उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भगवान शिव के कई प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर हैं, जिनसे भक्तों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. इन्हीं में से एक है भूतेश्वर महादेव मंदिर. मान्यता है कि यह मंदिर मराठा कालीन है और यहां स्वयंभू अष्टकोणीय शिवलिंग स्थापित है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जो भक्त लगातार 40 दिन तक भूतेश्वर बाबा का जलाभिषेक करता है और दीपक जलाकर सच्चे मन से पूजा-अर्चना करता है, उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है. यही वजह है कि सहारनपुर के अलावा हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और दिल्ली से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. सावन और शिवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
अपने आप बजने लगती हैं मंदिर की घंटियां
भूतेश्वर महादेव मंदिर को लेकर कई ऐसी मान्यताएं भी हैं, जिन्हें भक्त आज भी आस्था और चमत्कार से जोड़कर देखते हैं. मंदिर समिति के मंत्री आशुतोष अग्रवाल के मुताबिक, बुजुर्गों और इतिहासकारों से मिली जानकारी के अनुसार यह मंदिर मराठा कालीन है और प्राचीन समय में साधु-संतों की तप भूमि भी रहा है. मान्यता है कि पुराने समय में रात के वक्त मंदिर में भगवान शिव का श्रृंगार अपने आप हो जाता था और मंदिर की घंटियों की आवाज सुनाई देती थी. मंदिर समिति का कहना है कि आज भी कई बार भक्तों को ऐसी घटनाओं का एहसास होता है, जिसे वे भगवान शिव की उपस्थिति मानते हैं.
सावन में दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं लोग
शिवरात्रि के पावन पर्व पर हरिद्वार से गंगाजल लेकर आने वाले कांवड़िए भी भूतेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करना शुभ मानते हैं. मंदिर समिति के अनुसार, इस बार बड़ी संख्या में कांवड़िये यहां जल चढ़ाने पहुंचेंगे और यह संख्या 50 हजार से अधिक होने का अनुमान है. सावन में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं. भक्तों का मानना है कि भूतेश्वर बाबा सच्चे मन से आने वाले हर श्रद्धालु की पुकार सुनते हैं. इसी आस्था के चलते सहारनपुर का यह प्राचीन शिवालय आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र बना हुआ है.
मंदिर समिति के लोगों का कहना है कि हर साल सावन में यहां दूर-दूर से भक्त दर्शन करने आते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं. सावन शिवरात्रि के दिन भी यहां भारी संख्या में भक्तों की भीड़ जमा हो सकती है. इस साल सावन शिवरात्रि का त्योहार 11 अगस्त को मनाया जाएगा. मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां समय-समय पर भोलेनाथ अपनी मौजूदगी का संकेत दे देते हैं. इसका अंदाजा आस-पास मौजूद लोगों को लग जाता है.
राहुल कुमार