कुछ नया करने का प्रेशर! सोशल मीडिया के फेर में कैसे फंसा Gen Z?

जेन जी एक ऐसी जेनरेशन है जो हर वक्त कुछ न कुछ अपने सेल्फ इम्प्रूवमेंट के लिए करना चाहती है. फिर चाहे वो उसकी पर्सनल लाइफ हो या प्रोफेशनल या उसकी इच्छाएं हो वो लगातार कुछ न कुछ प्रोडक्टिव करने में व्यस्त रहती है. लेकिन यही आदत बहुत बार जेन जी ऊपर भार बनने लगती है और उसे दबाव महसूस करवाती है. जहां वो लगतार प्रोडक्टिव बन रहना चाहता है.

Advertisement
क्यों लगातार प्रेशर में जी रहा है जेन-ज़ी? क्यों लगातार प्रेशर में जी रहा है जेन-ज़ी?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:17 AM IST

जेनरेशन कोई भी हो हमेशा लोगों के ऊपर बेहतर करने का दबाव रहा है. कल से बेहतर आज और आज से बेहतर आने वाले कल के लिए. ये हमारी सोसायटी में आगे बढ़ने के लिए एक मापदंड बना दिया गया है. हमेशा कुछ न कुछ करते रहना. खुद को बेहतर की तरफ लेकर जाना. और जेन जी अब इस कल्चर का हिस्सा है. बल्कि जेन जी ने इस प्रोडक्टिविटी वाले कॉन्सेप्ट को बहुत सीरियसली अपनी लाइफ का हिस्सा बना लिया है. 

Advertisement

आज की तारीख में जेन जी एक साथ बहुत काम करना चाहते हैं, अंग्रेजी में कहे तो मल्टी टास्किंग. आज का जेन जी घर से ऑफिस और ऑफिस से घर के लूप में नहीं फंसा है. वो इससे आगे बढ़ कर अपने लिए चीजें और बेहतर करना चाहता है. और इसीलिए उस पर लगातार हर वक्त कुछ न कुछ प्रोडक्टिव करने का प्रेशर बना रहता है.

इस प्रेशर के सबसे बड़े कारणों में से एक है सोशल मीडिया

जेन जी की हमेशा कुछ प्रोडक्टिव करने और आगे निकलने की चाहत कभी-कभी प्रेशर में तब्दील हो जाती है. रोज सोशल मीडिया पर घंटों स्क्रॉल करना और देखना कौन अपनी लाइफ में क्या और कितना बेहतर कर रहा है, ये भी एक कारण है इस प्रेशर का. जब हम लगातार लाइफ में किसी को आगे बढ़ते और बेहतर करते हुए देखते हैं, तो हम अपनी तुलना उस व्यक्ति से करने लगते हैं. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'सच्चे कर्मचारी नहीं देखते घड़ी', बॉस की बात पर Gen Z एम्प्लॉय ने कैलकुलेटर से बता दिया हिसाब

आराम करते हुए भी लगता है कुछ करना चाहिए

जेन जी ऐसी दुनिया में बढ़ी हुई है, जहां सोशल मीडिया पर हर किसी की जिंदगी काफी व्यवस्थित और सफल दिखाई देती है. कोई सुबह जल्दी उठकर एक्सरसाइज कर रहा है, कोई नई स्किल सीख रहा है, कोई अपने करियर पर काम कर रहा है, तो कोई साइड बिजनेस शुरू कर चुका है. ऐसे में अपनी आम जिंदगी भी कम लगने लगती है.

‘कुछ नहीं किया’ वाला स्ट्रेस

जेन जी के लिए प्रोडक्टिविटी का मतलब सिर्फ नौकरी या पढ़ाई नहीं है. दिन में किताब पढ़ना, जिम जाना, खाना बनाना, नई चीज सीखना या अपने करियर के लिए कुछ करना भी प्रोडक्टिव होने का हिस्सा बन गया है.

इसका दूसरा पहलू यह है कि अगर दिन में इनमें से कुछ नहीं किया, तो लगता है कि पूरा दिन खराब हो गया. यानी आराम भी तभी अच्छा लगता है, जब उससे पहले कुछ हासिल किया हो.

जेन जी के लिए शायद सबसे जरूरी बदलाव यही है कि प्रोडक्टिविटी को हर दिन की उपलब्धियों से जोड़ने के बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से देखें. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »