राजस्थान के डूंगरपुर जिले के दोवड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सत्तु देवकी स्थित अपर प्राइमरी स्कूल में सोमवार को बड़ा हादसा टल गया. स्कूल में करीब 120 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे, तभी एक जर्जर और बंद पड़े कमरे की छत अचानक भरभराकर गिर गई. गनीमत रही कि यह कमरा पिछले एक साल से बंद था. अगर इसमें कक्षाएं चल रही होतीं तो हादसा गंभीर हो सकता था. घटना सोमवार सुबह करीब 10 बजे की है. उस समय स्कूल में बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे थे और शिक्षक उन्हें पढ़ा रहे थे. इसी दौरान स्कूल परिसर में अचानक तेज आवाज सुनाई दी. आवाज बंद पड़े जर्जर कमरे से आई थी. जब तक कोई कुछ समझ पाता, कमरे की छत भरभराकर नीचे गिर चुकी थी.
छत गिरने की तेज आवाज से स्कूल में मौजूद बच्चे और शिक्षक घबरा गए. अचानक हुई इस घटना के बाद बच्चे और शिक्षक अपने-अपने कमरों से बाहर निकल आए. कुछ देर के लिए स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. हालांकि राहत की बात यह रही कि जिस कमरे की छत गिरी, उसमें उस समय कोई बच्चा या शिक्षक मौजूद नहीं था. दरअसल स्कूल में दो कमरे पहले से ही जर्जर हालत में बताए जा रहे हैं. स्कूल प्रबंधन ने बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए दोनों कमरों को असुरक्षित घोषित कर दिया था. करीब एक साल से इन दोनों कमरों में कक्षाएं नहीं लगाई जा रही थीं. इसी वजह से सोमवार को जर्जर कमरे की छत गिरने के बावजूद किसी बच्चे या शिक्षक को चोट नहीं आई.
स्कूल में जर्जर कमरे की छत भरभराकर गिरी
स्कूल में करीब 120 बच्चे पढ़ते हैं. सोमवार को भी रोज की तरह बच्चे स्कूल पहुंचे थे और अपनी कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे थे. शिक्षक भी बच्चों को पढ़ाने में जुटे थे. इसी दौरान बंद पड़े कमरे की छत गिर गई. अगर यह कमरा इस्तेमाल में होता तो बच्चों और शिक्षकों की मौजूदगी में बड़ा हादसा हो सकता था. घटना के बाद स्कूल के शिक्षकों ने तुरंत इसकी सूचना पीईईओ पंकज वर्मा को दी. जानकारी मिलने के बाद पीईईओ पंकज वर्मा और सीबीईओ दीपक शाह मौके पर पहुंचे. दोनों अधिकारियों ने स्कूल पहुंचकर वहां की स्थिति का जायजा लिया और जर्जर कमरों की स्थिति देखी.
सीबीईओ दीपक शाह के मुताबिक, स्कूल में कुल 10 कमरे हैं. इनमें से दो कमरे जर्जर हालत में हैं. इन्हीं में से एक कमरे की छत सोमवार को गिर गई. जबकि दूसरे जर्जर कमरे की छत अभी भी खराब स्थिति में है. स्कूल प्रबंधन ने दोनों कमरों को असुरक्षित घोषित कर रखा है और उनमें करीब एक साल से कक्षाएं नहीं लगाई जा रही हैं. अधिकारियों के मुताबिक, स्कूल के जर्जर कमरों की मरम्मत और नई छत डालने के लिए प्रस्ताव पहले ही भेजे जा चुके हैं. अब इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलने का इंतजार है. मंजूरी मिलते ही जर्जर कमरों की मरम्मत करवाने और नई छत डालने का काम किया जाएगा.
सोमवार को हुई घटना के बाद एक बार फिर स्कूल भवन की स्थिति सामने आई है. एक कमरे की छत गिर चुकी है, जबकि स्कूल में दूसरा कमरा भी जर्जर हालत में है. हालांकि स्कूल प्रबंधन ने दोनों कमरों को पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया था, लेकिन अब सवाल यह है कि दूसरे जर्जर कमरे की मरम्मत कब होगी. इस घटना में सबसे बड़ी राहत यही रही कि जिस कमरे की छत गिरी, वह पिछले एक साल से बंद था. बच्चे और शिक्षक दूसरे कमरों में पढ़ाई कर रहे थे. इसी वजह से किसी को चोट नहीं आई. लेकिन छत गिरने की घटना ने यह जरूर दिखा दिया कि स्कूल भवनों की समय पर मरम्मत कितनी जरूरी है.
स्कूल में कुल 10 कमरे हैं और इनमें से दो जर्जर बताए जा रहे हैं. एक कमरे की छत गिर चुकी है, जबकि दूसरे कमरे की छत अब भी जर्जर हालत में है. स्कूल प्रबंधन ने दोनों को असुरक्षित घोषित कर रखा है. इसके बावजूद दूसरे कमरे की मरम्मत का काम अभी बाकी है. घटना के बाद स्कूल की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे अधिकारियों ने भी जर्जर कमरों को लेकर जानकारी ली. सीबीईओ दीपक शाह ने बताया कि मरम्मत और नई छत के लिए प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं. मंजूरी मिलते ही इन्हें दुरुस्त कराया जाएगा.
सूचना पर मौके पर पहुंचे पीईईओ और सीबीईओ
सोमवार की घटना में किसी बच्चे या शिक्षक के घायल नहीं होने से बड़ी राहत मिली है. लेकिन स्कूल में मौजूद करीब 120 बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जर्जर भवन का मुद्दा अहम बना हुआ है. एक कमरे की छत गिरने के बाद अब दूसरे जर्जर कमरे की मरम्मत का इंतजार है. फिलहाल स्कूल में पढ़ाई कर रहे बच्चों और शिक्षकों को उस कमरे से दूर रखा गया है, क्योंकि दोनों कमरों को पहले ही असुरक्षित घोषित किया जा चुका था. सोमवार को छत गिरने के बाद स्कूल में मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली कि हादसा बंद कमरे में हुआ और कोई उसकी चपेट में नहीं आया.
यशवंत कुमार सोनी