कोटा में एक बाघिन रहती है. नाम है महक. उम्र पूछेंगे तो शायद यकीन न हो- 22 साल. और अब 23वें साल में पहुंच चुकी है. आमतौर पर बाघिनें 16-18 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते बूढ़ी होने लगती हैं. लेकिन जंगल की जिंदगी में महक की कहानी कुछ अलग है.
22 साल की उम्र में भी महक अपने इन्क्लोजर में घूमती है, पानी में अठखेलियां करती है और खाना सामने आने पर उसे आराम से चबाकर खाती है. हां, उम्र का असर है. उठने में पहले के मुकाबले थोड़ी दिक्कत होती है. कमजोरी से बचाने के लिए कैल्शियम की डोज बढ़ाई गई है. लेकिन कुल मिलाकर उसकी सेहत इतनी अच्छी है कि वन विभाग भी उसकी मिसाल देता है. और यही वजह है कि महक देश की सबसे उम्रदराज जीवित बाघिन है.
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अब सवाल है कि आखिर महक में ऐसा क्या खास है? उसकी उम्र इतनी लंबी कैसे हुई? उसे रोज क्या खिलाया जाता है? उसकी कितनी बार मेडिकल जांच होती है? और 22 साल की उम्र में भी उसकी 'जवानी' का राज क्या है? चलिए, महक की पूरी कहानी शुरू से समझते हैं.
28 अगस्त 2004... जब दुनिया में आई थी महक
महक का जन्म 28 अगस्त 2004 को जयपुर चिड़ियाघर में हुआ था. उस वक्त किसी ने शायद नहीं सोचा होगा कि ये नन्हा-सा शावक एक दिन 22 साल की उम्र पार कर जाएगा और देश की सबसे उम्रदराज बाघिनों में शुमार होगा. महक अकेली पैदा नहीं हुई थी. बाघिन 'चंदा' ने चार शावकों को जन्म दिया था- रुद्र, गौरी, रंभा और महक.
समय बीतता गया और चारों की राहें अलग हो गईं. रुद्र जोधपुर जू पहुंचा, गौरी भोपाल के वन विहार गई और रंभा को नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क भेज दिया गया. महक की कहानी उसे जयपुर से कोटा ले आई.
जयपुर से कोटा... फिर नाहरगढ़ और वापस कोटा
महक को पहली बार मार्च 2012 में जयपुर से कोटा चिड़ियाघर लाया गया. फिर साल 2019 आया. महक को ब्रीडिंग के मकसद से जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क भेजा गया. वहां उसे बाघ 'नाहर' के साथ रखा गया. इसके बाद 1 मार्च 2023 को महक को नाहर के साथ वापस कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क लाया गया. लेकिन महक और नाहर की ब्रीडिंग सफल नहीं हो सकी. महक मां नहीं बन पाई. और करीब दो साल पहले नाहर की मौत भी हो गई. अब महक अकेली रहती है.
चिड़ियाघरों में बाघों की सामान्य उम्र करीब 16 से 18 साल मानी जाती है. जंगल में रहने वाले बाघ-बाघिनों की औसत उम्र आमतौर पर इससे भी कम होती है. ऐसे में 22 साल की उम्र तक पहुंचना अपने आप में असाधारण है.
यानी महक सामान्य चिड़ियाघर वाली बाघिन की औसत उम्र से करीब चार साल ज्यादा और जंगल में रहने वाली बाघिन की औसत उम्र से करीब सात साल ज्यादा है. लेकिन सिर्फ उम्र का आंकड़ा ही महक को खास नहीं बनाता. असली बात यह है कि 22 साल की उम्र में भी उसकी सेहत काफी अच्छी बनी हुई है.
महक की उम्र 22 साल, लेकिन शरीर अब भी साथ दे रहा
बढ़ती उम्र के बावजूद महक के कई फिजिकल साइन अब भी अच्छे हैं.
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक:
हालांकि ऐसा नहीं है कि उम्र का असर बिल्कुल नहीं हुआ है. अब उसे उठने में पहले की तुलना में थोड़ी परेशानी होती है. कमजोरी से बचाने के लिए उसकी कैल्शियम डोज भी बढ़ाई गई है. यानी महक पूरी तरह वैसी 'जवान' नहीं है जैसी कम उम्र की बाघिन होती है, लेकिन 22 साल की उम्र के हिसाब से उसकी फिटनेस असाधारण है.
बाघ आमतौर पर कितने साल जीते हैं?
अब सवाल उठता है- 22 साल आखिर कितनी बड़ी उम्र है? चिड़ियाघरों में बाघों की सामान्य उम्र करीब 16 से 18 साल मानी जाती है. जंगल में हालात और मुश्किल होते हैं. वहां शिकार करना है, अपना इलाका बचाना है, दूसरे बाघों से भिड़ना है, चोट और बीमारी का खतरा है. इसलिए जंगल में रहने वाले बाघ-बाघिनों की औसत उम्र आमतौर पर और कम होती है.
ऐसे में महक का 22 साल तक पहुंचना सामान्य बात नहीं है. वह चिड़ियाघर में रहने वाली बाघिन की सामान्य उम्र से करीब चार साल आगे निकल चुकी है. यानी महक ने अपनी उम्र की दौड़ में काफी लंबा सफर तय किया है.
