Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन त्योहार आते ही चारों तरफ नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की गूंज सुनाई देने लगती है. घरों में झांकियां सजती हैं, पंजीरी का भोग बनता है और हर कोई कान्हा के स्वागत में जुटा होता है. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जन्माष्टमी की आधी रात (जब कान्हा का जन्म होता है) कई लोग अपने घर का मुख्य दरवाजा या मंदिर के पट थोड़ी देर के लिए खुले रखते हैं? आइए जानते हैं कि इस प्यारी सी परंपरा के पीछे आखिर क्या वजह है:
1. कंस की जेल और चमत्कार की याद
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की उस काल कोठरी में हुआ था जिसे कंस ने बड़े-बड़े तालों और पहरे से बंद कर रखा था. लेकिन जैसे ही भगवान का जन्म हुआ, वे सारे ताले और दरवाजे अपने आप खुल गए. उसी चमत्कार की याद में भक्त रात को अपने घर के दरवाजे खुले रखते हैं ताकि वे भी उस खुशी और मुक्ति के पल को महसूस कर सकें.
2. खुद घर चलकर आते हैं बाल गोपाल!
ऐसी गहरी मान्यता है कि जन्माष्टमी की रात ठीक 12 बजे कान्हा हर उस घर में जरूर आते हैं जहां उन्हें प्यार से बुलाया जाता है. घर का दरवाजा खुला रखने का मतलब है कि हमारा दिल और घर दोनों कान्हा के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं. भक्त इस समय दीप जलाकर और भजन गाकर अपने प्यारे लड्डू गोपाल का घर में स्वागत करते हैं.
3. घर में आती है पॉजिटिव एनर्जी
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टियों से रात के समय वातावरण बहुत शांत और शुद्ध होता है. वास्तु जानकारों के अनुसार, जन्माष्टमी की मध्यरात्रि ब्रह्मांड में बहुत ही सात्विक और पॉजिटिव एनर्जी बहती है. खुला दरवाजा होने पर यह शुभ ऊर्जा बिना किसी रुकावट के घर के अंदर आती है, जिससे घर की सारी नेगेटिविटी दूर हो जाती है, घर में सुख-शांति बनी रहती है.
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