महाराष्ट्र में पंचायत से असेंबली तक बीजेपी सत्ता का टार्गेट तो पूरा हो गया, अब आगे क्या?

महाराष्ट्र के जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनावों में भी बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की है. ये जीत भी बीजेपी को महायुति के सहयोगियों के साथ ही मिली है - और लगातार सफलता के साथ बीजेपी ने जीत का महाराष्ट्र मॉडल बना लिया है.

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महाराष्ट्र के स्थानीय चुनावों में बीजेपी ने जीत की हैट्रिक लगाई है, और कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं. (Photo: PTI) महाराष्ट्र के स्थानीय चुनावों में बीजेपी ने जीत की हैट्रिक लगाई है, और कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:10 PM IST

कांग्रेस मुक्त भारत का सपना भले न पूरा हो पाया हो, बीजेपी के स्वर्णिम काल के लिए पंचायत से पार्लियामेंट तक का सपना भले अब तक अधूरा हो, लेकिन महाराष्ट्र में जिला परिषद चुनाव नतीजे आने के साथ ही बीजेपी को एक बड़ी उपलब्धि हासिल जरूर हो गई है. 

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे महाराष्ट्र में भी बहुत अच्छे नहीं रहे,  लेकिन उसके बाद से तो चुनाव दर चुनाव बीजेपी जनता की अदालत में मजबूती से पांव जमाती हुई आगे बढ़ रही है. यह सिलसिला शुरू हुआ, महाराष्ट्र में देवा भाऊ के नाम से मशहूर देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बीजेपी की विधानसभा चुनावों में मिली रिकॉर्ड जीत से. उसके बाद तो नगर निगम और पंचायत चुनावों के बाद जिला परिषद चुनाव में भी बीजेपी का परचम लहरा रहा है.

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2014 में गुजरात मॉडल के साथ दिल्ली पहुंची बीजेपी को 2019 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना से धोखा खाना पड़ा था, लेकिन हिसाब बराबर करते भी ज्यादा देर नहीं लगी. 2026 के शुरू होते ही बीजेपी को अपने स्वर्णिम काल का लक्ष्य हासिल करने के लिए महाराष्ट्र मॉडल मिल गया है. 

नए नतीजे भी जश्न का बहाना बने

12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए 7 फरवरी को चुनाव हुए थे, और 9 फरवरी को मतगणना सोमवार हुई. चुनावों में कुल 68.28 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई. चुनाव में लोगों को दो वोट डालने थे. एक जिला परिषद सीट के लिए और दूसरा पंचायत समिति के चुनाव क्षेत्र के लिए. चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए. जिला परिषद के लिए सफेद बैलेट पेपर, और पंचायत समिति के लिए गुलाबी बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया.

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महाराष्ट्र स्टेट चुनाव आयोग के मुताबिक, महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली सत्ताधारी महायुति ने 12 जिला परिषदों की कुल 731 सीटों में से 552 सीटों पर जीत हासिल कर साफ बढ़त बना ली है. और, वैसे ही 1,462 पंचायत समिति की सीटों में से 1,000 से अधिक सीट जीत ली है. महायुति में भी बीजेपी जिला परिषद चुनाव में 225 सीटों पर जीत दर्ज करके सबसे आगे खड़ी हो गई है, गठबंधन पार्टनर NCP को 165 और शिवसेना को 162 सीटों पर जीत मिली है. 

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार जिला परिषद चुनावों में कैंपेन के लिए ही निकले थे जब उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. चुनाव नतीजे बता रहे हैं कि एनसीपी को लोगों की पूरी सहानुभूति मिली है. खास बात यह भी है कि कोंकण क्षेत्र, जिसे परंपरागत रूप से ठाकरे परिवार का गढ़ माना जाता रहा है, वहां भी महायुति को लोगों को समर्थन मिला है.

