Aja Ekadashi 2026: 6 या 7 सितंबर, अजा एकादशी का व्रत कब है? जानें सही तारीख और मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, अजा एकादशी की तिथि 6 सितंबर की शाम 7:29 बजे शुरू होगी और 7 सितंबर की शाम 5:03 बजे समाप्त हो जाएगी. ऐसे में उदया तिथि के आधार पर अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा.

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अजा एकादशी के व्रत को पाप कर्मों से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है. (Photo: ITG) अजा एकादशी के व्रत को पाप कर्मों से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:18 PM IST

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया हैं. कहते हैं कि अजा एकादशी का व्रत करने से इंसान की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं. हालांकि इस बार अजा एकादशी को लेकर बड़ा भ्रम बना हुआ है. कोई 6 सितंबर तो कोई 7 सितंबर को अजा एकादशी का व्रत बता रहा है. आइए अजा एकादशी की सही तारीख और शुभ मुहूर्त जानते हैं.

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अजा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में अजा एकादशी के व्रत को पाप कर्मों से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है. कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सुख और समृद्धि के संयोग बनते हैं. इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है. विष्णु पूजा के साथ माता लक्ष्मी की आराधना को भी विशेष महत्व दिया गया है. भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ कर सकते हैं.

अजा एकादशी 2026 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, अजा एकादशी की तिथि 6 सितंबर की शाम 7:29 बजे शुरू होगी और 7 सितंबर की शाम 5:03 बजे समाप्त हो जाएगी. ऐसे में उदया तिथि के आधार पर अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ माता लक्ष्मी की आराधना भी की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत और पूजा से पाप कर्मों से मुक्ति तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.

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अजा एकादशी का पारण कब होगा?
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है. अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर दिन मंगलवार को किया जाएगा. पारण का समय सुबह 6:02 बजे से 8:33 बजे तक बताया गया है.

अजा एकादशी की पूजा विधि
अजा एकादशी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें. इसके बाद स्वच्छ कपड़े पहनें. सूर्यदेव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पूजा स्थल पर चौकी स्थापित करें. उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा रखें. भगवान को पीले फूल, पीले वस्त्र, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित करें. पूजा के दौरान दीपक जलाएं. भगवान विष्णु की विधिवत आराधना करें. इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. अंत में भगवान विष्णु की आरती करें.

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