Janmashtami 2026 Puja Muhurat: हिंदू धर्म में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत पवित्र और हर्षोल्लास का प्रतीक माना जाता है. इस साल जन्माष्टमी 4 तारीख को मनाई जाएगी. इस वर्ष का कृष्ण जन्मोत्सव केवल एक सामान्य पर्व नहीं, बल्कि अत्यंत दुर्लभ और सिद्ध फलदायी होने जा रहा है.
ज्योतिषविदों और धर्मशास्त्रियों के अनुसार, इस जन्माष्टमी पर ठीक वैसा ही दुर्लभ और महापुण्यकारी संयोग बन रहा है, जैसा द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य के समय बना था. भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि के चंद्रमा की दिव्य युति के साथ-साथ इस बार 'सर्वार्थ सिद्धि योग' और 'हर्षण योग' का भी अद्भुत तालमेल बैठ रहा है. ऐसा माना जा रहा है कि इस महासंयोग में बाल गोपाल की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होंगी और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी.
द्वापर युग वाला दुर्लभ संयोग क्यों है इतना खास?
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, जब भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा में कंस की जेल में अवतार लिया था, तब भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी, आकाश में रोहिणी नक्षत्र उदित था, और चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर कर रहे थे.
इस वर्ष जन्माष्टमी पर भी अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के साथ हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ तालमेल बन रहा है. ज्योतिषविदों का मानना है कि जब ऐसे सिद्ध और शुभ योग एक साथ सक्रिय होते हैं, तो इस दौरान किए गए शुभ कार्यों, पूजा-पाठ, दान और संकल्पों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है. यदि कोई साधक इस दिव्य मुहूर्त में निष्कपट भाव से कान्हा का पूजन और मंत्र जाप करता है, तो उसके जीवन के बड़े से बड़े कष्ट और दरिद्रता का नाश हो जाता है.
जन्माष्टमी पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त (Janmashtami Puja Muhurat)
भगवान श्री कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि (रात 12 बजे) में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की मुख्य पूजा निशिता काल (निशीथ काल) में ही की जाती है.
पूजा का शुभ समय आज रात 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. शुभ मुहूर्त लगभग 45 मिनट तक रहेगा.
व्रत पारण का समय
5 सितंबर को सुबह 06:01 बजे के बाद पारण किया जा सकता है.
इस शुभ संयोग में कैसे करें पूजा?
निशिता काल (रात 12 बजे) में बाल गोपाल को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से स्नान कराएं. इसके बाद कान्हा को पीले या रेशमी वस्त्र पहनाएं, मुकुट, वैजयंती माला और मोरपंख सजाएं. फिर, लड्डू गोपाल को तुलसी पत्र डालकर माखन-मिश्री, धनिया की पंजीरी और पंचमेवा का भोग लगाएं. इसके बाद, ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का 108 बार जाप करें और धूप-दीप दिखाकर बांके बिहारी की भावपूर्ण आरती करें.
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