छुट्टियों का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में घूमने, नई जगहें देखने और बाहर खाने-पीने का ख्याल आता है. लेकिन हर कोई अपनी छुट्टियों में भागदौड़ नहीं करना चाहता. कुछ लोग होटल के कमरे में रहकर देर तक सोना, फिल्में देखना या बिना किसी प्लान के वक्त बिताना पसंद करते हैं. इसी तरह रूम में रहकर आराम करने के ट्रेंड को ‘रूम रॉटिंग’ कहा जाता है.
क्या है रूम रॉटिंग?
रूम रॉटिंग का मतलब है अपना ज्यादा वक्त कमरे में बिताना और बाहर जाने या कुछ करने का दबाव न लेना. इसमें लोग आराम करते हैं, मोबाइल चलाते हैं, फिल्में देखते हैं या बस अपने हिसाब से वक्त बिताते हैं. छुट्टियों में इसका मतलब ये हो सकता है कि आप घूमने की जगह होटल के कमरे में रहकर आराम करना पसंद करें.
आजकल कुछ जेन जी छुट्टियों को हर पल बिजी रहने के बजाय आराम करने और अपनी पसंद से टाइम स्पेंड करने का मौका मानते हैं. हालांकि, रूम रॉटिंग कोई मेडिकल टर्म नहीं है. इसका मतलब सिर्फ रूम में आराम करना हो सकता है, लेकिन इसका एक्सपीरियंस हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है.
Airbnb की रिपोर्ट में क्या सामने आया?
जून 2026 में Airbnb ने YouGov के साथ मिलकर भारत में जेन जी की यात्रा से जुड़ी पसंद पर एक रिपोर्ट जारी की. 'नेवर द सेम': 'द न्यू रूल्स ऑफ जेन जी ट्रेवल इन इंडिया' नाम की इस रिपोर्ट के लिए 18 से 29 साल की उम्र के 2012 लोगों से 11 भारतीय शहरों में सवाल पूछे गए थे.
Airbnb की रिपोर्ट के मुताबिक, जेन जी के हर तीन में से करीब दो लोग सिर्फ आराम करने, धीरे-धीरे वक्त बिताने या कुछ न करने के इरादे से भी यात्रा करते हैं. रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि 78% जेन जी अपनी यात्रा का कम से कम आधा टाइम उस जगह पर बिताते हैं, जहां वे रुकते हैं. वहीं, 64% लोग अपनी यात्रा के कुछ हिस्सों को बिना किसी प्लानिंग के छोड़ना पसंद करते हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि कुछ जेन जी अब यात्रा के दौरान हर वक्त घूमने-फिरने के बजाय आराम करने और अपनी पसंद से वक्त बिताने को भी अहमियत दे रहे हैं.
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क्या कमरे में रहना भी छुट्टियों का हिस्सा है?
रूम रॉटिंग का मतलब जरूरी नहीं कि कोई व्यक्ति आलस कर रहा है. लंबे वक्त तक काम या पढ़ाई करने के बाद कुछ लोग छुट्टियों में बिना किसी दबाव के टाइम बिताना चाहते हैं. ऐसे में होटल के कमरे में आराम करना, फिल्म देखना या देर तक सोना उनके लिए छुट्टियों का अच्छा अनुभव हो सकता है.
हालांकि, अगर कोई व्यक्ति लंबे टाइम तक सैड रहता है, रोजमर्रा के कामों में मन नहीं लगता या बाहर निकलने में लगातार परेशानी होती है, तो इसे सिर्फ आराम करने की आदत मानकर नजरंदाज नहीं करना चाहिए. आखिरकार, छुट्टियों में हर दिन घूमना और नई जगहे देखना जरूरी नहीं है. कभी-कभी बिना किसी फिक्स्ड प्लानिंग के आराम करना भी यात्रा का हिस्सा हो सकता है.
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