दुनिया में एक ऐसा पेड़ भी मौजूद है, जो इंसानों की कई पीढ़ियों को अपनी आंखों के सामने आते-जाते देख चुका है. इसकी उम्र करीब 4,850 साल बताई जाती है. यानी जब दुनिया में आज के बड़े-बड़े शहर और आधुनिक सभ्यताएं भी नहीं थीं, तब यह पेड़ धरती पर खड़ा था. खास बात यह है कि यह कोई विशाल और बेहद खूबसूरत दिखने वाला पेड़ नहीं है. उल्टा, देखने में यह पेड़ टेढ़ा-मेढ़ा और लगभग सूखा हुआ सा नजर आता है.
इस पेड़ का नाम मेथुसेलह है. यह अमेरिका के कैलिफोर्निया के व्हाइट माउंटेन में मौजूद एक ऊंचे और बेहद दुर्गम जंगल में उगता है. यह इलाका इनयो नेशनल फॉरेस्ट का हिस्सा है. हालांकि पेड़ की सही लोकेशन आज भी गुप्त रखी गई है, ताकि बड़ी संख्या में पर्यटक वहां पहुंचकर इसे नुकसान न पहुंचा दें.
करीब 5 हजार साल पुराना है यह पेड़
मेथुसेलह एक ब्रिसलकोन पाइन पेड़ है. इसे दुनिया का सबसे पुराना जीवित पेड़ माना जाता है. इसकी उम्र करीब 4,850 साल आंकी गई है. हिस्ट्री चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पेड़ की खोज 1950 के दशक में अमेरिकी वैज्ञानिक एडमंड शुलमैन ने की थी. शुलमैन पेड़ों की उम्र और उनके विकास का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक थे.
इस विज्ञान को डेंड्रोक्रोनोलॉजी यानी वृक्षों की आयु निर्धारण का विज्ञान कहा जाता है. उन्होंने पाया कि व्हाइट माउंटेन में उगने वाले ब्रिसलकोन पाइन बेहद कठिन परिस्थितियों में भी हजारों साल तक जिंदा रह सकते हैं.
इतना लंबा कैसे जी लेते हैं ब्रिसलकोन पाइन?
अब सवाल है कि आखिर कोई पेड़ 4,000-5,000 साल तक जिंदा कैसे रह सकता है?
इसका जवाब इसी पेड़ के रहने की जगह में छिपा है. व्हाइट माउंटेन में मौसम बेहद ठंडा और सूखा रहता है. यहां पेड़ों के लिए परिस्थितियां इतनी मुश्किल हैं कि उनकी बढ़ने की रफ्तार बहुत धीमी हो जाती है.
डेंड्रोक्रोनोलॉजिस्ट पीटर ब्राउन के मुताबिक, दुनिया के सबसे पुराने पेड़ अक्सर ऐसी ही कठिन और सीमित परिस्थितियों वाले इलाकों में मिलते हैं. पेड़ जितनी धीमी गति से बढ़ता है, उसके लंबे समय तक जिंदा रहने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है.
ब्रिसलकोन पाइन की एक और खासियत है. इसका पूरा तना एक साथ जिंदा नहीं रहता. इसे सेक्टर्ड आर्किटेक्चर कहा जाता है. आसान भाषा में समझें तो पेड़ का एक बड़ा हिस्सा लगभग मृत हो सकता है, जबकि उसकी एक पतली पट्टी में जीवन चलता रहता है.
यही हिस्सा जड़ों से पेड़ की किसी छोटी सी हरी शाखा तक पानी और पोषक तत्व पहुंचाता रहता है.इसी वजह से यह पेड़ बाहर से देखने पर आधा सूखा और मरा हुआ नजर आ सकता है, लेकिन उसका एक छोटा सा हिस्सा हजारों साल तक जिंदा रह सकता है.
क्या 5 हजार साल से भी पुराना पेड़ मौजूद है?
यहां कहानी और दिलचस्प हो जाती है. मेथुसेलह करीब 4,850 साल पुराना है, लेकिन वैज्ञानिकों को लगता है कि इससे भी पुराने ब्रिसलकोन पाइन मौजूद हो सकते हैं.
1964 में डोनाल्ड करी नाम के एक भूगोलवेत्ता ने व्हाइट माउंटेन में एक बेहद पुराने ब्रिसलकोन पाइन को काट दिया था. उसका नाम प्रोमेथस था. पेड़ के छल्लों की जांच से उसकी उम्र करीब 4,900 साल निकली.
प्रोमेथस अब जीवित नहीं है. उसका एक हिस्सा नेवेदा के ग्रेट बेसिन विजिटर सेंटर में सुरक्षित रखा गया है. लेकिन इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात एक ऐसे पेड़ की है, जो शायद आज भी जिंदा है.
5,065 साल पुराने पेड़ का भी दावा
शुलमैन ने 1950 के दशक में व्हाइट माउंटेन में ही एक ऐसे ब्रिसलकोन पाइन की पहचान की थी, जिसकी उम्र उन्होंने 5,065 साल आंकी थी. यह पेड़ उसी इलाके में था जहां मेथुसेलह मौजूद है.
