भारत में गर्मी अब सिर्फ गर्मी नहीं रही, बल्कि एक बड़ा संकट बन गई है. CEEW की रिपोर्ट के अनुसार देश के 57% जिलों में, जहां देश की 76% आबादी रहती है, हाई से वेरी हाई लेवल की गर्मी का खतरा है. यानी 4 में से 3 भारतीय ऐसे जिलों में रह रहे हैं जहां गर्मी उनके स्वास्थ्य, आजीविका और जीवन को गंभीर खतरा पहुंचा रही है. यह रिपोर्ट न सिर्फ दिन के तापमान, बल्कि रात के तापमान और ह्यूमिडिटी को भी ध्यान में रखकर तैयार की गई है.
रिपोर्ट में 734 जिलों का डिटेल स्टडी की गई है. 35 अलग-अलग मानकों - खतरा, जोखिम में पड़ने वाली आबादी और उनकी कमजोरियों के आधार पर गर्मी का जोखिम इंडेक्स तैयार किया गया. 1982 से 2022 तक के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि पिछले 40 सालों में गर्मी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.
यह भी पढ़ें: PAK की मध्यस्थता फेल... मुनीर और नकवी की तेहरान दौड़ भी नहीं रोक सकी अमेरिका-ईरान टकराव
सबसे चिंताजनक बात यह है कि पिछले 10 सालों में बहुत गर्म रातें बहुत तेजी से बढ़ी हैं, जबकि बहुत गर्म दिन तुलना में कम बढ़े हैं. 70% जिलों में गर्मियों में 5 या उससे ज्यादा अतिरिक्त गर्म रातें दर्ज की गईं. रात में गर्मी होने से शरीर को दिन की गर्मी से उबरने का मौका नहीं मिलता, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं.
कौन-कौन से राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित?
वेरी हाई लेवल की गर्मी वाले टॉप 10 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं- दिल्ली, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश.
पश्चिमी तट (गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, केरल) के 75% से ज्यादा जिलों में बहुत जोखिम है. दिल्ली के शहरी जिलों में भी आधे से ज्यादा क्षेत्र बहुत उच्च जोखिम वाले हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार के कृषि क्षेत्रों में भी गर्मी का खतरा बहुत बढ़ गया है.
यह भी पढ़ें: बारिश कम कर सकती है नौतपा का ताप... आज से शुरू हो रहा मौसम का नया स्पेल, जानिए IMD का अलर्ट
रात की गर्मी और आर्द्रता का बढ़ता खतरा
पिछले दशक में उत्तर भारत और गंगा के मैदानी इलाकों में ह्यूमिडिटी में 10% तक की वृद्धि हुई है. दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर, कानपुर जैसे शहरों में ह्यूमिडिटी बढ़ने से गर्मी और भी असहनीय हो गई है.
शहरों में कंक्रीट और इमारतों की संख्या बढ़ने से अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव पैदा हो रहा है. दिन में गर्मी सोखने वाली सतहें रात में गर्मी छोड़ती हैं, जिससे रात का तापमान बढ़ जाता है. मुंबई में पिछले 10 सालों में 15 अतिरिक्त गर्म रातें, बेंगलुरु में 11 और दिल्ली में 6 अतिरिक्त गर्म रातें दर्ज की गईं.
गर्मी का सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर, बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है. आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, बिहार और उत्तर प्रदेश के जिलों में आबादी की संवेदनशीलता बहुत अधिक है. इन इलाकों में एनीमिया, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां भी ज्यादा हैं, जो गर्मी के साथ मिलकर स्थिति और खराब कर देती हैं.
सरकार और विशेषज्ञों की सिफारिशें
रिपोर्ट में 5 महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं...
यह भी पढ़ें: ईरान के बंदर अब्बास पर ही बार-बार क्यों हमले कर रहा अमेरिका? होर्मुज से है कनेक्शन
आगे का रास्ता
2024 दुनिया और भारत का सबसे गर्म साल रहा. गर्मी अब मौसमी समस्या नहीं, बल्कि साल भर बढ़ती जा रही चुनौती है. अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो 2030 तक भारत को लाखों नौकरियां और GDP का बड़ा नुकसान हो सकता है.
यह रिपोर्ट स्पष्ट संदेश देती है कि गर्मी से निपटने के लिए अब जागरूकता, डेटा-आधारित प्लानिंग और तत्काल कार्रवाई की जरूरत है. जिलों को अपनी स्थानीय स्थिति के अनुसार हीट एक्शन प्लान बनाना होगा.
भारत जैसे विविधता वाले देश में गर्मी का खतरा हर जगह अलग-अलग है. दिल्ली की गर्मी अलग है. मुंबई की नमी वाली गर्मी अलग है. राजस्थान की सूखी गर्मी अलग. इसलिए समाधान भी स्थानीय स्तर पर निकालने होंगे.
3 में से 4 भारतीय उच्च गर्मी जोखिम वाले क्षेत्रों में रह रहे हैं. यह आंकड़ा चेतावनी है. जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी की मार बढ़ रही है. अब समय आ गया है कि हम सिर्फ गर्मी सहने के बजाय उससे लड़ने की तैयारी करें.
ऋचीक मिश्रा