यूरोप इस समय सबसे भीषण गर्मी का सामना कर रहा है. फ्रांस में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि महज चार दिनों के भीतर करीब 1,000 लोगों की जान जा चुकी है. बताया जा रहा है कि यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है.
वहीं फ्रांस ही नहीं, बल्कि जर्मनी, इटली और पोलैंड भी इस समय भीषण तपिश की चपेट में हैं. यहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की उम्मीद जताई जा रही है.
फ्रांस में रिकॉर्ड‑तोड़ हीटवेव के कारण कई मौतें हो रही हैं. माना जा रहा है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है, यूरोप के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने की संभावना है, जिससे हालात और गंभीर हो सकते हैं.
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रॉयटर्स के मुताबिक, इस बीच फ्रांसीसी पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने कहा है कि गर्मी से जुड़ी मौतों में ज्यादातर बुजुर्ग लोग शामिल थे. पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने चेतावनी दी कि यह संख्या बढ़ सकती है क्योंकि रेजिडेंशियल केयर सेंटरों और निजी घरों में हुई मौतों के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है.
20 जून से भयानक गर्मी
वैज्ञानिकों का कहना है कि 20 जून से शुरू हुई यह हीटवेव यूरोप में अब तक की सबसे भीषण हीटवेव साबित हुई है. भीषण गर्मी ने बिजली उत्पादन में बाधा डाली है, बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव बना दिया है. कुल मिलाकर, गर्मी का असर लोगों की परेशानियों को लगातार बढ़ा रहा है.
विशेषज्ञों ने इसके पीछे का कारण जलवायु परिवर्तन बताया है. उनका कहना है कि इंसानों की वजह से हुए जलवायु परिवर्तन के बिना यह हीटवेव लगभग असंभव होती. जलवायु परिवर्तन ने इस हफ्ते रात के समय तापमान को असामान्य रूप से अधिक बढ़ा दिया है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं.
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