Chandra Grahan 2026: रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का अशुभ असर! नोट करें सूतक टाइमिंग

Chandra Grahan 2026: रक्षाबंधन 2026 के दिन लग रहे चंद्र ग्रहण को लेकर क्या सूतक काल मान्य होगा? जानिए भारत में राखी बांधने का सही समय, शुभ मुहूर्त, ग्रहण की टाइमिंग और इस खगोलीय घटना का त्योहार व सभी राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव की पूरी जानकारी.

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क्या ग्रहण के दौरान सूतक काल मान्य होगा या बहनें बिना किसी संकोच के अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी क्या ग्रहण के दौरान सूतक काल मान्य होगा या बहनें बिना किसी संकोच के अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:33 PM IST

Chandra Grahan 2026: साल 2026 के सावन महीने का समापन एक बेहद खास और खगोलीय रूप से महत्वपूर्ण घटना के साथ होने जा रहा है. इस साल सावन पूर्णिमा यानी 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाएगा. इसी दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है. रक्षाबंधन जैसे पवित्र और बड़े त्योहार के दिन चंद्र ग्रहण होने के कारण यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस खगोलीय घटना का असर राखी के त्योहार पर पड़ेगा? क्या ग्रहण के दौरान सूतक काल मान्य होगा या बहनें बिना किसी संकोच के अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी? आइए जानते हैं इससे जुड़े सभी ज्योतिषीय और धार्मिक नियम

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चंद्र ग्रहण 2026 की तिथि और समय
खगोलीय गणना के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 (गुरुवार) को लगेगा.  भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह लगभग 06:53 बजे शुरू होगा,  दोपहर 12:32 बजे तक 5 घंटे 39 मिनट की कुल अवधि तक प्रभावी रहेगा. यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) होगा, जिसमें चंद्रमा का एक बड़ा हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढका रहेगा. 

क्या भारत में दिखेगा चंद्र ग्रहण और क्या लगेगा सूतक?
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, किसी भी ग्रहण का सूतक काल तभी मान्य होता है जब वह ग्रहण उस देश या क्षेत्र विशेष में स्पष्ट रूप से दिखाई दे. वैज्ञानिक और खगोलीय आंकड़ों के मुताबिक, 28 अगस्त का यह चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका महाद्वीप के हिस्सों में नजर आएगा. 

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भारत की बात करें तो यहां यह ग्रहण दिन के समय होने और चंद्रमा क्षितिज से नीचे होने के कारण दिखाई नहीं देगा.  चूंकि यह भारत में दृश्यमान (Visible) नहीं होगा, इसलिए यहां इसका कोई भी धार्मिक या ज्योतिषीय प्रभाव नहीं पड़ेगा.  यही वजह है कि भारत में इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल पूरी तरह से अमान्य रहेगा. 

क्या रक्षाबंधन के त्योहार पर पड़ेगा कोई असर?
चूंकि भारत में इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल नहीं लगेगा, इसलिए रक्षाबंधन के त्योहार पर इसका दूर-दूर तक कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा.  देश भर में बहनें बिना किसी संशय, डर या बाधा के पारंपरिक उल्लास के साथ अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी. सूतक न होने के कारण सूतक काल के दौरान लगने वाले प्रतिबंध  जैसे मंदिरों के कपाट बंद होना, पूजा-पाठ वर्जित होना या खान-पान पर रोक ,  इस दिन भारत में लागू नहीं होंगे. सभी मंदिर खुले रहेंगे , दैनिक अनुष्ठान सामान्य रूप से चलते रहेंगे. 

राखी बांधने का शुभ समय
रक्षाबंधन के दिन बहनों को अपनी भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त और भद्रा काल का विशेष ध्यान रखना चाहिए. चूंकि इस दिन भद्रा काल सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रहा है, इसलिए सुबह के समय राखी बांधना अत्यंत शुभ और फलदायी रहेगा. 

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राशिफल पर प्रभाव
भले ही भारत में यह ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा, फिर भी खगोलीय परिवर्तन के कारण ज्योतिषीय दृष्टिकोण से मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों पर इसका कुछ न कुछ प्रभाव अवश्य पड़ता है.  ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, यह ग्रहण सिंह, वृश्चिक, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए थोड़ा प्रतिकूल साबित हो सकता है, इसलिए इन राशि के लोगों को इस दौरान सेहत और वित्तीय मामलों में थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.  हालांकि, आम जनजीवन और पर्व की खुशियों पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं होगा

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