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वहीं चिड़ियाघर या बायोलॉजिकल पार्क में बाघों को नियमित भोजन, इलाज, साफ-सफाई और मेडिकल फैसिलिटी मिलती है. चोट या बीमारी होने पर तुरंत इलाज होता है. फिर भी हर बाघ 20 साल या उससे ज्यादा नहीं जीता. यही वजह है कि महक का 22 साल तक पहुंचना खास माना जा रहा है.
क्या यही है महक की लंबी उम्र का राज?
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि महक की लंबी उम्र के पीछे कई कारण हो सकते हैं. अच्छा और संतुलित भोजन एक वजह है. नियमित मेडिकल चेकअप दूसरी वजह. साफ और सुरक्षित वातावरण भी मदद करता है. लेकिन इसके साथ जेनेटिक्स, यानी आनुवंशिक क्षमता की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता. क्योंकि चिड़ियाघर में रहने वाले हर बाघ को खाना और इलाज मिलता है, लेकिन हर बाघ 22 साल तक नहीं पहुंचता. महक के मामले में शायद उसकी किस्मत, जेनेटिक्स और बेहतरीन देखभाल- तीनों ने साथ दिया है.
महक को रोज कितना खाना मिलता है?
महक की लंबी उम्र में उसके खान-पान का भी अहम रोल है. अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के वन्यजीव चिकित्सक डॉ. त्रिलोक गुर्जर के मुताबिक, महक को रोजाना करीब 8 किलो चिकन और पाड़े का मांस दिया जाता है. इसके अलावा उसे मल्टीविटामिन, कैल्शियम, आयरन टॉनिक भी दिए जाते हैं. महक की उम्र के हिसाब से डाइट का भी ध्यान रखा जाता है.
बुजुर्ग जानवरों के लिए साफ-सफाई बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है. महक के नाइट शेल्टर में नियमित रूप से दवाओं का छिड़काव किया जाता है. मौसम बदलने पर उसकी देखभाल का तरीका भी उसी हिसाब से बदला जाता है. क्योंकि बढ़ती उम्र में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता और बीमारी से उबरने की क्षमता कम हो सकती है. इसलिए महक के मामले में छोटी-सी परेशानी को भी नजरअंदाज नहीं किया जाता.
22 साल की उम्र में भी वह अपने इन्क्लोजर में घूमती है. बाउंड्री के आसपास चहलकदमी करती है और पानी में अठखेलियां करती है. पार्क आने वाले पर्यटकों को भी वह कई बार एक्टिव नजर आती है. यानी उसकी उम्र जरूर 22 साल है, लेकिन उसका रुटीन बुजुर्ग जानवर जैसा नहीं है.
डॉक्टर हर तीन-चार दिन में क्यों पहुंचते हैं?
महक की उम्र जितनी ज्यादा है, उसकी निगरानी भी उतनी ही ज्यादा है. एसीएफ पंकज कुमार के मुताबिक, उसकी करीब हर तीन-चार दिन में या सप्ताह में दो बार मेडिकल जांच की जाती है. उसके खाने से लेकर वजन तक देखा जाता है. उसकी गतिविधियां मॉनिटर होती हैं. उसके व्यवहार में कोई बदलाव आया या नहीं, इस पर नजर रहती है. क्यों? क्योंकि 22 साल की उम्र में छोटी-सी समस्या भी बड़ी हो सकती है. इसलिए वन विभाग महक के मामले में 'देखेंगे' वाला रवैया नहीं अपनाता. लगातार निगरानी रखी जाती है.
महक की जिंदगी में 'नाहर' कौन था?
महक की कहानी में बाघ 'नाहर' का भी नाम आता है. साल 2019 में महक को ब्रीडिंग के मकसद से जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क भेजा गया था. वहां उसे नाहर के साथ रखा गया. इसके बाद 1 मार्च 2023 को महक को नाहर के साथ वापस कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क लाया गया. लेकिन ब्रीडिंग के तमाम प्रयास सफल नहीं हुए. महक के कोई शावक नहीं हुए. करीब दो साल पहले नाहर की मौत हो गई. अब महक अकेली है.
महक के 22वें जन्मदिन पर क्या हुआ?
बीते दिनों अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में महक का जन्मदिन मनाया गया. वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ वन्यजीव प्रेमी भी इस मौके पर मौजूद रहे. केक काटा गया और महक के स्वस्थ जीवन की कामना की गई. वन्यजीव प्रेमी हर्षित शर्मा, राकेश कुमार, अंकित, भुवनेश सिंघल, मनोज शर्मा और सुरेंद्र सैनी समेत वन विभाग के कई कर्मचारी मौजूद रहे. लेकिन महक के लिए एक और बड़ा जश्न बाकी है.
वन विभाग अगले महीने बच्चों के साथ उसका विशेष जन्मदिन समारोह की तैयारी कर रहा है. जब अभेड़ा में महक पानी में उतरती है, तो उसकी उम्र कुछ पल के लिए पीछे छूट जाती है. वह 22 साल की बाघिन नहीं लगती. बस महक लगती है. देश की सबसे उम्रदराज जीवित बाघिन... जिसकी दहाड़ में उम्र जरूर है, लेकिन अभी थकान नहीं.
चेतन गुर्जर