सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के शृंगेरी विधानसभा क्षेत्र की 2023 मतगणना का वीडियो रिकॉर्डिंग गायब होने पर भारत निर्वाचन आयोग को कड़ी फटकार लगाई है. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने इस बात पर गहरी हैरानी जताई कि चुनाव आयोग अपने ही कराए चुनाव का रिकॉर्ड गुम होने का दावा कैसे कर सकता है.
कोर्ट ने आयोग को सख्त चेतावनी दी कि यदि अगले आदेश तक उपलब्ध रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए, तो आयोग के खिलाफ प्रतिकूल कानूनी निष्कर्ष निकाला जाएगा. पीठ ने कहा, “चुनाव आयोग यह कैसे कह सकता है कि उसका रिकॉर्ड खो गया है? आपका पूरा उद्देश्य चुनाव कराना है और आपके पास इससे जुड़ा दस्तावेज होना चाहिए.”
अदालत ने आयोग की दलील पर असंतोष जताते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर उसके पास जो भी रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, उन्हें पेश किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को होगी.
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शेषाद्रि नायडू ने जब कोर्ट को बताया कि 2023 की मूल मतगणना का वीडियो नहीं मिल पा रहा है और उसे खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं, तो पीठ ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा, 'आपका पूरा काम चुनाव कराना है, तो आपके पास दस्तावेज और रिकॉर्ड क्यों नहीं हैं? हम इस तरह के घटिया बहाने स्वीकार नहीं करेंगे."
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201 वोटों की जीत से शुरू हुआ कानूनी विवाद
यह पूरा मामला 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में शृंगेरी सीट से जुड़ा है, जहां कांग्रेस नेता टीडी राजेगौड़ा को महज 201 वोटों के अंतर से विजेता घोषित किया गया था. भाजपा उम्मीदवार डीएनए जीवराज ने इस नतीजे को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी. हाई कोर्ट ने अप्रैल 2026 में डाक मतपत्रों की पुनर्गणना का आदेश दिया, जिसके बाद 3 मई 2026 को जारी संशोधित परिणाम में राजेगौड़ा के वोट कम हो गए और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया.
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राजेगौड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां शीर्ष अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए विधायक पद पर बने रहने की अनुमति दी थी. राजेगौड़ा का तर्क है कि हाई कोर्ट ने केवल 279 खारिज किए गए डाक मतपत्रों की दोबारा जांच का आदेश दिया था, लेकिन चुनाव अधिकारी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर 562 वैध मतपत्रों का भी पुनर्मूल्यांकन कर दिया.
इसी प्रक्रिया की निष्पक्षता साबित करने के लिए राजेगौड़ा ने ऑब्जर्वर की रिपोर्ट और 2023 की मूल मतगणना व पुनर्गणना दोनों की वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग की थी, जिस पर चुनाव आयोग फुटेज पेश करने में नाकाम रहा. अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 तय की है.
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