जीत का सिलसिला जारी है

2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से ही बीजेपी की जीत का सिलसिला जारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी की जीत पक्की करने के लिए महाराष्ट्र के लोगों को धन्यवाद दिया है. प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल साइट X पर अंग्रेजी में लिखी पोस्ट में कहा है, एक बार फिर महाराष्ट्र ने बीजेपी और महायुति को आशीर्वाद दिया है. नगर निगम और नगर परिषद चुनावों में बीजेपी और महायुति की शानदार सफलता के बाद, महाराष्ट्र की जनता ने जिला परिषद चुनावों में भी हमें मजबूत जनादेश दिया है. साफ है कि ग्रामीण और शहरी, दोनों ही जगह लोग सुशासन और ऐसी गठबंधन सरकार चाहते हैं जो राज्य की गौरवशाली संस्कृति की भावना के अनुरूप काम करे. मैं महाराष्ट्र की अपनी सभी बहनों और भाइयों का आभार व्यक्त करता हूं. जमीनी स्तर पर अथक परिश्रम करने वाले महायुति के हर कार्यकर्ता को मेरी बधाई.

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत का श्रेय तो देवा भाऊ के नाम से लोकप्रिय हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मिला था, लेकिन हाल के नतीजों का क्रेडिट एक खास जोड़ी को दिया जा रहा है. ये हिट जोड़ी नंबर 1 देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के नेतृत्व वाली बताई जा रही है. अपनी जमीनी और जरूरी रणनीति के बूते जोड़ी ने जीत की हैट्रिक लगा ली है. 

नवंबर में हुए नगर परिषद के चुनाव, जनवरी में हुए महानगरपालिका चुनाव और अब फरवरी के जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव - तीनों ही चुनावों में बीजेपी ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है, और कदम कदम पर खुद को मजबूत साबित किया है. 

बीजेपी नेता अमित शाह के मुताबिक, बीजेपी का स्वर्णिम काल तब माना जाएगा, जब पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक सत्ता में भारतीय जनता पार्टी ही हो - देश में कई जगह डबल और ट्रिपल इंजन की सरकार तो है, लेकिन महाराष्ट्र में बीजेपी ने जो मॉडल स्थापित किया है, वैसा कहीं भी नहीं है. 

पांच साल में ही बदल गया पूरा समीकरण

2019 में उद्धव ठाकरे के बरसों पुराना बीजेपी-शिवसेना गठबंधन तोड़ देने के बाद बीजेपी हाथ मलती रह गई थी. लेकिन, हाथ पर हाथ धरे बैठी नहीं रही. बड़े लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करती रही. अचानक एक दिन सामने आया कि शिवसेना में बगावत करके एकनाथ शिंदे अपने समर्थकों के साथ पार्टी तोड़ दी. और, कुछ दिनों बाद बिल्कुल वैसे ही एनसीपी में बगावत करके अजित पवार भी बीजेपी के साथ जा मिले. 

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एनसीपी और कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी बड़े आराम से राजनीति करती आ रही थी, शिवसेना का सपोर्ट जो हासिल था. शिवसेना के साथ छोड़ देने के बाद बीजेपी के लिए मराठी वोटर के बीच पैठ बनाना सबसे बड़ी चुनौती थी. शिवसेना के टूट जाने के बाद धीरे धीरे बीजेपी पैर जमाने लगी थी, और अजित पवार के साथ आ जाने के बाद भरोसा भी बढ़ने लगा था. लेकिन, लोकसभा चुनाव नतीजों ने थोड़ी देर के लिए निराश भी कर दिया. टूटकर बिखर जाने के बाद भी विपक्ष मजबूती के साथ उभरकर सामने आया. 

लेकिन, विधानसभा चुनाव आते आते देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बीजेपी की तैयारी, और विपक्षी खेमे में शुरू हो चुकी वर्चस्व की जंग ने बीजेपी को वो सब दे दिया जिसकी उसे शिद्दत से जरूरत थी - फिर भी कुछ सवाल बने हुए हैं.

1. महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद से बीजेपी को मिल रही लगातार जीत तात्कालिक पब्लिक मूड का असर है, या विपक्ष वाकई 2024 की चुनावी हार से अब तक उबर नहीं पाया है?

2. उद्धव ठाकरे ने बरसों पुराना मतभेद भुलाकर बीएमसी और नगर निगम चुनावों में चचेरे भाई राज ठाकरे से हाथ मिलाया था - क्या मराठी मानुष के लिए अब ऐसी बातें कोई महत्व नहीं रखतीं?

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3. अगर हालात ऐसे बने कि पवार परिवार एकजुट हो गया, और शिवसैनिक एक साथ हो गए - तब भी क्या बीजेपी अपना प्रदर्शन और दबदबा बरकरार रख पाएगी? 

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