'भिंड-मुरैना' पर बयान देकर फंसे गुना कलेक्टर... अब दी सफाई, बोले- मेरे कहने आशय गलत नहीं था

Guna Collector Kishore Kanyal: गुना कलेक्टर किशोर कन्याल ने बताया कि उनके 18-19 महीने के कार्यकाल में भी करीब 125 बंदूक लाइसेंस जारी किए गए हैं. हालांकि, कलेक्टर साहब ने भले ही सफाई दे दी हो, लेकिन उनके इस बयान ने अंचल की सियासत और प्रशासनिक माहौल में गर्माहट जरूर ला दी है.

Advertisement
विवादित बयान पर बैकफुट पर आए कलेक्टर किशोर कन्याल.(Photo:ITG) विवादित बयान पर बैकफुट पर आए कलेक्टर किशोर कन्याल.(Photo:ITG)

विकास दीक्षित

  • गुना,
  • 14 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:32 PM IST

MP News: गुना जिले के कलेक्टर किशोर कन्याल अपने एक विवादित बयान को लेकर मुश्किलों में घिर गए हैं. हाल ही में आयोजित एक पंच सम्मेलन के दौरान मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा था कि वे 'गुना को भिंड-मुरैना नहीं बनने देंगे' बयान के सामने आते ही सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हंगामा मच गया, जिसके बाद मध्य प्रदेश शासन ने कलेक्टर से इस पर जवाब-तलब कर लिया.

Advertisement

मामला तूल पकड़ने और aajtak.in पर खबर दिखाए जाने के बाद कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल बैकफुट पर आ गए हैं और उन्होंने अपने बयान पर सफाई देते हुए गहरा खेद प्रकट किया है.

'चंबल क्षेत्र का पूरा सम्मान करता हूं'

कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने aajtak.in से खास बातचीत में अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि उनके बयान का कोई गलत आशय नहीं था. वे खुद ग्वालियर-चंबल अंचल में लंबे समय तक सेवाएं दे चुके हैं और वहां के लोगों और संस्कृति का पूरा सम्मान करते हैं.

उन्होंने बताया कि चंबल इलाके में लोगों के अंदर शस्त्र लाइसेंस को लेकर काफी क्रेज रहता है, जिससे कई बार हिंसा और बदले की भावना का चक्र शुरू हो जाता है. इसी परिप्रेक्ष्य में उन्होंने संतुलन बनाए रखने और बंदूक कल्चर के बजाय विकास पर बात करने की सलाह दी थी. देखें VIDEO:- 

Advertisement

18-19 महीनों में दिए 125 लाइसेंस, बताई गन पॉलिसी

कलेक्टर ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने के आंकड़ों पर भी बात की. कहा, गुना जिले में इस समय लगभग 30 हजार लाइसेंसी हथियार हैं. पिछले 18-19 महीनों के कार्यकाल में उन्होंने लगभग 125 शस्त्र लाइसेंस जारी किए हैं यानी औसतन 7-8 लाइसेंस प्रति माह यह आंकड़ा है. 

कलेक्टर ने साफ किया कि स्पोर्ट्स पर्सन, दूरदराज इलाकों में रहने वाले सुरक्षा-पीड़ित लोग और सुरक्षा गार्ड की नौकरी से 25 हजार रुपये तक कमाने वाले युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर लाइसेंस दिए जाते हैं. 

कलेक्टर ने आगे कहा कि कई अधिकारी अपने पूरे कार्यकाल में एक भी लाइसेंस जारी नहीं करते, लेकिन उन्होंने वाजिब कारणों पर लाइसेंस स्वीकृत किए हैं. उनका मकसद केवल इतना था कि जनप्रतिनिधि और नागरिक बंदूकों की मांग के बजाय इस बात पर ध्यान दें कि कैसे 1 एकड़ जमीन से 5, 10 या 15 लाख रुपये कमाए जाएं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »