राहुल गांधी जिलाध्यक्षों को ताकतवर और खड़गे निकम्मे नेताओं की छुट्टी चाहते हैं - कांग्रेस पर क्या असर होगा?

बीजेपी से लड़ते लड़ते राहुल गांधी ये जरूर सीख चुके हैं कि मुकाबला तो उसी के हथियार से संभव है. जिला स्तर पर कांग्रेस को मजबूत बनाना और नुकसानदेह नेताओं पीछा छुड़ाना भी नई रणनीति का ही हिस्सा है. मतलब, कांग्रेस में फिर उलटफेर होने वाली है.

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कांग्रेस में पूरे घर को बदल डालने की हो रही है जोरशोर से तैयारी. कांग्रेस में पूरे घर को बदल डालने की हो रही है जोरशोर से तैयारी.

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

कांग्रेस में भारी उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं. अहमदाबाद के कांग्रेस अधिवेशन में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण, सचिन पायलट की सक्रियता और शशि थरूर की राय तो यही बता रही है. 

जो कुछ निकलकर सामने आ रहा है, उससे तो यही लगता है कि राहुल गांधी की टीम फिर से मजबूत होकर मोर्चा संभालने वाली है, और पुराने कांग्रेसियों को नये सिरे से संघर्ष के लिए कमर कसनी पड़ सकती है. 

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निश्चित तौर पर ये सब कांग्रेस को फिर से खड़ा करने की कवायद है, और उसके नतीजे भी देखने को मिल सकते हैं, बशर्ते प्रस्तावों और संकल्प अमल में भी लाये जायें. उदयपुर और रायपुर में बातें तय हुई थीं, उस पर थोड़ा बहुत एक्शन तो हुआ, लेकिन ज्यादातर टास्क अधूरे ही रहे. 

2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से बढ़ा कांग्रेस नेतृत्व का जोश दिल्ली से बिहार होते हुए गुजरात पहुंचा है - और खूब बड़ी बड़ी बातें हुई हैं, अब आगे आगे क्या होता है, देखना है.

कांग्रेस की नई गाइडलाइन क्या कहती है

कांग्रेस अधिवेशन में राहुल गांधी ने वही बातें दोहराई, जो बीते कुछ दिनों से उनके भाषणों में सुनने को मिलती रही हैं. लेकिन, कांग्रेस अधिवेशन के मंच पर उन बातों का दोहराया जाना मायने जरूर रखता है. राहुल गांधी ने बताया, हम चाहते हैं कि जिलाध्यक्षों को संगठन की नींव बनायें… शक्ति बनायें… जिला कमेटी और जिला अध्यक्ष को हम पार्टी की नींव बनाने जा रहे हैं. 

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बीजेपी को निशाने पर रखते हुए राहुल गांधी बोले, आप सभी को लड़ना है… ये आसान नहीं है… उनके पास पैसा है… देश के सारे इंस्टीट्यूशंस हैं… उनके पास सब कुछ है, लेकिन जीत हमारी होगी… हमारे साथ जनता का प्यार है…  आप देखिएगा कि आने वाले समय में जनता उनके साथ क्या करने जा रही है.

कांग्रेस का दावा है कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति निष्पक्ष तरीके से होगी, और चुनावों में उम्मीदवारों के चयन में उनकी ही महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, हम भविष्य में उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया में जिलाध्यक्षों को शामिल करने वाले हैं.

मतलब, राज्यों की राजधानियों में बैठकर टिकट बांटने वाले नेताओं की अब मनमर्जी नहीं चलने वाली है. अब स्क्रीनिंग कमेटी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी रहेगी, जब अशोक गहलोत जैसे नेता दबाव बनाकर अपने चहेतों को टिकट दिला देंगे. 

मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस के निकम्मे नेताओं को बड़े ही सख्त लहजे में आगाह किया है, और लगे हाथ काम करने का मन न हो तो वीआरएस लेने की भी सलाह दे डाली है. 

कांग्रेस अध्यक्ष ने बड़े ही साफ शब्दों में कहा है, जो लोग पार्टी के काम में हाथ नहीं बटाते, उन्हें आराम करने की जरूरत है… जो जिम्मेदारी नहीं निभाते, उन्हें रिटायर हो जाना चाहिये.

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महीने भर पहले राहुल गांधी गुजरात के दौरे पर गये थे. तब राहुल गांधी ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था, गुजरात कांग्रेस में दो तरह के नेता हैं… एक वे हैं, जो जनता के साथ खड़े हैं… दूसरे वे हैं, जो जनता से कटे हुए हैं… और उनमें से कुछ बीजेपी से मिले हैं… पार्टी में नेताओं की कमी नहीं है… अगर 30-40 लोगों को निकालना पड़े, तो निकाल देना चाहिये.

कांग्रेस में शुरू हो रही नई कवायद का असर

देखा जाये तो मल्लिकार्जुन खड़गे का ताजा बयान राहुल गांधी की बातों को ही अमलीजामा पहनाने जैसा है. और, कांग्रेस में जिन नेताओं के बारे में ऐसी धारणा बन चुकी है, उनके लिए ये खतरे की घंटी है. 

1. जो कुछ हो रहा है, उससे कुछ सवाल भी उठ रहे हैं. आखिर ये टीम राहुल को मजबूत करने की कोशिश है, या बुजुर्गों का पत्ता साफ करने की कवायद? 

2. सवाल ये भी है कि किन नेताओं की छुट्टी होने वाली है? मल्लिकार्जुन खड़गे के निशाने पर कौन नेता हैं? 

देखना होगा कि अशोक गहलोत और भूपेश बघेल जैसे नेताओं पर क्या असर पड़ता है - और सचिन पायलट या शशि थरूर जैसे नेताओं के साथ क्या सलूक होता है?

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और, वैसे ही मध्य प्रदेश में कमलनाथ, हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसे नेता भी तो निशाने पर ही लगते हैं. 

3. अब तो लगता है 2014 से पहले की तरह राहुल गांधी की नई टीम फिर से प्रभावी होने वाली है. पुरानी टीम के ज्यादातर नेता कांग्रेस छोड़ चुके हैं, सचिन पायलट लंबे संघर्ष के बाद अपनी जगह बना पाये हैं. 

4. दिल्ली चुनाव के बाद अहमदाबाद अधिवेशन में भी सचिन पायलट को महत्व मिलता महसूस किया गया है. श्रीनिवास बीवी जैसे नेता तो पूरे बारह महीने एक्टिव रहते हैं, बिहार चुनाव और लालू यादव के विरोध के कारण कन्हैया कुमार को भी खूब तवज्जो मिल रही है. 

5. जब कांग्रेस में G-23 एक्टिव हुआ था, तो सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा गया था. पत्र में सोनिया गांधी के सामने एक ऐसे कांग्रेस अध्यक्ष की डिमांड रखी गई थी, जो काम करता हुआ भी दिखे. 

सोनिया गांधी ने बगैर किसी ऑडिशन के ही अशोक गहलोत में ऐसी खूबियां देखीं और ये टास्क देना चाहा, लेकिन वो पल्ला झाड़कर निकल गये. फिर, मल्लिकार्जुन खड़गे को आजमाने की कोशिश हुई. एक चुनाव प्रक्रिया से गुजरने के बाद वो कांग्रेस अध्यक्ष भी बन गये, और उस मांग की आपूर्ति की रस्म निभा ली गई.

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अब राहुल गांधी की सलाह पर वही मल्लिकार्जुन खड़गे ऐसे नेताओं की तलाश में हैं जो कांग्रेस के लिए काम करते हुए नजर आयें.  

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