बाद में वैज्ञानिक टॉम हार्लेन ने भी शुलमैन के रिकॉर्ड के आधार पर उस पेड़ को खोजने का दावा किया. लेकिन हार्लेन की मौत उस पेड़ की पूरी जानकारी प्रकाशित करने से पहले हो गई.यही वजह है कि 5,065 साल पुराने इस पेड़ की उम्र को अभी आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं माना जाता.
पीटर ब्राउन, जो दुनिया के सबसे पुराने पेड़ों का रिकॉर्ड रखने वाली ओल्डलिस्ट डेटाबेस से जुड़े हैं, ने भी इसे आधिकारिक सूची में शामिल नहीं किया है. यानी अगर इस पेड़ की उम्र भविष्य में वैज्ञानिक रूप से साबित हो जाती है, तो संभव है कि दुनिया का सबसे पुराना जीवित पेड़ मेथुसेलह नहीं, बल्कि 5,000 साल से भी ज्यादा पुराना कोई दूसरा ब्रिसलकोन पाइन निकले.
पेड़ की उम्र पता कैसे चलती है?
पेड़ की उम्र पता करने का सबसे आसान तरीका उसके तने के अंदर बने ग्रोथ रिंग यानी सालाना छल्लों को गिनना है. ज्यादातर ऐसे पेड़ जो ठंडे इलाकों में उगते हैं, सर्दियों में उनकी बढ़त रुक जाती है. अगले मौसम में जब पेड़ फिर बढ़ता है तो तने में एक नया छल्ला बनता है.
इस तरह सामान्य तौर पर एक छल्ला एक साल की बढ़त को दिखाता है. लेकिन वैज्ञानिकों को पेड़ काटने की जरूरत नहीं पड़ती. इसके लिए इंक्रीमेंट बोरर नाम के खास उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है. यह एक पतली खोखली ड्रिल की तरह होता है, जिससे पेड़ के तने से लकड़ी का एक छोटा सा नमूना निकाला जाता है. इस नमूने में मौजूद छल्लों को माइक्रोस्कोप से देखा और गिना जाता है.
एक-एक छल्ले से खुलती है हजारों साल पुरानी कहानी
पेड़ के छल्ले सिर्फ उसकी उम्र नहीं बताते. इनसे उस समय के मौसम के बारे में भी जानकारी मिलती है. अगर किसी साल बारिश ज्यादा हुई या मौसम अनुकूल रहा, तो छल्ला अपेक्षाकृत चौड़ा हो सकता है. वहीं कम बारिश या लंबी सर्दी के दौरान छल्ला बहुत पतला हो सकता है.
कभी-कभी सूखे की स्थिति इतनी गंभीर होती है कि छल्ला बेहद छोटा या लगभग गायब तक हो सकता है. वैज्ञानिक अलग-अलग पेड़ों के छल्लों के पैटर्न को आपस में मिलाते हैं. अगर किसी पुराने पेड़ की कटाई की तारीख पता हो, तो उसके छल्लों के पैटर्न को किसी जीवित पेड़ के नमूने से मिलाकर हजारों साल पुरानी टाइमलाइन तैयार की जा सकती है.
ब्रिसलकोन पाइन जैसे बेहद धीमे बढ़ने वाले पेड़ों में एक इंच लकड़ी के अंदर करीब 100 तक छल्ले मिल सकते हैं. इसलिए इनकी गिनती करना काफी बारीकी वाला काम है.
हर जगह पेड़ों की उम्र ऐसे नहीं पता चलती
यह तरीका खासकर उन इलाकों में ज्यादा कारगर है जहां पेड़ हर साल सर्दियों में अपनी बढ़त रोक देते हैं. उष्णकटिबंधीय यानी बहुत गर्म इलाकों में कई पेड़ लगातार बढ़ते रहते हैं. इसलिए वहां ऐसे साफ सालाना छल्ले नहीं बनते.
ऐसे मामलों में वैज्ञानिक रेडियो कार्बन डेटिंग जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि यह तरीका डेंड्रोक्रोनोलॉजी की तुलना में उम्र का उतना सटीक अनुमान नहीं देता.
पीटर ब्राउन की ओल्डलिस्ट के अनुसार, रेडियो कार्बन से दर्ज किए गए सबसे पुराने पेड़ों में से एक नमीबिया के नॉर्थईस्ट इलाके में मिला बाओबाब है, जिसकी उम्र करीब 1,275 साल, 50 साल आगे-पीछे आंकी गई है.
हजारों साल से खड़ा है मेथुसेलह
मेथुसेलह की सबसे खास बात सिर्फ उसकी उम्र नहीं है. यह पेड़ इस बात का उदाहरण भी है कि प्रकृति में जीवित रहने के तरीके कितने अलग हो सकते हैं. जब दुनिया में हजारों साल पहले इंसान अलग-अलग सभ्यताएं बना रहे थे, तब व्हाइट माउंटेन की कठोर परिस्थितियों में यह छोटा, टेढ़ा-मेढ़ा ब्रिसलकोन पाइन धीरे-धीरे बढ़ रहा था.
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