Mustard Oil Vs Sunflower Oil: खाना बनाने के लिए कुकिंग ऑयल चुनना एक काफी मुश्किल काम है क्योंकि मार्केट में कई तरह के तेल मौजूद हैं. ऐसे में अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि कौन सा तेल बेस्ट है. क्या आप भी इस दुविधा में हैं कि सरसों का तेल इस्तेमाल करें या रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल? तो चलिए, आज इस बारे में जानते हैं कि कौन सा तेल इस्तेमाल के लिए अधिक फायदेमंद है. लेकिन उससे पहले एक जरूरी बात समझ लीजिए. चाहे आप कोई भी तेल इस्तेमाल करें, कैलोरी के मामले में सब लगभग एक जैसे होते हैं. 15 ml तेल यानी एक चम्मच में आपको करीब 135 कैलोरीज मिलती हैं क्योंकि ये सब प्योर फैट हैं. तो सेहत का असली खेल कैलोरीज में नहीं, बल्कि तेल की क्वालिटी और उसके पोषक तत्वों में छिपा है.
इंफ्लेमेशन और ओमेगा रेश्यो
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तेल चुनते समय ओमेगा-6 और ओमेगा-3 का बैलेंस बहुत जरूरी है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के हिसाब से, क्रॉनिक इंफ्लेमेशन से बचने के लिए इनका रेशियो 1:1 से 4:1 के बीच होना चाहिए. यहीं पर रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल काफी पीछे रह जाता है, क्योंकि इसका ओमेगा-6 से ओमेगा-3 का रेशियो 5:1 तक होता है जो बॉडी में इंफ्लेमेशन को बढ़ा सकता है.
वहीं, कोल्ड-प्रेस्ड सरसों का तेल इस मामले में बाजी मार लेता है क्योंकि इसका रेश्यो बैलेंस यानी 2:1 के आसपास रहता है जो काफी हद तक आइडियल माना जाता है.
हाई-हीट कुकिंग के लिए क्या सही है?
इंडियन किचन में हम अक्सर हाई-हीट कुकिंग करते हैं जिससे तेल के जलने और टॉक्सिक एल्डिहाइड्स रिलीज होने का खतरा रहता है. सनफ्लावर ऑयल ज्यादातर PUFA (पॉली-अनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स) से बना होता है जो हाई टेम्परेचर पर बहुत नाजुक होता है और जल्दी टूट जाता है.
इसके विपरीत सरसों का तेल MUFA (मोनो-अनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स) से भरपूर होता है जिससे इसकी थर्मल स्टेबिलिटी बेहतर होती है और यह 225°C से ऊपर के स्मोक पॉइंट पर भी काफी स्टेबल रहता है.
इरूसिक एसिड का क्या है सच?
सरसों के तेल को लेकर अक्सर इरूसिक एसिड की चर्चा होती है. यूएस और यूरोप के कुछ हिस्सों में इसे लेकर हेल्थ कंसर्न्स के कारण बैन लगाया गया है क्योंकि जानवरों पर हुई पुरानी स्टडीज में इसके हाई डोज से हार्ट मसल में फैट जमने की बात कही गई थी. लेकिन ध्यान रहे कि आम इंसानी डाइट में इसके सेवन से ऐसा कोई खतरा साबित नहीं हुआ है.
भारत में FSSAI इसे ब्लेंडिंग रूल्स के साथ इस्तेमाल करने की अनुमति देता है. अंत में सरसों का तेल सेहत और स्टेबिलिटी के मामले में एक बेहतर विकल्प है लेकिन किसी भी तेल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें.
सरसों का तेल इस्तेमाल करें या रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल, कौन सा तेल बेहतर?
वैशाली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में न्यूट्रिशन और डायटिक्स विभाग की हेड डॉ. प्राची जैन के मुताबिक, रोजाना की हाई-हीट इंडियन कुकिंग के लिए कोल्ड-प्रेस्ड सरसों का तेल रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल की तुलना में एक बेहतर विकल्प है क्योंकि रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल में ओमेगा-6 का अनुपात बहुत ज्यादा होता है जो शरीर में इंफ्लेमेशन को बढ़ा सकता है.
इसके विपरीत सरसों के तेल का ओमेगा-6 और ओमेगा-3 का बैलेंस 2:1 के करीब है जिसे हेल्थ के लिहाज से काफी अच्छा माना जाता है.
हाई-हीट पर रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल जल्दी टूटकर टॉक्सिक एल्डिहाइड्स में बदल जाता है जो सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. वहीं MUFA से भरपूर होने के कारण सरसों का तेल हाई टेम्परेचर पर ज्यादा स्थिर और सुरक्षित रहता है.
हालांकि, डॉ. जैन ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि सरसों के तेल का इस्तेमाल बेहिसाब किया जाए. किसी भी एक तेल का बहुत ज्यादा सेवन करने से बचना चाहिए और संतुलित तरीके से ही तेल का उपयोग करना बेहतर होता है.
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य जानकारी और एक्सपर्ट्स की राय पर आधारित है. इसे किसी भी तरह की मेडिकल सलाह या इलाज का विकल्प न समझें.)
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क