CM मोहन यादव ने छोड़े 5 दुर्लभ गिद्ध, GPS से होगी पल-पल की निगरानी

CM मोहन यादव ने हलाली डेम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्ध को प्राकृतिक आवास में मुक्त किया. इनमें चार भारतीय गिद्ध और एक सिनेरियस गिद्ध शामिल हैं.

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अब सैटेलाइट से पता चलेगा गिद्धों का रास्ता.(Photo:ITG) अब सैटेलाइट से पता चलेगा गिद्धों का रास्ता.(Photo:ITG)

राजेश रजक

  • रायसेन,
  • 24 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:42 PM IST

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रायसेन वन मंडल के हलाली डैम क्षेत्र में 5 लुप्तप्राय गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा. इन सभी गिद्धों को GPS टैग लगाया गया है ताकि उनकी गतिविधियों पर उपग्रह के जरिए नजर रखी जा सके.

मुक्त किए गए गिद्धों में दो अलग-अलग प्रजातियां शामिल हैं, जिन्हें घायल अवस्था में बचाकर भोपाल स्थित संरक्षण केंद्र में ठीक किया गया था. 

सिनेरियस गिद्ध: इसे 'काला गिद्ध' भी कहा जाता है. लगभग डेढ़ साल के इस प्रवासी पक्षी को 19 दिसंबर 2025 को विदिशा के सिरोंज से रेस्क्यू किया गया था. यह दुनिया के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों में से एक है.

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लॉन्ग-बिल्ड गिद्ध (भारतीय गिद्ध): कुल 4 भारतीय गिद्धों को भी मुक्त किया गया. ये प्रजातियां मध्य भारत के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.

GPS-GSM ट्रांसमीटर
वाइल्डलाइफ SoS, WWF-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से इन गिद्धों पर उपग्रह टेलीमेट्री का उपयोग किया जा रहा है: टैगिंग से गिद्धों के आवागमन, उनके भोजन क्षेत्रों और मानव-जनित दबावों जैसे बिजली के झटके या जहर की सटीक जानकारी मिलेगी. 

सिनेरियस गिद्ध जैसे प्रवासी पक्षी मध्य एशियाई फ्लाई-वे के तहत 30 से अधिक देशों की यात्रा करते हैं, उनकी निगरानी से अंतरराष्ट्रीय संरक्षण योजनाओं को मजबूती मिलेगी.

गिद्ध पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रहरी: CM
मुख्यमंत्री यादव ने वन विभाग की सराहना करते हुए कहा, भारतीय परंपरा में गिद्धों को शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना गया है. रामायण में उल्लेख है कि जटायु ने रावण से माता सीता की रक्षा के प्रयास में आत्मोत्सर्ग कर दिया. रामायण में ही उसके भाई सम्पाती की भी कथा है, जिसने अपने छोटे भाई जटायु को सूर्य की तपन से बचाते हुए बलिदान दे दिया था. 

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पर्यावरण पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. गिद्ध पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं, साथ ही बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.

मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है. प्रदेश में भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर), सिनेरियस गिद्ध (ब्लैक वल्चर), मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर वल्चर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं.

हाल ही में वल्चर एस्टिमेशन-2026 के पहले दिन दक्षिण पन्ना वन प्रभाग में एक हजार से अधिक गिद्धों का अवलोकन किया गया, जो हाल के वर्षों में सर्वाधिक संख्या है.

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