता चलता है. जांच पूरी होने के बाद ही सही तस्वीर सामने आएगी. गुजरात प्रशासन और वैज्ञानिक समुदाय इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे या सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया की सही पहचान हो सके.
ऋचीक मिश्रा