कर्नाटक में अब अधिकारियों और कर्मचारियों की दफ्तरों में मौजूदगी डिजिटल तरीके से दर्ज की जाएगी. योजना के तहत 'कर्तव्य मोबाइल ऐप' के जरिए जियोफेंसिंग पर आधारित रात की हाजिरी व्यवस्था लगानी होगी. इसका मकसद अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके दफ्तरों में उपलब्ध रखना, समय पर सरकारी सेवा सुनिश्चित करना और विकास परियोजनाओं का काम सुचारू बनाना है.
डॉक्टरों को हर दिन रात 9 बजे के बाद कर्तव्य ऐप पर हाजिरी लगानी होगी. इस दौरान उन्हें अपने तय कस्बे, शहर या गांव की भौगोलिक सीमा के भीतर रहना होगा. हालांकि मंजूर छुट्टी पर अधिकारियों और कर्मचारियों को इससे छूट मिलेगी. यह नियम उन कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा, जो पहले से सक्षम अधिकारी की मंजूरी से मुख्यालय से बाहर ड्यूटी कर रहे हैं.
साथ ही पहले से इजाजत लेकर मुख्यालय छोड़ने वाले कर्मचारियों पर भी यह नियम लागू नहीं होगा. हालांकि, उन्हें ऐप में छुट्टी या अनुमति की वजह साफ तौर पर दर्ज करनी होगी. आयुक्त और जिला स्वास्थ्य अधिकारी हर महीने रात की हाजिरी रिपोर्ट की समीक्षा करेंगे. 17 अक्टूबर के आदेश के मुताबिक, सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना तय मुख्यालय में नहीं रहने वालों पर लागू सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई होगी.
उप लोकायुक्त की कार्यवाही के बाद फैसला
उप लोकायुक्त की कार्यवाही में पाया गया था कि कई सरकारी कर्मचारी अपने तय मुख्यालय में नहीं रहते और दूर से प्रशासनिक काम संभालते हैं. इसके कारण कथित तौर पर ड्यूटी पर पहुंचने में देरी हुई और लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. मुख्यमंत्री की मंजूरी से प्रजा सेवा विभाग ने जनहित की सुरक्षा और सेवा नियमों का पालन करने के लिए नई व्यवस्था शुरू की है. विभाग के प्रमुख सचिव हर्ष गुप्ता के आदेश के मुताबिक, पायलट प्रोजेक्ट्स के नतीजों के आधार पर इसे दूसरे डिपार्टमेंट और कैटेगरी के कर्मचारियों तक बढ़ाने की योजना है.
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संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों पर भी नियम
सरकार ने विभागों, कार्यालयों, बोर्डों, निगमों, प्राधिकरणों और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी ऐप से हाजिरी अनिवार्य की है. अब तक यह ऐप स्थायी सरकारी कर्मचारियों तक सीमित था. विभागों और कार्यालयों के प्रमुखों को अपने तहत काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों का 25 नवंबर, 2026 तक ऐप पर रजिस्ट्रेशन कराने का निर्देश दिया है.
1 दिसंबर से उनकी हाजिरी केवल कर्तव्य ऐप के जरिए दर्ज होगी. 1 जनवरी, 2027 से संविदा कर्मचारियों का वेतन और आउटसोर्स एजेंसियों के बिल ऐप की हाजिरी रिपोर्ट के आधार पर ही मंजूर होंगे. अधिकारियों को ऐप पर हाजिरी नहीं होने की स्थिति में भुगतान जारी नहीं करने का सख्त निर्देश दिया गया है. अभी संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की हाजिरी हाथ से लिखे रजिस्टर या अलग व्यवस्थाओं में दर्ज होती है.
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