कभी चंबल के बीहड़ों में पुलिस की सबसे बड़ी चुनौती माना जाने वाला नाम था जगन गुर्जर. राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर फैले बीहड़ों में वर्षों तक उसका खौफ कायम रहा. पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी, हत्या के प्रयास, सरकारी काम में बाधा और आर्म्स एक्ट समेत करीब सौ आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं. कई बार गिरफ्तार हुआ, कई बार जमानत पर बाहर आया, फिर अपराध की दुनिया में लौट गया. लेकिन जिस कहानी की शुरुआत बीहड़ों में बंदूक के दम पर हुई थी, उसका अंत किसी पुलिस मुठभेड़ में नहीं, बल्कि राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की एक बैरक में हुआ.
जेल के भीतर हुई इस हत्या ने सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल नहीं खड़े किए हैं, बल्कि एक बार फिर जगन गुर्जर के तीन दशक लंबे आपराधिक सफर को चर्चा में ला दिया है. आखिर जगन गुर्जर कौन था? वह अपराध की दुनिया में कैसे पहुंचा? क्यों पुलिस उसे राजस्थान और मध्य प्रदेश के सबसे कुख्यात दस्युओं में गिनती रही? और आखिर जेल के भीतर ऐसा क्या हुआ कि उसका अंत उसी बैरक में हो गया, जहां कुछ घंटे पहले वह अपने साथी कैदी के साथ लूडो खेल रहा था?
1994 में रखा अपराध की दुनिया में पहला कदम
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जगन गुर्जर ने वर्ष 1994 के आसपास अपराध की दुनिया में कदम रखा. शुरुआती दौर में उस पर लूट, रंगदारी और अवैध हथियार रखने जैसे मामले दर्ज हुए. चंबल के बीहड़ों की भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठाकर उसने धीरे-धीरे अपना नेटवर्क तैयार किया. राजस्थान के धौलपुर और करौली के साथ मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में उसकी सक्रियता बढ़ती चली गई. उस समय चंबल का इलाका दस्यु गतिविधियों के लिए पहले से कुख्यात था. कई पुराने गिरोह खत्म हो चुके थे, लेकिन जगन गुर्जर ने अपने समूह के साथ फिर से बीहड़ों में दबदबा बनाने की कोशिश की. पुलिस के अनुसार इसी दौरान उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज होने लगे.
पहली गिरफ्तारी के बाद भी नहीं बदली राह
हालांकि अपराध की दुनिया में कदम रखने के कई साल बाद वर्ष 2001 में पहली बार पुलिस उसे गिरफ्तार करने में सफल हुई. लेकिन यह गिरफ्तारी उसके लिए आखिरी साबित नहीं हुई. बाद के वर्षों में वह कई बार जेल गया और कई मामलों में जमानत पर बाहर भी आया. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक हर बार बाहर आने के बाद वह फिर अपराध से जुड़ता चला गया. इसी वजह से उसके खिलाफ मामलों की संख्या लगातार बढ़ती गई. समय के साथ उसका नाम राजस्थान पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में भी शामिल रहा. जगन गुर्जर पहली बार पूरे प्रदेश में तब सुर्खियों में आया, जब वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित आवास को विस्फोट से उड़ाने की कथित धमकी देने का मामला सामने आया. इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई थीं और जगन गुर्जर को पकड़ना पुलिस की प्राथमिकता बन गया. इस प्रकरण ने उसे राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया. हालांकि बाद में पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई तेज की और लगातार दबाव बनाया.
सचिन पायलट के सामने किया था आत्मसमर्पण
लगातार बढ़ते पुलिस दबाव के बीच वर्ष 2009 में जगन गुर्जर ने तत्कालीन कांग्रेस नेता सचिन पायलट की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया था. उस समय यह आत्मसमर्पण प्रदेश की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल रहा. माना जा रहा था कि अब वह अपराध की दुनिया छोड़ देगा, लेकिन यह उम्मीद ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी. पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि बाद के वर्षों में भी वह अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार होता रहा और उसका नाम कई आपराधिक घटनाओं में सामने आता रहा.
2019 में फिर सुर्खियों में आया
जून 2019 में जगन गुर्जर एक बार फिर मीडिया की सुर्खियों में आया. पुलिस के अनुसार उस पर दो महिलाओं के साथ मारपीट और उनके कपड़े फाड़ने का आरोप लगा था. इस मामले में उसे पकड़ने के लिए करीब 500 पुलिसकर्मियों की बड़ी टीम लगाई गई थी. कई दिनों तक चले अभियान के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया. उस समय यह ऑपरेशन भी काफी चर्चित रहा था, क्योंकि पुलिस को आशंका थी कि जगन गुर्जर हथियारबंद साथियों के साथ बीहड़ों में छिपा हुआ है. फरवरी 2022 में पुलिस ने उसे एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया. आरोप था कि उसने तत्कालीन कांग्रेस विधायक गिर्राज मलिंगा को जान से मारने की धमकी दी थी. इस प्रकरण के बाद भी उसका नाम फिर चर्चा में आया और उसके खिलाफ दर्ज मामलों की सूची और लंबी होती चली गई.
