महंगे स्नीकर्स का सस्ता जुगाड़, Gen Z क्यों खरीद रही है फर्स्ट-कॉपी जूते?

जेन जी के बीच महंगे स्नीकर्स पहनने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन हर कोई हजारों रुपये खर्च करके असली जूते नहीं खरीद सकता. ऐसे में युवा कम कीमत में वैसा ही लुक पाने के लिए फर्स्ट-कॉपी और नकली स्नीकर्स का रुख कर रहे हैं. सोशल मीडिया का दबाव, स्ट्रीटवियर का ट्रेंड और ब्रांडेड जूतों की ऊंची कीमतें इस बाजार को बढ़ावा दे रही हैं.

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नकली जूते पहनकर असली स्वैग दिखाती हैं जेन जी? नकली जूते पहनकर असली स्वैग दिखाती हैं जेन जी?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:38 PM IST

दिल्ली के किसी कॉलेज के बाहर एक लड़के के पैरों में 80 हजार रुपये के नाइकी एयर जॉर्डन 1 दिख जाएं या मेट्रो में 1 लाख रुपये के ये जूते पहने कोई 21 साल का इंटर्न नजर आ जाए, तो हैरान मत होइए. आज का युवा भले ही 20 हजार रुपये की इंटर्नशिप या शुरुआती सैलरी पर काम कर रहा हो, लेकिन उसके जूतों का कलेक्शन किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं दिखता.

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भारत के टियर-1 और टियर-2 शहरों में स्नीकर कल्ट का असर इतना बढ़ गया है कि असली जूतों की रीसेल मार्केट से लेकर 7ए और फर्स्ट-कॉपी का नकली बाजार अरबों रुपये का बिजनेस खड़ा कर चुका है. सोशल मीडिया, स्ट्रीटवियर का ट्रेंड, असली जूतों की ऊंची कीमत और कम पैसे में वैसा ही लुक पाने की चाहत 20-22 साल के युवाओं को इस बाजार की ओर खींच रही है.

सोशल मीडिया का दबाव और स्ट्रीटवियर का ट्रेंड

जेन जी के लिए जूते अब सिर्फ चलने की जरूरत नहीं हैं, बल्कि उनकी पहचान और सोशल स्टेटस का बड़ा सिम्बल बन गया हैं. इंस्टाग्राम रील्स, हिप-हॉप कल्चर और दिलजीत दोसांझ, बादशाह और रकुल प्रीत जैसे बॉलीवुड सेलेब्स के स्ट्रीटवियर लुक ने जूतों को फैशन का अहम हिस्सा बना दिया है.

सोशल मीडिया पर अच्छे जूतों के बिना ओओटीडी यानी आउटफिट ऑफ द डे रील बनाना या फोटो पोस्ट करना युवाओं को अधूरा लगता है. सोशल मीडिया पर लोगों की मंजूरी पाने की इसी चाहत ने उन्हें स्नीकरहेड बना दिया है.

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असली जूतों की ऊंची कीमतें और रीसेल मार्केट

नाइकी, एडिडास या जॉर्डन के लिमिटेड एडिशन स्नीकर्स की असली कीमतें 15 हजार से शुरू होकर 2-3 लाख रुपये तक जाती हैं. रीसेल मार्केट में इन जूतों को ब्लैक में इससे भी ज्यादा कीमत पर बेचा जाता है.

20 हजार की पॉकेट मनी या सैलरी वाला युवा 50 हजार का असली जूता नहीं खरीद सकता, लेकिन उसे लुक वही चाहिए. यहीं से फर्स्ट-कॉपी और 7ए क्वालिटी वाले जूतों के बाजार की एंट्री होती है.

सरोजिनी से इंस्टाग्राम तक, कम कीमत में महंगा लुक

दिल्ली का मजनूं का टीला, सरोजिनी नगर, मुंबई का बांद्रा और इंस्टाग्राम के सैकड़ों सीक्रेट स्नीकर पेज युवाओं की इस जरूरत को पूरा कर रहे हैं. जो जूता शोरूम में 80 हजार रुपये में मिलता है, उसकी 7ए मास्टर-कॉपी इन बाजारों में 1,500 से 3 हजार रुपये में आसानी से मिल जाती है. दावा किया जाता है कि ये कॉपी दिखने में 95% असली जैसी होती है.

युवाओं का तर्क है कि ‘जब 2,000 रुपये में वही कट, वही रंग और वही लोगो मिल रहा है, तो 1 लाख रुपये क्यों बर्बाद करना’.

यह भी पढ़ें: Gen Z Benching Trend: प्यार में बैकअप ऑप्शन! Gen Z का ये 'बेंचिंग' ट्रेंड क्या है?

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फेक इट टिल यू मेक इट की सोच

आज के दौर में जेन जी स्मार्ट स्पेंडिंग में यकीन रखता है. युवाओं का मानना है कि जूतों की उम्र 1-2 साल से ज्यादा नहीं होती. ऐसे में महंगे ब्रांड का टैग जेब पर भारी पड़ने देने के बजाय वे कॉपी जूते पहनकर वही स्वैग हासिल कर लेते हैं.

सोशल मीडिया पर बेहतर दिखने की चाहत, महंगे असली स्नीकर्स और कम कीमत में वैसा ही लुक देने वाली फर्स्ट-कॉपी ने स्नीकर कल्ट को युवाओं के बीच तेजी से बढ़ाया है. यही वजह है कि स्नेकर कल्ट और फर्स्ट-कॉपी मार्केट का यह मेल न सिर्फ युवाओं के बीच चलन में है, बल्कि फैशन इंडस्ट्री के स्थापित नियमों को भी चुनौती दे रहा है.

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