केरला के सबसे बड़े और प्रमुख त्योहार ओणम की बात हो और सद्या का जिक्र न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. सद्या मलयालम भाषा का शब्द है जिसका सीधा अर्थ होता है महाभोज या शाही दावत. ओणम के 10वें दिन यानी तिरुवोनम पर परोसा जाने वाला सद्या कोई साधारण भोजन नहीं है, बल्कि यह शुद्ध शाकाहारी और सात्विक व्यंजनों का एक ऐसा संगम है जिसमें 24 से लेकर 26 अलग-अलग प्रकार के पारंपरिक पकवान शामिल होते हैं.
ओणम के पावन अवसर पर तैयार किया जाने वाला ओणम सद्या केवल एक भोजन नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्वाद का महासंगम है. इस थाली में छह स्वादों (मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसैला) का अद्भुत संतुलन होता है. यहां हम आपको केले के पत्ते पर परोसे जाने वाले ओणम सद्या के सभी 26 पारंपरिक व्यंजनों की पूरी सूची दे रहे हैं.
खास बात यह है कि इसे पूरी तरह से जमीन पर बैठकर, केले के पत्ते पर और दाहिने हाथ की उंगलियों से खाया जाता है. यह भोजन पौराणिक कथाओं, समृद्ध इतिहास और आधुनिक न्यूट्रिशन साइंस का अद्भुत नमूना है. आइए जानते हैं कि ओणम सद्या क्यों इतना खास है, इसमें क्या-क्या पकवान बनते हैं और इसके पीछे की दिलचस्प कहानी क्या है.
1. पारंपरिक शुरुआत (चिप्स, अचार और क्रंच)
उप्पेरी: नारियल के तेल में तले गए क्रिस्पी केले के चिप्स.
शर्करा वरत्ती: गुड़, सोंठ और इलायची के सीरप में लिपटे केले के मीठे टुकड़े.
मांगा करी: कच्चे आम का तीखा और चटपटा अचार.
नारंगा करी: नीबू या गलगल का खट्टा-मीठा पारंपरिक अचार.
इंजी पुली: अदरक, इमली और गुड़ से बनी पाचक और खट्टी-मीठी चटनी.
पापड़म: उड़द की दाल से बना खास केरलाइट क्रिस्पी पापड़.
नमक: स्वाद और रस्म के अनुसार केले के पत्ते के बिल्कुल बाईं ओर सबसे पहले रखा जाने वाला नमक.
2. मुख्य सब्जियां और सूखी साइड डिश
अवियल: 13 अलग-अलग मौसमी सब्जियों, कसे हुए नारियल और गाढ़े दही का स्वादिष्ट मिश्रण.
थोरन: बंदगोभी, बीन्स या कद्दू को कसा हुआ नारियल, राई और करी पत्ते के साथ भूनकर बनाई गई सूखी सब्जी.
ओलन: सफेद कद्दू और लोबिया को नारियल के दूध में धीमी आंच पर पकाकर बनाई गई हल्की और सुपाच्य डिश.
कालन: कच्चे केले, रतालू , गाढ़े ताजे दही और नारियल के पेस्ट से बनी खट्टी-चटपटी ग्रेवी.
एरिसरी: कद्दू और लाल बीन्स की करी, जिसमें ऊपर से भुने हुए नारियल का तड़का लगाया जाता है.
किचड़ी: खीरा या चुकंदर और राई-दही के मिश्रण से बना खट्टा-मीठा रायता.
पचड़ी: पके हुए आम या अनानास और नारियल-दही से बनी मीठी और तीखी डिश.
कूट्टू करी: काले चने, रतालू और कच्चे केले से बनी गाढ़ी और भुने नारियल के स्वाद वाली सब्जी.
मेझुकुवरत्ती: कच्चा केला या रतालू को नारियल तेल और मसालों में धीमी आंच पर स्टिर-फ्राई करके तैयार डिश.
इंजी तायरू: बारीक कटे अदरक, हरी मिर्च और ताजे दही का पाचक तड़का.
3. राइस, दाल और मुख्य ग्रेवी
मट्टा राइस: सद्या का मुख्य आधार केरल का लाल उबला चावल.
पारिप्पू करी: मूंग/तुअर दाल और नारियल का थिक पेस्ट, जिसे गरम चावल पर देसी घी के साथ सबसे पहले परोसा जाता है.
