Kitchen Vastu Tips: रसोई में बैठकर भोजन करना शुभ, बस ये जरूरी बात रखें याद

सुबह का खाना पूर्व दिशा में या अग्नि तत्व की दिशा में यानी साउथ-ईस्ट से लेकर साउथ दिशा तक बनी रसोई में बैठकर खाना बहुत अच्छा माना जाता है. भारतीय परंपरा में पहले घर की रसोई के अंदर ही बैठकर खाना खाने की प्रथा थी.

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वास्तु में अग्नि तत्व की दिशाएं शारीरिक अंगों में अग्नाशय को प्रदर्शित करती हैं, जो भोजन को पचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. (Photo: ITG) वास्तु में अग्नि तत्व की दिशाएं शारीरिक अंगों में अग्नाशय को प्रदर्शित करती हैं, जो भोजन को पचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. (Photo: ITG)

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 27 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:55 PM IST

जिस तरह रसोई के लिए अग्नि तत्व की दिशा सबसे बेहतर मानी जाती है, उसी तरह भोजन करने के लिए भी सबसे बेहतर दिशा अग्नि तत्व की दिशाएं ही मानी जाती हैं. इस बात को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझा जा सकता है. खाना खाते समय उसे पचाने के लिए शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है. वास्तु में अग्नि तत्व की दिशाएं शारीरिक अंगों में अग्नाशय को प्रदर्शित करती हैं, जो भोजन को पचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसलिए भोजन करते समय दिशा का भी ध्यान रखना चाहिए.

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सुबह का खाना पूर्व दिशा में या अग्नि तत्व की दिशा में यानी साउथ-ईस्ट से लेकर साउथ दिशा तक बनी रसोई में बैठकर खाना बहुत अच्छा माना जाता है. भारतीय परंपरा में पहले घर की रसोई के अंदर ही बैठकर खाना खाने की प्रथा थी. समय के साथ यह परंपरा बदल गई और अब घरों में डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाने का चलन अधिक हो गया है. हालांकि वास्तु की दृष्टि से भोजन करते समय दिशा और बैठने के तरीके का ध्यान रखना आज भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

भूमि पर बैठकर खाना खाएं
जमीन पर बैठकर पालती मारकर खाना खाना चाहिए. भूमि मंगल ग्रह यानी ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है. वहीं मेज-कुर्सी पर पैर लटकाकर खाना खाने के बजाय जमीन पर पालती मारकर भोजन करने से शरीर की स्थिति ऐसी रहती है, जिससे पाचन प्रक्रिया को बेहतर रखने में मदद मिलती है. रक्त का संचरण पैरों की ओर होने के बजाय पेट की ओर रहता है, जिससे भोजन पचने में मदद मिलती है.

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जमीन पर बैठकर भोजन करने की भारतीय परंपरा केवल हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसे शरीर की मुद्रा से भी महत्वपूर्ण है. पालती मारकर बैठने से शरीर एक विशेष मुद्रा में आ जाता है. भोजन करते समय शरीर का ध्यान भी भोजन पर रहता है और व्यक्ति सामान्य तौर पर धीरे-धीरे भोजन करता है. इससे भोजन को अच्छी तरह चबाने में भी मदद मिलती है. इसलिए जहां तक संभव हो, भोजन करते समय जमीन पर बैठने की पुरानी परंपरा को अपनाया जा सकता है.

किस दिशा में भोजन करना शुभ?
जहां तक संभव हो, अग्नि तत्व की दिशाओं में ही भोजन करना सबसे लाभप्रद है. इसके अलावा पूर्व और पश्चिम दिशा में भी बैठकर भोजन किया जा सकता है. सुबह का भोजन पूर्व दिशा की ओर बैठकर करना विशेष रूप से अच्छा माना जाता है. लेकिन नॉर्थ-वेस्ट से लेकर उत्तर दिशा में होते हुए नॉर्थ-ईस्ट दिशा तक यानी जल तत्व की दिशाओं में बैठकर खाना वास्तु की दृष्टि से पाचन संबंधी समस्याएं देने वाला माना जाता है. इसलिए भोजन करने के स्थान का चयन करते समय इन दिशाओं का भी ध्यान रखना चाहिए.

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