बुध कमजोर, केतु कर रहा परेशान... गणेश जी कैसे बनाएंगे बिगड़े काम?

गणेश चतुर्थी 2026 भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाएगी, जो 14 सितंबर को पड़ती है. यह त्योहार विघ्नहर्ता गणपति की पूजा के लिए प्रसिद्ध है और महाराष्ट्र सहित पूरे भारत में बड़े उत्साह से मनाया जाता है.

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वैदिक ज्योतिष में गणेश जी का संबंध बुध और केतु छाया ग्रह से भी है वैदिक ज्योतिष में गणेश जी का संबंध बुध और केतु छाया ग्रह से भी है

विकास पोरवाल

  • नई दिल्ली,
  • 06 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:46 AM IST

भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि गणेश चतुर्थी कहलाती है. इस दिन देशभर में गणेश जी की पूजा का उत्सव मनाया जाता है. महाराष्ट्र के प्रसिद्ध गणपति उत्सव की शुरुआत भी इसी दिन से होती है. हालांकि अब गणेश चतुर्थी भी देशभर में का व्यापक त्योहार बन चुका है. जिसमें लोग पंडालों के साथ ही साथ अपने घरों में भी विघ्नहर्ता गणपति की प्रतिमा स्थापित करके पूजा करते हैं. इस बार यह तिथि 14 सितंबर 2026 को है. 

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गणेश जी को विघ्नहर्ता के नाम से जाना जाता है. वह सभी देवताओं में सर्वप्रथम पूजनीय हैं. पुराणों के अनुसार, जब शिवजी ने अपने पुत्र को हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया तब उनका नाम गजानन भी पड़ गया, लेकिन इस कहानी के साथ-साथ गणेश जी का संबंध ज्योतिष शास्त्र भी जुड़ गया.

केतु से गणेशजी का कनेक्शन?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गणेशजी का संबंध केतु से माना जाता है. यह संबंध इसलिए स्थापित किया गया है क्योंकि गणेशजी का सिर काटकर उनकी जगह हाथी का सिर लगाया गया था, जो बिना सिर वाले केतु ग्रह की ही तरह है. राहु नाम के असुर का गला जब सुदर्शन चक्र से कटास तो उसके दो भाग बन गए. बिना सिर वाला शरीर का भाग ही केतु कहलाया था. 

केतु के दोष दूर करते हैं विघ्नहर्ता

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केतु को ज्ञान, आध्यात्मिकता और परिवर्तन से जोड़ा जाता है, और गणेश जी की पूजा से केतु दोषों को शांत करने और बाधाओं से मुक्ति पाने में सहायता मिलती है. केतु एक छाया ग्रह है, जो राहु छाया ग्रह से हमेशा विरोध में रहता है. यह इस बात का प्रतीक है कि बिना विरोध के ज्ञान नहीं आता है और बिना ज्ञान के मुक्ति नहीं है. गणेशजी की मान्यता इस बात में है कि उनकी मौजूदगी सभी जगह है. इसलिए जब भी जीवन में भ्रम की स्थिति हो. काम बार-बार बिगड़ रहे हों और केतु ग्रह परेशान कर रहा हो तो उसकी शांति के लिए गणेश जी की पूजा की जाती है.

यह भी पढ़ेंः गणपति विसर्जन सही या गलत? क्यों उत्तर भारत में इस परंपरा को लेकर उठते हैं सवाल?

बुध ग्रह के भी कारक हैं श्रीगणेश 

ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्क, शिक्षा और व्यापार का कारक माना गया है. वहीं भगवान गणेश को बुद्धि और विवेक का देवता कहा जाता है. धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में भगवान गणेश की उपासना का संबंध बुध ग्रह की शुभता से भी जोड़ा जाता है. मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में बुध कमजोर स्थिति में हो या अशुभ प्रभाव दे रहा हो, उनके लिए बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करना लाभकारी हो सकता है.

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हरी दूब या हरे रंग से संबंध

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध ग्रह व्यक्ति की बुद्धि, संवाद क्षमता, तर्क और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है. दूसरी ओर भगवान गणेश को बुद्धि और विवेक प्रदान करने वाला माना जाता है. यही कारण है कि बुध ग्रह से संबंधित उपायों में भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है. बुध ग्रह का संबंध हरे रंग से माना जाता है. भगवान गणेश की पूजा में भी हरी दूर्वा का विशेष महत्व है. गणपति को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा काफी प्रचलित है. इसी कारण बुधवार के दिन गणेश जी को दूर्वा चढ़ाना बुध ग्रह से जुड़े प्रमुख ज्योतिषीय उपायों में गिना जाता है.

बुधवार की सुबह स्नान के बाद भगवान गणेश की पूजा करें. 

गणपति को दूर्वा अर्पित करें और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं. 

प्रचलित धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है.

इस दिन हरी मूंग की दाल का दान भी बुध ग्रह से संबंधित उपायों में शामिल है. 

कुछ लोग बुधवार को हरे वस्त्र धारण करना भी शुभ मानते हैं.

पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है. 

बुध ग्रह की शांति के लिए “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का जाप करने की परंपरा है.
 

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