नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर अपनी शानदार कलेक्शन के चलते सुर्खियों में है. नीम करोली बाबा का सीधा-सादा जीवन और शिक्षाएं आज भी लोगों का मार्गदर्शन कर रही हैं. बाबा का पवित्र स्थल कैंची धाम में है, जहां रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे हैं. क्या आपने कभी गौर किया है कि नीम करोली बाबा अपनी अधिकांश तस्वीरों में एक कंबल को शरीर पर लपेटे दिखाई देते हैं. उनके प्रशंसक बताते हैं कि मौसम ठंडा हो या गर्म बाबा हमेशा इस कंबल को अपने साथ ही रखते थे. आइए आज आपको इससे जुड़ा एक बड़ा रहस्य बताते हैं.
क्यों हर वक्त कंबल साथ रखते थे बाबा?
नीम करोली बाबा के कंबल से जुड़े कोई पुख्ता सबूत तो नहीं हैं, लेकिन उनके भक्त दादा मुखर्जी कहते हैं कि नीम करोली बाबा हर वक्त इस कंबल को अपने साथ रखते थे. सर्दी हो, गर्मी हो या फिर बरसात, बाबा हर वक्त इस कंबल को अपने साथ ही रखते थे. ऐसा दावा है कि उस कंबल से हमेशा किसी नवजात बच्चे की खुशबू आती थी. लोग ऐसा बताते हैं कि वो कंबल कभी बहुत भारी लगता था और कभी बहुत हल्का. यह एक तरह चमत्कार ही लगता था.
वैराग्य और सादगी का प्रतीक
दादा मुखर्जी बताते हैं कि उनका कंबल सिर्फ एक खास पहचान बनाने का माध्यम नहीं था. बल्कि सादगी, वैराग्य और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक भी था. बाबा बाहरी दिखावे की बजाय मन और आत्मिक चेतना पर ध्यान देने का संदेश देते थे. उसका एक उदाहरण यह है कि एक बार किसी भक्त ने बाबा के कंबल को व्यवस्थित करने की कोशिश की. तब बाबा ने कहा कि यह जैसा है, इसे वैसे ही रहने दो. कभी किसी को किसी चीज से बांधना नहीं चाहिए.
भक्तों की पीड़ा से जुड़ी मान्यता
कंबल को लेकर एक दूसरी मान्यता भी प्रचलित है. भक्तों का विश्वास था कि बाबा अपने अनुयायियों के दुख और तकलीफ को अपने ऊपर ले लेते थे. इसी सोच के कारण कंबल को सुरक्षा से जोड़कर देखा गया. कुछ भक्तों ने यह भी बताया कि बाबा बीमार लोगों पर कंबल डालते थे और उन्हें राहत महसूस होती थी. इस कंबल से जुड़े और भी कई अद्भुत किस्से-कहानियां लोगों के बीच प्रचलित हैं.
कंबल के रंग का रहस्य
नीम करोली बाबा के कंबल का रंग नीला या हल्के रंग को होता था. लोग नीले रंग को शांति और आध्यात्मिक स्थिरता से जोड़कर देखते हैं. मान्यता है कि यह रंग ही बाबा को शांत और संतुलित बनाए रखता था. बाबा बाहरी परिस्थितियों से अधिक भीतर की साधना को महत्व देते थे. इसलिए कंबल उनके लिए सादगी, शांति और वैराग्य का प्रतीक बन गया. ऐसा भी दावा किया जाता है कि बाबा इस कंबल का प्रयोग अपनी शक्तियों को छिपाने के लिए करते थे. ताकि लोग उनकी शक्तियों से बहुत ज्यादा आकर्षित न हों. या फिर ये लोगों की भीड़ से बचने का एक तरीका भी हो सकता है.
किताब में भी कंबल का जिक्र
अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड एलपर्ट बाद में राम दास के नाम से प्रसिद्ध हुए. उन्होंने 1979 में Miracle of Love नाम की किताब लिखी थी. इसमें उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ का जिक्र किया है. उन्होंने लिखा कि नीम करोली बाबा हमेशा कंबल ओढ़ते थे, इसलिए आज भी लोग कैंची धाम जाकर कंबल चढ़ाते हैं. बाबा के निधन के बाद उनकी कंबल वाली तस्वीरें इतनी ज्यादा फैल गई कि उनके पवित्र धाम पर दर्शन करने वाले लोग कंबल चढ़ाने लगे और दान भी करने लगे.
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