हाथी के दांत दिखाने के कुछ और, खाने के कुछ और... क्या विज्ञान भी मानता है इस मुहावरे को?

क्या हाथी अपने लंबे सफेद दांतों से खाना खाता है? या फिर ये सिर्फ दिखने के लिए होते हैं? इस मशहूर मुहावरे के पीछे छिपा वैज्ञानिक सच जानिए, जो आम धारणा से बिल्कुल अलग है.

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लंबे दांत के चक्कर में कई हाथियों को अपनी जान भी देनी पड़ी है. (File Photo: Getty) लंबे दांत के चक्कर में कई हाथियों को अपनी जान भी देनी पड़ी है. (File Photo: Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:22 AM IST

'हाथी के दांत दिखाने के कुछ और, खाने के कुछ और' यह मुहावरा हम अक्सर सुनते हैं. इसका मतलब होता है कि कोई व्यक्ति दिखाता कुछ है और असलियत कुछ और होती है. लेकिन क्या यह बात सच में हाथी पर लागू होती है? क्या हाथी के दिखने वाले और खाने वाले दांत अलग होते हैं? विज्ञान कहता है कि इस मुहावरे में थोड़ा सच जरूर है, लेकिन इसका मतलब वैसा नहीं है जैसा हम समझते हैं.

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अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री और सैन डिएगो वाइल्ड लाइफ अलायंस के मुताबिक, हाथी के मुंह में दो तरह के दांत होते हैं. बाहर दिखाई देने वाले लंबे दांत, जिन्हें टस्क (Tusks) कहा जाता है, और मुंह के अंदर मौजूद बड़ी दाढ़ (Molars). दोनों का काम पूरी तरह अलग है.

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हाथी के लंबे दांत खाने के लिए नहीं होते

सैन डिएगो वाइल्ड लाइफ अलायंस के अनुसार, हाथी के टस्क वास्तव में उसके आगे के दांत होते हैं, जो पूरी जिंदगी बढ़ते रहते हैं. इनका इस्तेमाल खाना चबाने के लिए नहीं होता. हाथी इनसे पेड़ों की छाल निकालता है, जमीन खोदकर पानी या खनिज ढूंढ़ता है, भारी चीजें हटाता है और जरूरत पड़ने पर अपनी रक्षा भी करता है.

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फिर हाथी खाना किससे चबाता है?

अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के मुताबिक, हाथी अपनी सूंड से खाना उठाकर मुंह में रखता है. इसके बाद मुंह के अंदर मौजूद बड़ी और मजबूत मोलर्स (Molars) घास, पत्तियां, फल और पेड़ों की छाल को पीसकर चबाती हैं. यानी खाने का पूरा काम दाढ़ करती हैं, टस्क नहीं.

क्या बड़े टस्क वाला हाथी हमेशा ज्यादा ताकतवर होता है?

यह धारणा भी पूरी तरह सही नहीं है. भारतीय हाथियों पर किए गए एक पीयर-रीव्डू अध्ययन, जिसे प्रसिद्ध हाथी विशेषज्ञ डॉ. रमन सुकुमार और उनके सहयोगियों ने पब्लिश किया, के अनुसार नर हाथियों की लड़ाई में केवल टस्क ही नहीं, बल्कि शरीर का आकार, उम्र और मस्थ (Musth) नाम की हार्मोनल अवस्था ज्यादा अहम भूमिका निभाती है. कई बार छोटे या बिना टस्क वाले नर हाथी भी मुकाबला जीत सकते हैं.

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इंसानों ने हाथियों के दांतों के विकास को भी बदला

अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) और साइंस जर्नल में छपे शोध के अनुसार, अफ्रीका में वर्षों तक हाथीदांत (Ivory) के लिए हुए शिकार के कारण बिना टस्क वाली मादा हाथियों की संख्या बढ़ने लगी. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्राकृतिक चयन (Natural Selection) का उदाहरण है, जहां शिकार से बचने वाले हाथियों के जीन अगली पीढ़ी तक ज्यादा पहुंचे.

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क्या मुहावरा वैज्ञानिक रूप से सही है?

अगर केवल दांतों की बात करें तो हाथी के बाहर दिखने वाले और अंदर खाना चबाने वाले दांत सचमुच अलग होते हैं. लेकिन विज्ञान यह नहीं कहता कि बाहर के दांत सिर्फ दिखावे के लिए हैं. टस्क हाथी के लिए एक जरूरी औजार हैं, जो उसे भोजन जुटाने, पर्यावरण के साथ तालमेल बैठाने और खुद की रक्षा करने में मदद करते हैं. यानी यह मुहावरा भाषा में तो लोकप्रिय है, लेकिन विज्ञान की नजर से देखें तो इसकी पूरी सच्चाई कुछ अलग है.                                                                                                     रिपोर्टः साक्षी प्रजापति

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