इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर टीवी तक पर एक नाम छाया हुआ है और वो है लद्दाख के मशहूर भारतीय इंजीनियर और सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का. सोनम वांगचुक का पेपर लीक के मुद्दे को उठाते हुए जंतर-मंतर पर अनशन करना ही नहीं, बल्कि उनका एक शानदार इंवेंशन भी इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा है. ये इंवेशन है सोलर कुकर का. सोशल मीडिया पर एक सोनम वांगचुक के संस्थान SECMOL से एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वहां काम करने वाला एक व्यक्ति सूरज की रोशनी से खाना पका रहा है.
खास बात ये है कि सोनम ने इस सोलर कुकर को बनाने के लिए किसी महंगी चीज या गैजेट का इस्तेमाल नहीं किया है. बल्कि हर घर की रसोई में रखी एक सस्ती सी चीज का इस्तेमाल करके बनाया है. करीब 35 साल पहले से सोनम के संस्थान में इस सोलर कुकर की मदद से रोजाना सैकड़ों लोगों का खाना तैयार होता है, वो भी बिना गैस और बिना बिजली खर्च किए. आप भी इस सस्ती चीज और सोनम वांगचुक की तकनीक का इस्तेमाल करके घर के किसी भी बर्तन को सोलर कुकर बना सकते हैं.
सिर्फ एक सस्ती चीज से तैयार होता है सोलर कुकर
वीडियो में कर्मचारी बता रहा है कि इस सोलर कुकर में कोई महंगी मशीन नहीं लगी होती है. इसमें नीचे केवल सिल्वर रिफ्लेक्टिव शीट (सिल्वर पेपर जैसी परावर्तक शीट) या एल्यूमीनियम फॉयल लगाया जाता है. ऊपर नॉर्मल कांच (जिसे आप चेहरा देखने के लिए इस्तेमाल करते हैं) का यूज किया जाता है. सूरज की किरणें शीशे और सिल्वर शीट से होकर चूल्हे के अंदर आती है और इतनी गर्मी पैदा करती हैं कि बड़े-बड़े बर्तनों में खाना आसानी से पक जाता है.
150 लोगों का खाना एक साथ बन जाता है
SECMOL की रसोई में इस सोलर कुकर पर एक बार में करीब 150 लोगों का खाना तैयार किया जाता है. वीडियो में बड़े बर्तनों में चावल, दाल और सब्जी पकती हुई दिखाई दे रही है. कर्मचारी के मुताबिक दोपहर और रात, दोनों समय का खाना इसी तकनीक से बनाया जाता है.
क्या गैस जितनी जल्दी पकता है खाना?
इस सवाल पर कर्मचारी बताते हैं कि अगर धूप अच्छी हो तो चावल, दाल और दूसरी चीजें लगभग 45 मिनट से 1 घंटे में तैयार हो जाती हैं. समय लगभग गैस जैसा ही लगता है. लेकिन अगर आसमान में बादल हैं या फिर धूप कम है तो समय थोड़ा ज्यादा लग सकता है.
पहले कर्मचारी को भी नहीं था भरोसा
वीडियो में कर्मचारी बताते हैं कि वो करीब 12 साल पहले ओडिशा से लद्दाख आए थे. जब पहली बार उन्हें बताया गया कि यहां सूरज की रोशनी से खाना पकता है तो उन्हें बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ था. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता था कि गैस या लकड़ी के बिना खाना कैसे बन सकता है. लेकिन जब मैंने खुद इसमें खाना बनाया, तब समझ आया कि ये सच में काम करता है. अब मुझे इस तकनीक पर पूरा भरोसा है.'
क्यों खास है ये तकनीक?
LPG, लकड़ी या फिर ईंधन की बचत होती है.
बिजली की जरूरत नहीं पड़ती.
धुआं नहीं निकलता, इसलिए पर्यावरण के लिए बेहतर है.
एक साथ बड़ी मात्रा में खाना बनाया जा सकता है.
लंबे समय में रसोई का खर्च कम हो सकता है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क