भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन गुरुवार (6 अगस्त) को पहली बार स्पेसवॉक करेंगे. उनके साथ नासा की अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर भी होंगी. दोनों इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के बाहर करीब साढ़े छह घंटे तक काम करेंगे. इस मिशन का मकसद ISS की बिजली व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि इस साल के आखिर में नया सोलर पैनल लगाया जा सके. भारतीय समय के मुताबिक स्पेसवॉक शाम 6:05 बजे शुरू होगा, जबकि इसकी लाइव कवरेज 4:30 बजे से शुरू होगी.
ISS धरती से करीब 400 किलोमीटर ऊपर घूमता है. स्टेशन के बाहर कई ऐसे काम होते हैं जो अंदर रहकर नहीं किए जा सकते. इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों को खास स्पेससूट पहनकर बाहर जाना पड़ता है. अनिल मेनन पहली बार स्पेसवॉक करेंगे, जबकि जेसिका मीर इससे पहले पांच बार ऐसा कर चुकी हैं.
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स्पेसवॉक में क्या करेंगे?
अनिल मेनन और जेसिका मीर ISS के क्वेस्ट एयरलॉक से बाहर निकलेंगे. उनका सबसे बड़ा काम स्टेशन के 3B पावर चैनल में नया हार्डवेयर लगाना है. इससे इस साल के आखिर में आने वाले नए IROSA सोलर पैनल को लगाने में आसानी होगी.
IROSA क्या है?
IROSA नए तरह के सोलर पैनल हैं, जो पुराने पैनलों से ज्यादा बिजली बना सकते हैं। इस साल ISS पर सातवां IROSA लगाया जाएगा. इससे स्टेशन को ज्यादा बिजली मिलेगी. इसी बिजली से वैज्ञानिक प्रयोग, कंप्यूटर, जीवन रक्षक सिस्टम और दूसरे जरूरी उपकरण चलते हैं.
यह मिशन क्यों जरूरी है?
ISS साल 2000 से अंतरिक्ष में लगातार काम कर रहा है. इसलिए समय-समय पर इसकी मरम्मत और नए उपकरण लगाने पड़ते हैं. यह मिशन US स्पेसवॉक 96 कहलाता है. इसके साथ ISS के लिए किए गए स्पेसवॉक की कुल संख्या 281 हो जाएगी.
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अगस्त में होंगे तीन स्पेसवॉक
यह अगस्त का पहला स्पेसवॉक है. इसके बाद 13 अगस्त को दूसरा स्पेसवॉक होगा, जिसमें स्टेशन का कम्युनिकेशन एंटीना बदला जाएगा. फिर 25 अगस्त को तीसरा स्पेसवॉक होगा. इसमें पावर केबल, डेटा सिस्टम और डॉकिंग में इस्तेमाल होने वाले कुछ उपकरण बदले जाएंगे.
अनिल मेनन का पहला स्पेसवॉक उनके लिए बड़ा मौका है. वहीं ISS के लिए भी यह मिशन काफी अहम है. इससे स्टेशन नए सोलर पैनल के लिए तैयार होगा और आने वाले समय में उसे ज्यादा बिजली मिलेगी. इससे वैज्ञानिक रिसर्च और स्टेशन के दूसरे जरूरी काम पहले से बेहतर तरीके से चलते रहेंगे.
आजतक साइंस डेस्क