सावन शिवरात्रि का त्योहार 11 अगस्त को मनाया जाएगा. यह महापर्व भगवान शिव की पूजा, व्रत, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक के लिए समर्पित है. इस दिन भक्त पूरी आस्था के साथ व्रत रखते हैं और पूरे विधि-विधान से महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं. हालांकि इस बार सावन शिवरात्रि के त्योहार पर एक बड़ा दुर्लभ संयोग बन रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया रहने वाला है. इसलिए श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ और जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त का सही जरूर पता होना चाहिए.
सावन शिवरात्रि की तिथि और भद्रा का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026 को सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी. इसका समापन 12 अगस्त को रात 1 बजकर 52 मिनट पर होगा. उदया तिथि और निशिता मुहूर्त के आधार पर 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाना शुभ माना गया है. हालांकि इस दिन भद्रा का संयोग भी बन रहा है. 11 अगस्त दिन मंगलवार को भद्रा काल सुबह 5 बजकर 48 मिनट से दोपहर 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा.
11 अगस्त को मनाई जाएगी सावन शिवरात्रि
हिंदू धर्म में सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है. यह पर्व सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है. मान्यता है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने, रुद्राभिषेक करने और व्रत रखने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं. श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना से पूरे विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं. इसी दिन कांवड़िए भी भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.
जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 23 मिनट से सुबह 6 बजे तक रहेगा. अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक होगा. वहीं गोधूलि मुहूर्त रात 9 बजकर 13 मिनट से 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगा. श्रद्धालु इन शुभ समय में भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं. चूंकि चंद्रमा कर्क राशि में है, इसलिए यह भद्रा पृथ्वी लोक पर मान्य होगी जिसे बहुत अशुभ माना जाता है.
शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मुहूर्त क्या है?
भगवान शिव देवों के देव हैं. शास्त्रों में उन्हें संहारककर्ता और महाकाल जैसे नाम दिए गए हैं. यानी शिव स्वयं काल के भी महाकाल हैं. ऐसे में सावन शिवरात्रि पर श्रद्धा से किया गया जलाभिषेक और पूजन पूरी तरह फलित होगा, भले ही उस समय भद्रा क्यों न लग रही हो. फिर भी आप अगर सर्वोच्च मुहूर्त में जलाभिषेक करना चाहते हैं तो सुबह से शाम तक तीन अचूक मुहूर्त रहेंगे.
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 23 मिनट से सुबह 6 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 06 मिनट से दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- रात 09 बजकर 13 मिनट से रात 09 बजकर 32 मिनट तक
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