सांभर: विभिन्न सब्जियों, तुअर दाल और ताजे भुने मसालों से बनी खुशबूदार ग्रेवी.
रसम: इमली, टमाटर, काली मिर्च और जीरे का पाचक सूप, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है.
मोरु कछियातु: राई, करी पत्ता, मेथी और हरी मिर्च के तड़के वाला छौंका हुआ छाछ.
4. मीठे व्यंजन
पाल पायसम: दूध, चावल और चीनी को धीमी आंच पर गाढ़ा करके बनाई जाने वाली पारंपरिक खीर.
अडा प्रधमन: चावल के पकी हुई पट्टियों, गुड़ के सीरप और गाढ़े नारियल के दूध से बनी शाही खीर.
पझम: सद्या के अंत में पायसम और पापड़म के साथ मैश करके खाया जाने वाला छोटा पका हुआ केला.
क्यों खास है ओणम सद्या और क्या है इसकी कहानी?
पौराणिक कथा (राजा महाबली का स्वागत): मान्यताओं के अनुसार, प्रजावत्सल दानवीर असुर राजा महाबली ओणम के दिन पाताल लोक से अपनी प्रजा को देखने और उनका हालचाल जानने धरती (केरल) पर आते हैं. अपने प्रिय राजा के स्वागत और राज्य की समृद्धि का प्रदर्शन करने के लिए हर घर में यह भव्य और समृद्ध भोजन पकाया जाता है.
पूर्ण सात्विक और नो-वेस्टेज भोजन: सद्या की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें प्याज, लहसुन का इस्तेमाल नहीं होता. पूरा खाना शुद्ध देसी घी, ताजा कसा हुआ नारियल, नारियल तेल, दही, करी पत्ता और राई के तड़के से तैयार होता है.
6 रसों का संतुलन: आयुर्वेद के अनुसार आहार में छह रस (मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसैला) होने चाहिए. सद्या में परोसे जाने वाले सभी पकवान इन छहों स्वादों का सटीक संतुलन पेश करते हैं.
केले के पत्ते पर सद्या परोसने का खास नियम
सद्या परोसने का एक बेहद सटीक और सदियों पुराना नियम है. केले के पत्ते का पतला हिस्सा खाने वाले व्यक्ति की बाईं तरफ होना चाहिए.
पत्ते का ऊपरी बायां हिस्सा: नमक, उप्पेरी (केले के चिप्स), शर्करा वरत्ती (गुड़ से ढके केले के टुकड़े), अचार (अदरक/आम) और पापड़ जैसी सूखी चीजें रखी जाती हैं.
पत्ते का मध्य व निचला हिस्सा: लाल उबले चावल परोसे जाते हैं.
सब्जियां और ग्रेवी वाली डिशेज:
अवियल: 13 अलग-अलग सब्जियों, नारियल और दही का गाढ़ा मिश्रण.
थोरन : बीन्स, बंदगोभी या कद्दू का कसा हुआ नारियल के साथ सूखा फ्राई.
ओलन: सफेद कद्दू और लोबिया को नारियल के दूध में धीमी आंच पर पकाया जाता है.
कालन: कच्चे केले और रतालू को गाढ़े दही और नारियल के साथ पकाया जाता है.
सांभर, एरिसरी और रसम: चावल पर डालकर खाने के लिए गरम-गरम सांभर, पारिप्पू (दाल और घी) और पाचक रसम दिया जाता है.
मीठा: भोजन का अंत कम से कम 2 से 3 प्रकार के स्वादिष्ट पायसम से होता है—जैसे अडा प्रधमन (चावल के पापड़, गुड़ और नारियल दूध की खीर) और पाल पायसम (दूध-चावल की खीर).
सद्या खाने का तरीका भी होता है खास
सद्या अपने आप में इतना खास है कि इसे खाने के बाद केले के पत्ते को मोड़ने का भी एक संकेत होता है. भोजन समाप्त होने पर केले के पत्ते को हमेशा ऊपर से नीचे की ओर अपनी तरफ मोड़ा जाता है. इसका अर्थ होता है कि आपको भोजन बेहद पसंद आया, आपका पेट भर गया है और आप मेजबान का आभार व्यक्त करते हैं.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क