How to Eat Ragi: रागी, जिसे फिंगर मिलेट भी कहा जाता है, पोषक तत्वों से भरपूर अनाज माना जाता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं जो पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करते हैं. यही वजह है कि रागी से बनी चीजें फिटनेस फ्रीक लोगों के बीच काफी पॉपुलर है. रागी में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है. साथ ही इसमें मौजूद फाइबर डाइजेशन को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. यह ग्लूटेन-फ्री भी होती है, इसलिए गेहूं से परहेज करने वाले लोग भी इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रागी को किस तरह तैयार करके खाया जाता है, इसका असर भी सेहत पर होता है. ऐसे में आज हम जानेंगे कि रागी खाते समय किन-किन गलतियों से बचना चाहिए और रागी खाने का सही तरीका क्या है.
दरअसल, रागी में फाइटेट्स और टैनिन्स जैसे कंपाउंड पाए जाते हैं. ये कंपाउंड कैल्शियम और आयरन को जकड़ कर रखते हैं, जिससे शरीर इन्हें पूरी तरह सोख नहीं पाता. गलत तरीके से रागी खाने पर ये दिक्कतें और बढ़ जाती हैं, जैसे: रागी की सादी सूखी रोटी या सूखा दलिया खाना. रागी को आधा पकाना, जिससे उसमें कच्चे आटे की महक आती रहे. रागी खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी लेना. मैदे और चीनी से बनी रागी कुकीज खाना. इन गलतियों की वजह से पेट भारी होना, गैस, ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं और शरीर को वो पोषक तत्व नहीं मिल पाते जिनकी आप उम्मीद करते हैं.
रागी के आटे को छाछ या दही के पानी में मिलाकर रातभर (8 से 10 घंटे) के लिए रख दें. अगली सुबह इससे डोसा, अंबली या कूझ (पेया) बना सकते हैं. आप अंकुरित रागी के आटे का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
रागी को अच्छी तरह पकाना भी जरूरी है. अधपकी रागी खाने से डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं हो सकती है. इरागी को लगभग 8 से 10 मिनट तक तब तक उबालें जब तक यह बिल्कुल चिकनी और चमकदार (glossy) न हो जाए और इसमें कच्चेपन की महक पूरी तरह खत्म हो जाए.
पकने के बाद जब यह थोड़ा हल्का ठंडा हो जाए तो इसमें थोड़ा सा नींबू का रस, एक चम्मच घी या कुछ करी पत्ते मिला सकते हैं.
रागी खाने का सही समय और तरीका
रागी को नाश्ते या दोपहर के खाने में खाना सबसे अच्छा माना जाता है. हफ्ते में 3 से 4 बार एक छोटी कटोरी खाना पर्याप्त है.
रागी खाने और चाय-कॉफी पीने के बीच कम से कम 1 घंटे का अंतर जरूर रखें, क्योंकि चाय-कॉफी आयरन के अवशोषण को प्रभावित करती है.
रात के समय हमेशा हल्का और अच्छी तरह पका हुआ कूझ या दलिया ही खाएं, सूखी रागी की रोटी खाने से बचें.
जब आप रागी को सही तरीके से फर्मेंट और पका कर खाते हैं तो इससे फाइटेट्स कम हो जाते हैं, कैल्शियम-आसानी से पचता है, पेट हल्का रहता है और शरीर को स्थिर ऊर्जा मिलती है जिससे बार-बार भूख नहीं लगती.
रागी खाने से मिलते हैं ये फायदे
सही तरीके से तैयार की गई रागी डाइट में फाइबर और दूसरे जरूरी पोषक तत्वों को शामिल करने का एक बेहतरीन ऑप्शन है. इसमें मौजुद फाइबर डाइजेशन सिस्टम के लिए फायदेमंद होता है और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखने में मदद कर सकता है.
रागी में मौजूद कैल्शियम हड्डियों के लिए जरूरी है, जबकि आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है. हालांकि, सिर्फ रागी खाने से किसी पोषक तत्व की कमी पूरी हो जाएगी, ऐसा मानना सही नहीं है. बैलेंस डाइट लेना जरूरी है.
एक्सपर्ट की सलाह जरूरी
रागी एक पौष्टिक अनाज है लेकिन इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए. अगर आपको लगातार गैस, पेट फूलना, कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याएं रहती है तो सिर्फ डाइट बदलने के बजाय डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लें.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क