Sawan Amavasya 2026: 11 या 12 अगस्त, सावन की अमावस्या कब है? जानें सूर्य ग्रहण के बीच क्या रहेगा दान-स्नान का मुहूर्त

हरियाली अमावस्या पर साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण भी लगने वाला है. यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार, यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 की रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा और 13 अगस्त 2026 की तड़के 4 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा. ऐसे में लोगों को यह जानना जरूरी है कि सूर्य ग्रहण के बीच वो हरियाली अमावस्या पर दान-स्नान कब और कैसे कर सकेंगे.

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हरियाली अमावस्या पर साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है. (Photo: ITG) हरियाली अमावस्या पर साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:55 PM IST

Sawan Amavasya 2026: सावन माह की अमावस्या आने वाली है. इसे हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना, पवित्र स्नान, दान-पुण्य और पितरों का तर्पण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. हालांकि इस बार हरियाली अमावस्या पर साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण भी लगने वाला है. आइए जानते हैं कि हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण के बीच स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है.

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कब है सावन अमावस्या 2026?
हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि का आरंभ 12 अगस्त को रात 1 बजकर 52 मिनट पर होगा और इसका समापन रात 12 अगस्त की रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा. ऐसे में हरियाली अमावस्या पर 12 अगस्त दिन बुधवार को ही मान्य होगी.

साल का दूसरा सूर्य ग्रहण
हरियाली अमावस्या पर साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण भी लगने वाला है. यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार, यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 की रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा और 13 अगस्त 2026 की तड़के 4 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा. ऐसे में लोगों को यह जानना जरूरी है कि सूर्य ग्रहण के बीच वो हरियाली अमावस्या पर दान-स्नान कब और कैसे कर सकेंगे.

हरियाली अमावस्या पर कब-कैसे होगा दान-स्नान?
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है. इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. ऐसे में लोग ग्रहण के कारण संकोच किए बिना कभी भी स्नान-दान कर सकते हैं. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 23 मिनट से 5 बजकर 6 मिनट तक रहेगा. इसमें स्नान-दान करना बहुत उत्तम होगा. इसके अलावा इस दिन पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए चार अलग-अलग मुहूर्त रहने वाले हैं.

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चर मुहूर्त: सुबह 5:38 बजे से 7:20 बजे तक
लाभ मुहूर्त: सुबह 7:20 बजे से 9:03 बजे तक
अमृत मुहूर्त: सुबह 9:03 बजे से 10:45 बजे तक
शुभ मुहूर्त: दोपहर 12:27 बजे से 2:10 बजे तक

हरियाली अमावस्या पर करें ये 3 काम

1. इस पावन अवसर पर यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ में स्नान करें. यदि बाहर जाकर स्नान करना संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है.

2. स्नान के बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार तिल, अन्न, वस्त्र या धन का दान करना शुभ माना गया है. दान-पुण्य के कार्यों को इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है.

3. सावन अमावस्या भगवान शिव की आराधना के लिए भी अत्यंत शुभ मानी जाती है. इस दिन शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर विधिपूर्वक जलाभिषेक करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धापूर्वक शिव पूजन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

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