Dhan Labh Upay 2026: सावन सोमवार और नाग पंचमी पर दुर्लभ संयोग, जरूर करें ये अचूक उपाय

Dhan Labh Upay 2026: सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के महासंयोग पर 17 अगस्त 2026 को करें ये अचूक उपाय. जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धन लाभ के खास ज्योतिषीय नियम.

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सावन सोमवार का व्रत और नाग पंचमी का पूजन जब एक साथ आते हैं, तो यह महादेव और नाग देवता दोनों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है. सावन सोमवार का व्रत और नाग पंचमी का पूजन जब एक साथ आते हैं, तो यह महादेव और नाग देवता दोनों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:28 PM IST

Nag Panchami 2026 Upay: धार्मिक दृष्टि से सावन का महीना अत्यंत पावन और भगवान शिव को समर्पित माना गया है.  इस वर्ष सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का पर्व एक ही दिन, यानी 17 अगस्त 2026 को पड़ रहा है.  ज्योतिष शास्त्र में इसे एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ महासंयोग माना जा रहा है. सावन सोमवार का व्रत और नाग पंचमी का पूजन जब एक साथ आते हैं, तो यह महादेव और नाग देवता दोनों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है.  मान्यता है कि इस विशेष दिन पर किए गए उपाय न केवल कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं, बल्कि धन-धान्य और सुख-समृद्धि के द्वार भी खोलते हैं. 

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धन लाभ और मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष उपाय
इस शुभ दिन पर भगवान शिव को प्रसन्न करने और आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं:

नील अपराजिता पुष्प (नील पुष्प) का प्रयोग: शिव पुराण के अनुसार, सावन सोमवार और नाग पंचमी के संयोग पर शिवलिंग पर नीले रंग का अपराजिता का फूल अर्पित करना अत्यंत फलदायी है.  इसे नील निधि माना गया है. मान्यता है कि इस उपाय को करने से दरिद्रता का नाश होता है , इससे घर में आर्थिक स्थिरता आती है. 

कर्ज मुक्ति के लिए: यदि आप लंबे समय से आर्थिक तंगी या कर्ज से परेशान हैं, तो इस दिन विधि-विधान से शिव का अभिषेक करें, उन्हें बेलपत्र के साथ शमी के पत्ते भी अर्पित करें. 

कालसर्प दोष निवारण: नाग पंचमी का दिन कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए सर्वोत्तम माना गया है. इस दिन नाग देवता के मंदिर में जाकर पूजन करें.  चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा नदी में प्रवाहित करें या शिवलिंग पर अर्पित करें. 

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शिव पूजन और जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त (17 अगस्त 2026)
पूजन के लिए सही समय का चुनाव करना अति आवश्यक है, जिससे आपको पूर्ण फल प्राप्त हो सके. 

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:28 से सुबह 06:07 बजे तक. 

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 01:26 से दोपहर 02:23 बजे तक. 

विजय मुहूर्त: शाम 04:17 से शाम 05:14 बजे तक.

अमृत काल: शाम 06:46 से रात 08:27 बजे तक. 


नाग पंचमी के पीछे की पौराणिक कथा राजा जन्मेजय के सर्प सत्र यज्ञ से जुड़ी है.  माना जाता है कि जब ऋषि आस्तिक ने नागों की रक्षा के लिए इस यज्ञ को रुकवाया था, तभी से नागों की पूजा की परंपरा शुरू हुई. 

ध्यान रखने योग्य बातें:

शुद्धता का ध्यान: पूजा के दौरान मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें. सात्विक भोजन ग्रहण करें. 

शिव अभिषेक: जलाभिषेक के लिए तांबे के पात्र का उपयोग करें, लेकिन ध्यान रहे कि तांबे के पात्र से दूध सीधे शिवलिंग पर न चढ़ाएं (शिवलिंग पर दूध हमेशा चांदी या पीतल के पात्र से ही अर्पित करना चाहिए).

मंत्र जाप: पूजन के दौरान ओम नमः शिवाय और ओम नागदेवताय नमः मंत्रों का निरंतर जाप करें.

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