गोवा के अर्पोरा स्थित बर्च बाय रोमियो लेन नाइट क्लब में हुए भीषण अग्निकांड मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने अहम फैसला दिया है. कोर्ट ने क्लब के सह-मालिक सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता को दी गई जमानत रद्द कर दी है. अदालत ने तीनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है.
6 दिसंबर 2025 को अर्पोरा स्थित 'बर्च बाय रोमियो लेन' नाइटक्लब में भीषण आग लग गई थी. इस दर्दनाक हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 50 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. यह क्लब 'मेसर्स बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी अर्पोरा एलएलपी' द्वारा संचालित किया जा रहा था, जिसमें लूथरा बंधु और अजय गुप्ता भागीदार थे.
निचली अदालत ने इसी साल अप्रैल में तीनों आरोपियों को जमानत दे दी थी. इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार और अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि अपराध का स्वरूप बेहद गंभीर है और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण 25 मासूमों की जान गई है.
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अभियोजन पक्ष के वकील सोमनाथ कारपे ने मीडिया से बात करते हुए को बताया, 'अदालत ने हमारी सभी पांचों याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है. इसमें गैर-इरादतन हत्या के मामले में तीन आरोपियों और क्लब की अनुमतियां हासिल करने में किए गए फर्जीवाड़े (Forgery) के मामले में दो याचिकायें शामिल थीं. अदालत ने आरोपियों को दो हफ्ते में सरेंडर करने का समय दिया है, जिसके दौरान वे चाहें तो नए सिरे से जमानत की गुहार लगा सकते हैं.'
आरोपियों पर फर्जीवाड़े और आपराधिक लापरवाही का केस
मामले में दाखिल चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत गैर-इरादतन हत्या, मानव जीवन को खतरे में डालने, आग और ज्वलनशील पदार्थों के प्रति लापरवाही, धोखाधड़ी, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल और आपराधिक साजिश रचने के आरोप दर्ज किए गए हैं.
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने क्लब चलाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के जरिए मंजूरियां हासिल की थीं और सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाई थीं, जिसके परिणामस्वरूप यह बड़ा हादसा हुआ.
रीतेश देसाई