वैसे तो देश में जगह-जगह भगवान शिव के मंदिर मौजूद हैं. लेकिन राजस्थान के अलवर में एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान दिन में तीन बार रूप बदलते हैं. 300 साल से माता पार्वती और भगवान शिव के रूप में दो ज्योति लगातार जल रही है. इस मंदिर में राजस्थान के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित आस-पास के राज्यों व शहरों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. यहां लोगों की मुरादें पूरी होती हैं और अपनी मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु बाबा की अखंड ज्योति में घी चढ़ाने आते हैं.
सावन के पहले सोमवार भी अलवर के ऐतिहासिक श्रीत्रिपोलिया महादेव मंदिर में तड़के ही शिव भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा. सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही गंगाजल अभिषेक और प्रथम आरती हुई, जिसके बाद श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं. "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो गया. शहर ही नहीं, आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचे.
दिन में 3 बार रंग बदलता है मंदिर
अलवर की सबसे प्राचीन धार्मिक परंपराओं में से एक श्री त्रिपोलिया महादेव मंदिर में इस बार भी अद्भुत आस्था, भक्ति और श्रद्धा का साक्षी बन गया. लगभग 300 वर्ष पुराना अलवर सिंह द्वार स्थित यह प्राचीन शिवालय केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि अलवर की धार्मिक पहचान और करोड़ों आस्थाओं का केंद्र है.
यहां विराजमान नर्मदेश्वर शिवलिंग का दिन में तीन बार रंग बदलना आज भी श्रद्धालुओं के लिए किसी दिव्य चमत्कार से कम नहीं माना जाता है. मंदिर स्थापना के समय से निरंतर प्रज्वलित अखंड ज्योत सदियों से चली आ रही व्यापारी समाज की परंपरा, पंचायतन स्वरूप और भक्तों की अटूट आस्था इस धाम को पूरे मेवात क्षेत्र के प्रमुख शिवालयों में विशेष स्थान दिलाती है.
सावन के पावन महीने में यहां का वातावरण पूरी तरह शिवमय हो जाता है. मान्यता है कि बाबा त्रिपोलिया महादेव के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता. अलवर शहर के सर्राफा बाजार, मालाखेड़ा बाजार सहित 74 व्यापारिक क्षेत्रों के व्यापारी आज भी अपनी दुकान खोलने से पहले मंदिर के गौमुख से जल लेकर अपनी दुकान और प्रतिष्ठान की मंगल कामना करते हैं.
मंदिर परिसर में स्थित चमत्कारी चलुंदी का जल श्रद्धालु नजर दोष दूर करने के लिए अपने साथ ले जाते हैं. शिव परिवार के साथ दुर्गा माता, श्रीराम दरबार, हनुमान जी, भगवान नृसिंह और लक्ष्मी नारायण की दिव्य उपस्थिति इस मंदिर को अद्वितीय पंचायतन स्वरूप प्रदान करती है.
हिमांशु शर्मा