Navratri 2026: सुबह का मुहूर्त छूटा? अभिजीत मुहूर्त में करें घटस्थापना, नोट करें शुभ मुहूर्त

Navratri 2026: शारदीय नवरात्र 2026 में सुबह कलश स्थापना का मुहूर्त छूट गया है तो अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं. जानें 11 अक्टूबर का शुभ समय, पूजा विधि और जरूरी नियम.

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शारदीय नवरात्र 2026 में सुबह कलश स्थापना का मुहूर्त छूट गया है तो अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं. शारदीय नवरात्र 2026 में सुबह कलश स्थापना का मुहूर्त छूट गया है तो अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:47 AM IST

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रही है. इस दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का आरंभ होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है. अगर आप सुबह के मुहूर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाए हैं, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह पूजा कर सकते हैं. 

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नवरात्र 2026 में अभिजीत मुहूर्त का समय

पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को दिल्ली में कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह के बाद दोपहर में रहेगा. इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक  है. इस अवधि में श्रद्धालु विधि-विधान से घटस्थापना कर सकते हैं. हालांकि, मुहूर्त का समय शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है. इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा. 

क्या होता है अभिजीत मुहूर्त?

हिंदू पंचांग में अभिजीत मुहूर्त को शुभ समय माना जाता है. यह दिन के मध्य में आने वाली एक विशेष अवधि होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय किए गए पूजा-पाठ और शुभ कार्यों को सकारात्मक माना जाता है. इसी वजह से कई लोग किसी कारण से सुबह का शुभ मुहूर्त छूट जाने पर अभिजीत मुहूर्त में पूजा करने का विकल्प चुनते हैं. 

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अभिजीत मुहूर्त में कैसे करें कलश स्थापना?

कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें. इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें . पूजा की तैयारी करें. परंपरा के अनुसार, मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर जौ बोए जाते हैं. इसके बाद जल से भरा कलश तैयार किया जाता है. कलश पर रोली या चंदन से तिलक लगाएं. पूजा सामग्री अर्पित करें. इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए पूजा करके आरती उतारें. 

नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है. भक्त इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं. मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से मन को शांति मिलती है , घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. 

अभिजीत मुहूर्त का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है. कलश स्थापना से पहले स्थानीय पंचांग जरूर देख लें. 

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