Dussehra 2026: दशहरा कल, जानें कब होगा रावण दहन, नोट कर लें शुभ मुहूर्त

Dussehra 2026 Date: दशहरा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है. यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। जानें, विजयादशमी की सही तारीख, रावण दहन का शुभ समय और विजय मुहूर्त.

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रावण दहन 2026 (Photo: ITG) रावण दहन 2026 (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:37 PM IST

Dussehra 2026 Date:  दशहरा आते ही देशभर में रावण दहन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर जीत और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है. लेकिन साल 2026 में दशमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण लोगों के बीच दशहरा मनाने की सही तारीख को लेकर असमंजस है. आखिर विजयादशमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी या 21 अक्टूबर को? अगर आप भी इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो यहां जानिए दशहरे की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और रावण दहन का समय.

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दशहरा 2026 कब मनाया जाएगा?

पंचांग के अनुसार,  20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि शुरू होगी.  इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा. ऐसे में इस साल विजयादशमी 20 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी. इसी दिन रावण दहन किया जाएगा. 

विजयादशमी 2026 पर पूजा और रावण दहन का मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा रावण दहन का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 47 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 23 मिनट के बीच रहने वाला है. 

दशहरे का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था. वहीं, मां दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया था. इस दिन लोग पूजा-पाठ करते हैं और रावण दहन के जरिए अधर्म के अंत का उत्सव मनाते हैं.

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कैसे बनी रावण का पुतला दहन करने की परंपरा?
दशहरे पर रावण के पुतले का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में किया जाता है. रावण एक पराक्रमी राजा और प्रकांड विद्वान था, लेकिन उसका अहंकार ही उसके पतन की वजह बना. रावण के दस सिरों को प्रतीकात्मक रूप से काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार समेत मनुष्य की विभिन्न बुराइयों से जोड़कर देखा जाता है. रावण दहन यह संदेश देता है कि व्यक्ति के पास चाहे कितनी भी शक्ति और ज्ञान क्यों न हो, उसके गलत कर्म अंततः विनाश का कारण बन सकते हैं.

दशहरे का महत्व केवल रावण का पुतला जलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर छिपी बुराइयों को दूर करने और अच्छे गुणों को अपनाने की प्रेरणा भी देता है. इसी संदेश के साथ हर साल विजयादशमी पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है.

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