मध्य प्रदेश के दतिया जिले में शुक्रवार को हुई थोड़ी देर की तेज बारिश शहरवासियों के लिए बड़ी मुसीबत बनकर आई. महज 4 घंटों में हुई करीब 40 मिमी से ज्यादा बारिश ने नगर पालिका के जल निकासी और नालों की सफाई व्यवस्था के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी. शहर के कई प्रमुख इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे आम जनता और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
बारिश के बाद शहर की सड़कों पर पानी इस कदर भर गया कि छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से निकलने को मजबूर हो गए. स्थिति बिगड़ती देख जिला प्रशासन ने आनन-फानन में कड़ा कदम उठाते हुए जिले के सभी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई
जलभराव की विकराल समस्या को देखते हुए शहरवासियों में भारी आक्रोश है. स्थानीय लोगों का सवाल है कि नगर पालिका द्वारा हर साल नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जरा सी बारिश में पूरा शहर क्यों डूब जाता है? क्या प्रशासन केवल आपदा आने के बाद ही जागता है?
कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने लिया जायजा
हालात की गंभीरता को देखते हुए दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े खुद प्रशासनिक अमले के साथ जलभराव वाले क्षेत्रों का जायजा लेने निकले. उन्होंने राजस्व और नगर पालिका की टीमों के साथ लाला के ताल सहित अन्य तालाबों और ड्रेनेज प्वाइंट्स का जायजा लिया. देखें VIDEO:-
कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, दतिया में सुबह से बहुत भारी वर्षा हुई है, लगभग 4 घंटे में 40 mm से ज्यादा पानी गिरा है. इसे ध्यान में रखते हुए पूरी रेवेन्यू और नगर पालिका की टीम लगातार भ्रमण कर रही है. जहां भी पानी भरने की समस्या आ रही है, उसे चेक किया जा रहा है. लाला के ताल और बाकी तालाबों की स्थिति भी देखी गई है ताकि इमरजेंसी में पानी की निकासी बिना रुके होती रहे. फिलहाल हालात काबू में है. जहां भी पानी जमा हो रहा है, वह 5 से 7 मिनट के भीतर निकल रहा है. हमारी टीमें अलर्ट पर हैं."
स्थायी समाधान की मांग पर अड़े शहरवासी
हालांकि प्रशासनिक अधिकारी लगातार निरीक्षण कर पानी निकालने के दावे कर रहे हैं और राहत दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है, लेकिन स्थानीय नागरिक तात्कालिक व्यवस्था की जगह स्थायी ड्रेनेज सिस्टम की मांग कर रहे हैं ताकि हर मानसून में उन्हें इस नारकीय स्थिति से न गुजरना पड़े.
अशोक शर्मा