इस मंदिर में अन्नकूट के दिन डेढ़ हजार से ज्यादा व्यंजनों का भोग लगा कान्हा को

अक्षरधाम मंदिर में दस हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने अन्नकूट भोग के दर्शन किए. इस भोग में डेढ़ हजार से ज्यादा व्यंजन थे.

Advertisement
अक्षरधाम में श्रद्धालुओं ने किए अन्नकूट भोग के दर्शन अक्षरधाम में श्रद्धालुओं ने किए अन्नकूट भोग के दर्शन

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 01 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 1:18 PM IST

अक्षरधाम मंदिर में दस हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने छह घंटों में न केवल अन्नकूट भोग के दर्शन किए बल्कि प्रसाद भोजन भी पाया. इस भोग में डेढ़ हजार से ज्यादा व्यंजन थे.

यूं तो अन्नकूट की परंपरा द्वापर युग में बालकृष्ण की गोवर्धन धारण लीला से शुरू हुई थी. कान्हा ने इंद्र का मान भंग करने और गोप ग्वाल समाज को प्रकृति से जोड़ने के लिए ये किया. इंद्र की पूजा बंद कर गिरिराज पर्वत की पूजा का विधान किया. इंद्र ने कोप कर घनघोर वर्षा की तो कान्हा ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन लिया. सात दिन-रात बारिश हुई और भूखे प्यासे कान्हा ने गोवर्धन उठाए रखा.

Advertisement



माता यशोदा जो रोज अपने लाडले लाल को आठ बार भोग लगाती थी वो भूखा प्यासा इंद्र को अंगूठा दिखाता रहा. ब्रजवासियों ने सात दिन की कसर एक दिन में ही पूरी कर दी. सात दिन के आठ का हिसाब लगा 56 व्यंजन का भोग कान्हा को लगाया गया.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »