Solar Eclipse 2027: फरवरी में लगेगा ऐसा सूर्य ग्रहण, सूर्य बनेगा आग का छल्ला!

Solar Eclipse 2027: 6 फरवरी 2027 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा. इस दौरान आसमान में रिंग ऑफ फायर यानी आग का छल्ला दिखाई देगा. जानें यह ग्रहण कहां नजर आएगा और इसकी खासियत क्या है.

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नासा के अनुसार, 6 फरवरी 2027 को वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा. नासा के अनुसार, 6 फरवरी 2027 को वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST

Solar Eclipse 2027:  आसमान में होने वाली खगोलीय घटनाएं हमेशा लोगों का ध्यान खींचती हैं.  साल 2027 में भी एक बेहद खास सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा.  6 फरवरी 2027 को वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा. इस दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा.  सूर्य के चारों ओर रोशनी का एक चमकता हुआ घेरा दिखाई देगा, जिसे रिंग ऑफ फायर यानी आग का छल्ला कहा जाता है. 

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क्या होता है वलयाकार सूर्य ग्रहण?

सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है.लेकिन वलयाकार सूर्य ग्रहण के समय चंद्रमा सूर्य के सामने तो होता है, मगर वह सूर्य से छोटा दिखाई देता है.इसलिए सूर्य का बीच वाला हिस्सा ढक जाता है, उसके चारों ओर रोशनी का गोल घेरा नजर आता है.इसी चमकते हुए घेरे की वजह से इसे रिंग ऑफ फायर कहा जाता है.

6 फरवरी 2027 को होगा सूर्य ग्रहण

नासा के अनुसार, 6 फरवरी 2027 को वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा.इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य के करीब 93 फीसदी हिस्से को ढक सकता है.ग्रहण के सबसे बड़े चरण में सूर्य के चारों ओर चमकता हुआ छल्ला करीब 7 मिनट 51 सेकंड तक दिखाई दे सकता है.यह इस दशक के लंबे वलयाकार सूर्य ग्रहणों में से एक होगा.

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किन देशों में दिखेगा रिंग ऑफ फायर?

यह ग्रहण दुनिया के हर हिस्से से नहीं दिखाई देगा.इसका मुख्य रास्ता दक्षिण अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों से होकर गुजरेगा.दक्षिण अमेरिका में चिली और अर्जेंटीना के कुछ हिस्सों में इसे बेहतर तरीके से देखा जा सकेगा.इसके अलावा इसका रास्ता उरुग्वे और ब्राजील के कुछ हिस्सों के पास से भी गुजरेगा.

अटलांटिक महासागर को पार करने के बाद यह ग्रहण पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा.इनमें कोट द आइवोर, घाना, टोगो, बेनिन और नाइजीरिया शामिल हैं.

इतना लंबा क्यों होगा यह सूर्य ग्रहण?

इस सूर्य ग्रहण की खास बात इसकी लंबी अवधि भी है.इसकी वजह चंद्रमा और पृथ्वी की स्थिति है.ग्रहण के समय चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत दूर होगा, इसलिए वह आसमान में थोड़ा छोटा दिखाई देगा.दूसरी ओर, पृथ्वी सूर्य के करीब होगी, जिससे सूर्य हमें थोड़ा बड़ा दिखाई देगा.

ऐसी स्थिति में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता जिससे सूर्य के चारों ओर रोशनी का घेरा बना रहता है.यही वजह है कि इस ग्रहण का रिंग ऑफ फायर चरण काफी देर तक रह सकता है.

क्या भारत में दिखाई देगा?

6 फरवरी 2027 का यह वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत से रिंग ऑफ फायर के रूप में दिखाई नहीं देगा.इसे देखने के लिए दक्षिण अमेरिका या पश्चिमी अफ्रीका के उन इलाकों में जाना होगा जो ग्रहण के मुख्य रास्ते में आते हैं.

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सूर्य ग्रहण देखते समय रखें सावधानी

सूर्य ग्रहण को सीधे आंखों से देखना सुरक्षित नहीं है.वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान भी सूर्य की तेज रोशनी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है.इसलिए इसे देखने के लिए सूर्य ग्रहण देखने वाले प्रमाणित विशेष चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए.सामान्य सनग्लास इसके लिए सुरक्षित नहीं माने जाते.

आगे भी होंगे खास ग्रहण

साल 2027 में कुल दो सूर्य ग्रहण होंगे.पहला 6 फरवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण और दूसरा 2 अगस्त 2027 को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा.इसके अलावा उस साल तीन चंद्र ग्रहण भी होंगे.

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