ढोल की थाप, सिर पर कजलियां और दिल में दुआ... रायसेन में किन्नरों ने निभाई 200 साल पुरानी परंपरा

रायसेन में किन्नर समाज ने करीब 200 साल पुरानी परंपरा के तहत कजलियां पर्व पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. पूजा-अर्चना और आरती के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मिश्र तालाब पहुंचा, जहां कजलियों का विसर्जन किया गया. कई शहरों से आए किन्नरों ने नृत्य किया. नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया और किन्नरों ने खुशहाली की दुआ मांगी.

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किन्नर समाज ने निकाला कजलियों का जुलूस. (Photo: Screengrab) किन्नर समाज ने निकाला कजलियों का जुलूस. (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • रायसेन ,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:14 PM IST

मध्य प्रदेश के रायसेन में किन्नर समाज ने कजलियां चल पर्व को धूमधाम से मनाया और लोगों की खुशहाली, अमन-चैन और अच्छी बारिश के लिए दुआ मांगी. ढोल-नगाड़ों और बैंडबाजों के बीच निकले जुलूस में कई शहरों से आए किन्नर शामिल हुए. शहरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया. पूजा-अर्चना और आरती के बाद कजलियों का मिश्र तालाब में विसर्जन किया गया. रायसेन में कजलियां पर्व पर किन्नर समाज का भव्य चल समारोह धूमधाम से निकाला गया. यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें लोगों की खुशहाली, अमन-चैन और देश-प्रदेश के लिए मंगलकामनाएं भी की गईं. ढोल-नगाड़ों और बैंडबाजों की आवाज के बीच निकले जुलूस में किन्नर समाज के बुजुर्ग, युवा और अलग-अलग शहरों से आए लोग शामिल हुए.

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रायसेन में किन्नरों द्वारा कजलियां निकालने की परंपरा करीब 200 साल पुरानी बताई जाती है. किन्नर समाज के लोगों का कहना है कि सावन के पूरे महीने वे लोगों की खुशी, खुशहाली, अमन-चैन और अच्छी बारिश के लिए दुआ करते हैं. कजलियों के आयोजन के दौरान नाच-गाकर सभी के लिए मंगलकामना की जाती है. किन्नर समाज के लिए कजलियां पर्व का दिन खास होता है. करीना किन्नर ने बताया कि 200 साल पुरानी परंपरा के अनुसार किन्नर समाज रायसेन में कजलियां निकालकर लोगों की खुशहाली और अमन-चैन की दुआ करता है. उन्होंने बताया कि लोग भी किन्नरों की कजलियों का पुष्पवर्षा कर स्वागत करते हैं.

इस मौके पर किन्नर समाज की ओर से सांप्रदायिक सद्भाव और एकता का संदेश भी दिया गया. किन्नरों ने कहा कि भुजरिया पर्व लोगों को मिलजुलकर रहने की सीख देता है और सांप्रदायिक सद्भाव तथा एकता का प्रतीक है. रायसेन में बैंडबाजों के बीच विधिवत पूजा-अर्चना और आरती की गई. इसके बाद शहर के वार्ड 16 स्थित पुरानी तहसील मोहल्ले से किन्नर नायक पुखराज के निवास से ढोल-नगाड़ों और बैंडबाजों के साथ जुलूस निकाला गया. जुलूस में किन्नर समाज के लोग सिर पर भुजरियों की डलिया रखकर शामिल हुए. इस दौरान मंगलकामना के गीत भी गाए गए.

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मिश्र तालाब में कजलियों का विसर्जन

जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मिश्र तालाब पहुंचा. यहां पहुंचने के बाद एक बार फिर कजलियों की पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद कजलियों का विधिवत विसर्जन किया गया. जुलूस के दौरान किन्नर समाज के लोगों ने नृत्य भी किया और शहरवासियों को शुभकामनाएं दीं. इस आयोजन में सिर्फ रायसेन के किन्नर ही शामिल नहीं हुए, बल्कि कई दूसरे शहरों से भी किन्नर समाज के लोग पहुंचे. ग्वालियर, बिलासपुर, रायपुर, भोपाल, सागर, सीहोर, विदिशा, मंडीबामोरा और बीना सहित कई नगरों के किन्नर जुलूस में शामिल हुए.

गुरु मां किन्नर ने बताया कि यह जुलूस कई वर्षों से जिले के अमन-चैन और खुशहाली की दुआ के लिए निकाला जाता है. उन्होंने कहा कि लोग किन्नर समाज की कजलियों का पुष्प बरसाकर स्वागत करते हैं. जुलूस के दौरान शहर के लोगों और किन्नर समाज के बीच अपनापन और उत्सव का माहौल नजर आया. रायसेन में रक्षाबंधन के चार दिन बाद किन्नर समाज का यह भव्य कजलियां चल समारोह निकाला गया. शगुन गार्डन से कजलियों का पूजन-अर्चन करने के बाद चल समारोह शुरू हुआ. इसके बाद जुलूस नगर के मुख्य बाजारों और प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा.

जुलूस में इंदौर, भोपाल, जबलपुर और उज्जैन सहित कई जिलों से आए किन्नर शामिल हुए. पारंपरिक परिधानों में सजे किन्नरों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य किया. इससे पूरे समारोह की रौनक और बढ़ गई. जुलूस जैसे-जैसे शहर के अलग-अलग हिस्सों से गुजरा, लोगों की नजरें इस पारंपरिक आयोजन पर टिक गईं. सड़कों के दोनों ओर और मकानों की छतों पर लोगों की भीड़ दिखाई दी. शहरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर किन्नर समाज के जुलूस का स्वागत किया. व्यापारियों और नागरिकों ने भी जुलूस का अभिनंदन किया. इसके जवाब में किन्नर समाज के लोगों ने शहरवासियों के लिए खुशहाली और मंगलकामनाओं की दुआ की.

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किन्नर समाज के लोगों का कहना है कि यह दिन उनके लिए बड़ा दिन होता है. उनका कहना है कि इस दिन उन्हें अपनी पसंद के कपड़े पहनने, नाचने और खुशी मनाने का मौका मिलता है. वे दुआ करते हैं कि उनके यजमान हमेशा खुश रहें. रायसेन की सड़कों पर निकला यह कजलियां चल समारोह धार्मिक परंपरा, उत्सव और सामाजिक सद्भाव का एक साथ नजर आने वाला आयोजन रहा. पूजा-अर्चना से शुरू हुआ समारोह ढोल-नगाड़ों, मंगल गीतों और नृत्य के बीच शहर से गुजरा और आखिर में मिश्र तालाब में कजलियों के विसर्जन के साथ पूरा हुआ.

हर साल खुशहाली के लिए निकलता है जुलूस

बताया गया कि नवाबी शासन काल से ही किन्नर समाज के लोग रायसेन में भुजरियों का यह जुलूस निकालते चले आ रहे हैं. करीब 200 साल पुरानी इस परंपरा में किन्नर समाज सावन के दौरान लोगों की खुशहाली और अमन-चैन की दुआ करता है. इस बार भी जुलूस में बड़ी संख्या में किन्नर शामिल हुए और शहरवासियों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया.
 

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रिपोर्टर- राजेश कुमार रज्जाक

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