क्यों महंगे दाम में बिकता है यूपी की इस नदी में मिलने वाला पत्थर?

उत्तर प्रदेश के बांदा में मिलने वाले एक पत्थर की काफी डिमांड है. शजर नाम के पत्थर की खास बात ये है कि इसमें प्राकृतिक रुप से पत्तियां आदि की डिजाइन बन जाती हैं.

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बांदा के इस पत्थर की काफी डिमांड रहती है. (Photo: UP Tak) बांदा के इस पत्थर की काफी डिमांड रहती है. (Photo: UP Tak)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:05 PM IST

क्या आप जानते हैं उत्तर प्रदेश में एक ऐसी नदी बहती है, जिसका पत्थर काफी अद्भुत है. ये पत्थर इतना बेशकीमती है कि कई बार इसकी वैल्यू लाखों रुपये में पहुंच जाती है. भारत के अलावा विदेश में भी इसकी काफी डिमांड है. इस पत्थर की खास बात ये है कि इसमें पेड़, पत्ते या प्राकृतिक आकृतियां खुद-ब-खुद बनी होती हैं. देखने में लगता है कि पत्थर पर कोई पेंटिंग की गई है, लेकिन वो नैचुरल तरीके से ही बना होता है. तो जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में ये पत्थर कहां मिलता है और पत्थर की क्या कहानी है...  

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दरअसल, ये पत्थर उत्तर प्रदेश के बांदा में मिलता है और इस पत्थर का नाम है शजर. शजर पत्थर अपनी इसी अनोखी खूबसूरती के लिए जाना जाता है. केन नदी से मिलने वाला यह पत्थर कारीगरों के हाथों से गुजरकर अंगूठी, लॉकेट, हार और अन्य आकर्षक आभूषणों में बदल जाता है. प्रदेश की एक जिला एक उत्पाद योजना में इसका नाम शामिल है और हाल ही में GI टैग मिलने से शजर को नई पहचान मिली है. इससे न केवल असली शजर की पहचान मजबूत हुई है, बल्कि कारीगरों और कारोबारियों को भी नया बाजार और रोजगार के अवसर मिले हैं. 

क्यों खास है ये पत्थर?

शजर पत्थर की खास बात ये है कि ये प्रकृति की देन की वजह से काफी खुबसूरत होता है और उस पर कुछ कलाकृतियां बनी होती हैं. ये कलाकृतियां इतनी सुंदर होती हैं, जो दिखने में ऐसी लगती है कि किसी ने मशीन ने बनाया हो, लेकिन वो प्राकृतिक रूप से ही डिजाइन बनी होती है. इन डिजाइनों में पत्तियां आदि बनी होती हैं. 

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यूपी तक की रिपोर्ट के अनुसार, जब ये पत्थर नदी से निकाला जाता है तो दिखने में ये आम पत्थर की तरह ही होता है. लेकिन, इसके बाद जब कारीगर इसे काटते हैं तो अंदर से ये चमकता हुआ पत्थर निकलता है और उसमें कोई ना कोई डिजाइन बनी होती है. फिर इसकी डिजाइन पहचानकर उसके हिसाब से कटाई की जाती है. फिर इसकी पॉलिश की जाती है, जिसके बाद पत्थर का असली रूप निकलकर सामने आता है. 

शजर पत्थर का काम करने वाले व्यापारियों ने बताया कि सबसे पहले इसको छांटा जाता है और उसके बाद अलग-अलग तरीके से कई बार छिसाई होती है और स्लाइस में पत्थर को काटा जाता है. इतनी बार घिसाई होती है कि पत्थर की डिजाइन अच्छे से ऊभरकर बाहर दिखने लग जाए और पत्थर को अलग-अलग शेप में काटकर ज्वैलरी के लिए तैयार किया जाता है. इनमें अगूंठी, पेंडेंट आदि बनाए जाते हैं.
 

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