कोटा में बड़ा उलटफेर... कांग्रेस के 5 पार्षदों ने बदला पाला, बीजेपी की अनुसुईया गोस्वामी बनीं मेयर

कोटा नगर निगम के मेयर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनुसुईया गोस्वामी विजयी हुई हैं. उन्हें कुल 65 वोट मिले, जबकि पार्टी के पास पहले सिर्फ 59 वोट होने का अनुमान था. यह अतिरिक्त 6 वोट कांग्रेस पार्षदों की क्रॉस वोटिंग से मिले. कांग्रेस के पास कुल 40 वोट होने चाहिए थे, लेकिन उसे सिर्फ 35 वोट ही मिले, यानी 5 वोट की कमी रही.

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कोटा नगर निगम के मेयर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनुसुइया गोस्वामी विजयी हुई हैं (Photo: ITG) कोटा नगर निगम के मेयर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनुसुइया गोस्वामी विजयी हुई हैं (Photo: ITG)

चेतन गुर्जर

  • कोटा, राजस्थान,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:47 PM IST

राजस्थान के कोटा नगर निगम के मेयर पद के चुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार अनुसुईया गोस्वामी को कोटा का नया मेयर चुना गया है. इस चुनाव में कांग्रेस पार्षदों की जमकर क्रॉस वोटिंग सामने आई, जिसने पूरे चुनावी समीकरण को बदल दिया. कांग्रेस के कई पार्षदों और कांग्रेस समर्थित पार्षदों ने अपनी पार्टी को छोड़कर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट डाला. नतीजा यह रहा कि भाजपा को अपनी ताकत से कहीं ज्यादा वोट मिल गए.

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चुनाव से पहले के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा के पास कुल 59 वोट होने का अनुमान था. इसमें पार्टी के अपने 57 पार्षद और 2 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन शामिल था. लेकिन मतदान के बाद जब नतीजे सामने आए तो भाजपा प्रत्याशी अनुसुईया गोस्वामी को कुल 65 वोट मिले. यानी भाजपा को अपने तय समर्थन से 6 वोट ज्यादा मिले, जो सीधे तौर पर कांग्रेस खेमे में हुई टूट का नतीजा माना जा रहा है.

दूसरी तरफ कांग्रेस की स्थिति देखें तो पार्टी के पास 39 पार्षद और 1 निर्दलीय पार्षद का समर्थन था, यानी कुल 40 वोट होने चाहिए थे. लेकिन असल मतदान में कांग्रेस के खाते में सिर्फ 35 वोट ही आए. इस तरह कांग्रेस को अपने तय आंकड़े से 5 वोट कम मिले. यह अंतर साफ बताता है कि पार्टी के भीतर से ही कुछ पार्षदों ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया.

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यह भी पढ़ें: राजस्थान मेयर चुनाव का फाइनल नतीजा आया... जयपुर, जोधपुर और कोटा में जीती BJP

इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्टिंग चेतन गुर्जर ने की है. कोटा नगर निगम के इस मेयर चुनाव ने यह भी दिखा दिया कि आंकड़ों में मजबूत दिखने वाली पार्टी के भीतर भी फूट पड़ सकती है, और अंदरखाने की सियासत चुनाव नतीजों को पूरी तरह बदल सकती है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपने पार्षदों की इस बगावत पर क्या कार्रवाई करती है.

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