Shardiye Navratri 2026: नवरात्र के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की विधान बताया गया है. महर्षि कात्यायन की पुत्री होने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा था. मान्यता है कि इस नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं. आइए जानते हैं कि मां कात्यायनी की पूजन विधि क्या है.
कौन हैं मां कात्यायनी?
मां कात्यायनी की चार भुजाएं हैं. उनके हाथों में अस्त्र-शस्त्र और कमल सुशोभित हैं और जबकि उनका वाहन सिंह है. उन्हें ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी माना गया है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने की कामना से ब्रज की गोपियों ने मां कात्यायनी की उपासना की थी. इसी वजह से मां कात्यायनी की पूजा को विवाह से जुड़ी मनोकामनाओं के लिए विशेष माना जाता है.
भक्त मानते हैं कि उनकी कृपा से विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो सकती हैं और मनचाहा जीवनसाथी मिलने की कामना पूरी हो सकती है. ज्योतिषीय मान्यताओं में मां कात्यायनी का संबंध बृहस्पति ग्रह से भी जोड़ा जाता है.
मां कात्यायनी की पूजा विधि
सबसे पहले हाथ में पुष्प लेकर देवी का ध्यान करें. फिर पंचोपचार विधि से पूजा करते हुए मां को लाल फूल, अक्षत, कुमकुम और सिंदूर अर्पित करें. मां कात्यायनी की पूजा में पीले रंग की वस्तुओं का भी विशेष महत्व माना जाता है. इसलिए मां को पीले फल और पीली मिठाई का भोग लगाएं. पूजा के अंत में देवी के सामने घी या कपूर का दीपक जलाकर आरती करें. इसके बाद मां कात्यायनी के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें.
मां कात्यायनी मंत्र
"कात्यायनी महामाये , महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः॥"
मां कात्यायनी जी की आरती
जय जय अंबे जय कात्यायनी।
जय जग माता जग की महारानी ॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहावर दाती नाम पुकारा ॥
कई नाम है कई धाम है।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी।
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी ॥
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भगत है कहते ॥
कत्यानी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की ॥
झूठे मोह से छुडाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली ॥
बृहस्पतिवार को पूजा करिए।
ध्यान कात्यानी का धरिये ॥
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी ॥
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे ॥
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