मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पार्टी पर करारा राजनीतिक हमला बोला. चुनावी रोल के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री ने पार्टी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए कांग्रेस को याद दिलाया कि उसने खुद पूर्व CEC टीएन शेषन को बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था.
नरसिंहपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती थी तो उसे SIR प्रक्रिया से कोई आपत्ति नहीं होती थी, लेकिन हारते ही संवैधानिक संस्थाओं में कमियां नजर आने लगती हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा, ''जब केरल और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकारें बनती हैं, तब वह SIR प्रक्रिया को बिल्कुल सही मानती है. लेकिन अन्य राज्यों में हार मिलने पर वह चुनाव आयोग पर सवाल उठाती है. चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के नाम पर किसी भी तरह की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी.''
नेहरू-गांधी परिवार पर साधा निशाना
कांग्रेस को अपना पुराना रिकॉर्ड खंगालने की नसीहत देते हुए सीएम यादव ने कहा कि कांग्रेस ने खुद संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर रही है, जबकि उसने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन को बीजेपी के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया था.
बता दें कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ा था.
CM ने दावा किया कि पूर्व मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद को नियंत्रित करने वाले प्रख्यात आईपीएस अधिकारी KPS गिल से कांग्रेस का झंडा पकड़वाया गया था.
आजीवन जागीर का आरोप
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद लगभग 600 रियासतों ने अपने अधिकार सौंप दिए थे, लेकिन वे सभी अधिकार कांग्रेस में केंद्रित हो गए और नेहरू-गांधी परिवार ने देश के राजनीतिक नेतृत्व को अपनी 'आजीवन जागीर' मान लिया.
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