नर्मदा के अतिरिक्त पानी को सहेजने की तैयारी, सूखे इलाकों में पीने और सिंचाई के लिए होगा इस्तेमाल; भजनलाल सरकार तैयार कर रही DPR

राजस्थान सरकार मानसून के दौरान नर्मदा के अतिरिक्त पानी को जमा करने के लिए DPR तैयार कर रही है. योजना से पानी की कमी वाले क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई की जरूरतें पूरी करने का लक्ष्य है.

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मीटिंग में ऑनलाइन जुड़े CM भजनलाल शर्मा.(Photo:ITG) मीटिंग में ऑनलाइन जुड़े CM भजनलाल शर्मा.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • जयपुर,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:15 PM IST

राजस्थान में पानी की कमी दूर करने के लिए राज्य सरकार नर्मदा नदी के अतिरिक्त पानी को सहेजने की योजना बना रही है. मानसून के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त पानी को जमा किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल पेयजल और सिंचाई के लिए किया जा सके। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है.

'नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण समीक्षा समिति' की 15वीं बैठक को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरकार 1979 के 'नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण' के फैसले के तहत उपलब्ध अतिरिक्त पानी का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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मुख्यमंत्री ने कहा, "राजस्थान सरकार एक ऐसी परियोजना की योजना बना रही है, जिसके तहत मानसून के दौरान नर्मदा नदी के अतिरिक्त पानी को जमा किया जाएगा, ताकि पानी की कमी वाले इलाकों में पीने के पानी और सिंचाई की जरूरतों को पूरा किया जा सके. इसके लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है."

इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने की. इसमें गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने वर्चुअल तरीके से हिस्सा लिया.

पाटिल ने बताया कि 7 जुलाई, 2026 को चार राज्यों के बीच हुए एक समझौते को आपसी सहयोग और समन्वय के जरिए लागू किया जा रहा है.

शर्मा ने कहा कि पीने और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना, खासकर पश्चिमी राजस्थान में, सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है.

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उन्होंने बताया कि नर्मदा नहर परियोजना के तहत जालौर और बाड़मेर जिलों में 'स्प्रिंकलर सिंचाई' यानी फव्वारा सिंचाई को अनिवार्य कर दिया गया है. इससे पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार हुआ है और किसानों को फायदा मिल रहा है.

उन्होंने राजस्थान में पानी की कमी को दूर करने की दिशा में उठाए गए अहम कदमों के रूप में अंतर-राज्यीय जल समझौतों का भी जिक्र किया, जिनमें 'रामजल सेतु लिंक परियोजना' और 'यमुना जल समझौता' शामिल हैं.

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