'मेरा जन्म ही नहीं हुआ...', खूब वायरल हो रहा प्रेमानंद महाराज का ये वीडियो

प्रेमानंद महाराज का सोशल मीडिया पर एक वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है. कुछ समय पहले प्रेमानंद के दरबार में आए एक शख्स ने उनसे पूछा कि महाराज जी आपका जन्म क्यों हुआ है? इसके जवाब में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि मैं अजन्मा हूं. हमारा जन्म ही नहीं हुआ है. मेरा होना सत्य नहीं है. मैं निर्विकार हूं.

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जानें, क्या हुआ जब एक शख्स ने प्रेमानंद महाराज से पछा कि आपका जन्म क्यों हुआ है. (Photo: ITG) जानें, क्या हुआ जब एक शख्स ने प्रेमानंद महाराज से पछा कि आपका जन्म क्यों हुआ है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:01 PM IST

वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. प्रेमानंद के इस वीडियो की बहुत सारे लोग प्रशंसा कर रहे हैं तो कुछ यूजर उन्हें ट्रोल भी कर रहे हैं. यह वीडियो कुछ समय पहले का है, लेकिन शिष्य दीपक लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद ये वीडियो अचानक फिर से वायरल होने लगा है. आइए जानते हैं कि वायरल हो रहे इस वीडियो में प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा है.

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प्रेमानंद महाराज के दरबार में कई भक्त उनसे वार्तालाप करने और अपनी समस्याओं का समाधान पूछने आते हैं. कुछ समय पहले दरबार में आए एक शख्स ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि महाराज जी आपका जन्म क्यों हुआ है?

मेरा होना सत्य नहीं है: प्रेमानंद
इस सवाल का जवाब देने से पहले प्रेमानंद थोड़ा मुस्कुराए और बोले, 'स्वप्न है! मैं अजन्मा हूं. हमारा जन्म ही नहीं हुआ है. मेरा होना सत्य नहीं है. मैं निर्विकार हूं. मैं विकारी जैसे शरीर को स्वीकार करने के कारण विकारी जैसा दिखता हूं. जन्म-मरण युक्त शरीर को स्वीकार करने के कारण जन्म-मरण वाला दिखाई देता हूं. पर वास्तव में मैं अजन्मा हूं. मैं निर्विकार हूं.'

इसके बाद लोगों के बीच बैठे प्रेमानंद के एक शिष्य ने पूछा कि क्या हम आपको सपने में देख रहे हैं. इस पर प्रेमानंद बोले, 'ये प्रेमानंदधारी शरीर स्वाप्निक है. यह सत्य नहीं है. यह न था और न रहेगा. कुछ समय बाद ये एक सपने की तरह मिट जाएगा. लेकिन मेरा अस्तित्व था. मेरा अस्तित्व है और मेरा अस्तित्व रहेगा.'

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प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि हजारों प्रतिबिंब पड़ रहे हैं तो हजारों सूर्य पैदा थोड़ी हो गए हैं. सूर्य तो एक ही रहेगा. पानी से भरे घड़ों में सूर्य का प्रतिबिंब दिखाई देता है. अगर घड़ों का नाश हो गया तो सूर्य कहां मिट गया. वो तो अविनाशी चमक रहा है.

फिर प्रेमानंद के शिष्य ने पूछा कि क्या हम आपके स्वरूप से बात कर रहे हैं. यह सुनकर प्रेमानंद महाराज थोड़ा मुस्कुराए और बोले अब समझ सको तो समझ जाओ. वरना फिर तो इसे अनुभव के माध्यम से समझा जा सकता है, वाणी के द्वारा नहीं. यह समझने के लिए साधक को उसी स्थिति में आना होगा. वरना इस निर्विकार को समझना मुश्किल है.

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