SC में 6 दिन तक चली तीन तलाक पर सुनवाई, ये रही खास बातें...

11 मई से तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई सुनवाई गुरुवार को खत्म हुई. कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट इस मामले में कभी भी अपना फैसला सुना सकता है. कोर्ट में इस मुद्दे पर पूरे 6 दिनों तक बहस चली, इस दौरान बहस में कई मोड़ आये. केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अपनी दलीलें पेश की, तो वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की ओर से कपिल सिब्बल ने दलील रखी.

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कभी भी आ सकता है तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला कभी भी आ सकता है तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 19 मई 2017,
  • अपडेटेड 10:38 AM IST

11 मई से तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई सुनवाई गुरुवार को खत्म हुई. कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट इस मामले में कभी भी अपना फैसला सुना सकता है. कोर्ट में इस मुद्दे पर पूरे 6 दिनों तक बहस चली, इस दौरान बहस में कई मोड़ आये. केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अपनी दलीलें पेश की, तो वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की ओर से कपिल सिब्बल ने दलील रखी.

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5 जजों की पीठ ने की सुनवाई
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ तीन तलाक की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई की. पीठ में न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित तथा न्यायमूर्ति एस.अब्दुल नजीर शामिल हैं.

दुखदायी प्रथा है तीन तलाक- केंद्र
केंद्र की ओर से मुकुल रोहतगी ने तीन तलाक को से अनुरोध किया कि वह इस मामले में 'मौलिक अधिकारों के अभिभावक के रूप में कदम उठाए.' देश के बंटवारे के वक्त के आतंक तथा आघात को याद करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 को संविधान में इसलिए शामिल किया गया था, ताकि सबके लिए यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी धार्मिक भावनाओं के बुनियादी मूल्यों पर राज्य कोई हस्तक्षेप न कर सके.

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राम आस्था का विषय, तो तीन तलाक क्यों नहीं
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि तीन तलाक का पिछले 1400 साल से जारी है. अगर राम का अयोध्या में जन्म होना, आस्था का विषय हो सकता है तो तीन तलाक का मुद्दा क्यों नहीं. अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि केंद्र अभी ट्रिपल तलाक पर बहस कर रहा है, लेकिन वह तलाक के सभी मौजूदा तरीकों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर एक कदम आगे बढ़ाकर विधेयक लाने को भी तैयार है.

'मामला बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक का नहीं'
केंद्र ने कहा कि यह मामला का नहीं है. यह एक धर्म के भीतर महिलाओं के अधिकार की लड़ाई है. इस मामले में विधेयक लाने के लिए केंद्र को जो करना होगा वह करेगा, लेकिन सवाल ये है कि सुप्रीम कोर्ट क्या करेगा? इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि अस्पृश्यता, बाल विवाह या हिंदुत्व के भीतर चल रही अन्य सामाजिक बुराइयों को सुप्रीम कोर्ट अनदेखा नहीं कर सकता है. कोर्ट इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकता है.

हम क्यों नहीं खत्म कर सकते तीन तलाक?
सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने कहा कि अगर सऊदी अरब, ईरान, इराक, लीबिया , मिस्र और सूडान जैसे देश तीन तलाक जैसे कानून को खत्म कर चुके हैं, तो हम क्यों नहीं कर सकते. अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा, अगर अदालत तुरंत तलाक के तरीके को निरस्त कर देती है तो हम लोगों को अलग-थलग नहीं छोड़ेंगे. हम मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक के नियमन के लिए एक कानून लाएंगे.

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अभी सिर्फ तीन तलाक पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम सिर्फ ये समीक्षा करेंगे कि तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक और निकाह हलाला इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग है या नहीं. कोर्ट इस मुद्दे को इस नजर से भी देखेगा कि क्या तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं के मूलभूत अधिकारों का हनन हो रहा है या नहीं. हालांकि कोर्ट ने बाद में कहा कि वह अभी तीन तलाक पर सुनवाई करेगा, लेकिन वह इन मुद्दों पर भी सुनवाई कर सकता है.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अब अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट इस मुद्दे पर कभी भी अपना फैसला सुना सकता है, जिस पर पूरे देश की नज़र रहेगी.

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