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में कैसे हुआ जगन गुर्जर का अंत
करीब तीन दशक तक अपराध की दुनिया में सक्रिय रहने वाले जगन गुर्जर का अंत किसी पुलिस मुठभेड़ में नहीं, बल्कि जेल की उसी बैरक में हुआ, जहां वह पिछले कुछ महीनों से बंद था. पुलिस और जेल प्रशासन के शुरुआती निष्कर्षों के मुताबिक, घटना ने इसलिए भी सभी को चौंका दिया क्योंकि वारदात से कुछ घंटे पहले तक सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था. जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ के अनुसार, जगन गुर्जर और आरोपी कैदी विष्णु एक ही सेल में बंद थे. सीसीटीवी फुटेज और जेल रिकॉर्ड से पता चलता है कि सुबह करीब 11 बजे तक दोनों ने मिलकर बैरक की साफ-सफाई की. इसके बाद लॉक-इन अवधि के दौरान दोनों साथ में लूडो खेलते भी दिखाई दिए. किसी तरह के विवाद या तनाव के संकेत शुरुआती रिकॉर्डिंग में नहीं मिले.
फिर दोपहर तीन बजे ऐसा क्या हुआ
जेल प्रशासन के मुताबिक, दोपहर करीब तीन बजे जब संतरी चाय के समय बैरक खोलने पहुंचा तो जगन गुर्जर अपनी जगह से नहीं उठा. संतरी ने जब उसके साथ बंद कैदी विष्णु से पूछा तो उसने कथित तौर पर कहा कि उसने ही जगन की हत्या कर दी है. सूचना मिलते ही जेल प्रशासन और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे. जगन को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसके बाद पूरे जेल परिसर को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच शुरू कर दी गई. अजमेर पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया जगन गुर्जर के शरीर पर मारपीट या संघर्ष के स्पष्ट निशान नहीं मिले. शुरुआती जांच में सामने आया कि उसकी मौत गमछे से गला घोंटे जाने के कारण हुई. हालांकि मौत के सही कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही होगी. एफएसएल और एमओबी की टीमों ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं. पुलिस अब बैरक के भीतर मौजूद परिस्थितियों, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान कर रही है.
क्या यह गैंगवार थी या आपसी विवाद
घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर गैंगवार तथा सुपारी किलिंग जैसी चर्चाएं शुरू हो गईं. हालांकि अजमेर पुलिस ने फिलहाल ऐसी किसी संभावना की पुष्टि नहीं की है. अजमेर पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने मीडिया को बताया कि शुरुआती जांच में यह मामला बैरक के भीतर हुए आपसी विवाद का प्रतीत होता है. उन्होंने कहा कि अभी तक किसी संगठित गैंगवार या बाहरी साजिश के प्रमाण नहीं मिले हैं. जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा. पुलिस के अनुसार, जगन गुर्जर को मार्च 2026 में अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट किया गया था. वहीं आरोपी कैदी विष्णु पिछले लगभग तीन वर्षों से इसी जेल में बंद है. दोनों एक ही बैरक में रह रहे थे. अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों के बीच पहले से कोई विवाद था या घटना वाले दिन किसी छोटी बात ने हिंसक रूप ले लिया.
तीन पत्नियां और अपराध की दुनिया
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जगन गुर्जर की तीन पत्नियां हैं. इनमें से एक पत्नी कथित रूप से उसके आपराधिक नेटवर्क में भी सक्रिय रही थी और मध्य प्रदेश में एक पुलिस मुठभेड़ के दौरान घायल हुई थी. वर्षों तक चंबल के बीहड़ों में सक्रिय रहने के दौरान जगन ने अपना प्रभाव राजस्थान और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों तक बढ़ा लिया था. धौलपुर निवासी जगन गुर्जर के खिलाफ विभिन्न थानों में हत्या, रंगदारी, धमकी, मारपीट, अवैध हथियार और अन्य गंभीर धाराओं समेत लगभग 100 आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं. इसी वजह से वह लंबे समय तक दोनों राज्यों की पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना रहा.
अब जांच किन सवालों के जवाब तलाश रही है?
जगन गुर्जर की हत्या के बाद जांच एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दोनों कैदी सुबह तक सामान्य व्यवहार कर रहे थे तो कुछ घंटों में ऐसा क्या हुआ कि मामला हत्या तक पहुंच गया? दूसरा सवाल यह है कि हाई सिक्योरिटी जेल की निगरानी व्यवस्था के बीच यह घटना कैसे हुई? पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट, आरोपी विष्णु से पूछताछ और जेल कर्मचारियों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है. यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है. करीब 32 वर्षों तक अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे जगन गुर्जर की कहानी आखिरकार जेल की चारदीवारी के भीतर खत्म हो गई. लेकिन उसकी मौत ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे. तब तक यह मामला राजस्थान की सबसे चर्चित आपराधिक जांचों में शामिल रहेगा.
(इनपुट : चंद्र शेखर शर्मा)
अमित कुमार गुप्ता / उमेश मिश्रा