समुद्र में सफर कर रहे चार लोगों की जान उस वक्त आफत में पड़ गई, जब एक विशाल स्पर्म व्हेल ने उनकी नाव को जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर इतनी तेज थी कि नाव का पिछला हिस्सा बुरी तरह टूट गया और उसमें पानी भरने लगा. चारों नाविकों को खुले समुद्र में अपनी जान बचाने के लिए दिन-रात संघर्ष करना पड़ा. यह घटना न्यूजीलैंड के पास की है. इसके बाद से स्पर्म व्हेल को लेकर एक बार फिर से चर्चा शुरू हो गई.
स्पर्म व्हेल की ताकत का यह कोई पहला मामला नहीं है. करीब 200 साल पहले भी एक ऐसी ही घटना हुई थी, जिसने दुनिया के मशहूर उपन्यास मोबी डिक को जन्म दिया. दिलचस्प बात यह है कि अब वैज्ञानिकों ने भी उस घटना से जुड़ी एक पुरानी थ्योरी को सही माना है.
समुद्र में स्पर्म व्हेल की टक्कर से टूट गई नाव
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुातबिक, हाल में ही हुई यह घटना दक्षिण प्रशांत महासागर की है. 52 फीट लंबी यॉट 'ताई टैम' पर चार लोग सवार थे. नाविक नॉरफॉक आइलैंड से करीब 250 समुद्री मील उत्तर की ओर सफर कर रहे थे. इसी दौरान उनका सामना स्पर्म व्हेल के एक झुंड से हुआ.
नाव चला रहीं ऑस्ट्रेलियाई महिला जेम्मा कूपर ने बताया कि अचानक एक जोरदार धमाका हुआ. टक्कर से पूरी नाव एक तरफ झुक गई और वह स्टीयरिंग से उछलकर गिर गईं. शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है. लेकिन पानी में भूरे रंग का एक बड़ा निशान दिखाई दिया. जब उन्होंने नाव के बाईं ओर देखा तो वहां 6 से 8 स्पर्म व्हेल का झुंड मौजूद था.
उनके पति जेरेमी कूपर उस वक्त नाव के नीचे सो रहे थे. टक्कर की आवाज से उनकी नींद खुल गई. उन्होंने देखा कि नाव के दाईं ओर का स्टीयरिंग सिस्टम बुरी तरह टूट चुका था और अंदर तेजी से पानी भर रहा था. इसके बाद चारों नाविकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि किसी तरह नाव को डूबने से बचाया जाए और सुरक्षित जगह तक पहुंचा जाए. इस घटना के बाद फिर से ये सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बड़े से बड़े नाव को कैसे स्पर्म व्हेल पलट देता है.
आखिर इतनी बड़ी नाव को कैसे तोड़ देती है स्पर्म व्हेल
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्पर्म व्हेल दुनिया के सबसे बड़े दांत वाले जीवों में शामिल है. इसके निचले जबड़े में बड़े-बड़े शंकु जैसे दांत होते हैं. लेकिन इसकी असली ताकत सिर्फ दांतों में नहीं, बल्कि इसके विशाल सिर में छिपी होती है. स्पर्म व्हेल के माथे में एक खास अंग होता है, जिसे 'मेलॉन' (Melon) कहा जाता है.
यह वसा यानी फैट से बना होता है. लंबे समय तक वैज्ञानिक इस अंग को मुख्य रूप से आवाज और दिशा पहचानने की प्रक्रिया से जोड़कर देखते रहे. लेकिन एक पुरानी थ्योरी के मुताबिक, स्पर्म व्हेल का विशाल सिर टक्कर मारने के हथियार की तरह भी काम कर सकता है.
यह विचार 19वीं सदी के एक व्हेल शिकारी ओवेन चेज ने दिया था. उनका मानना था कि स्पर्म व्हेल अपने सिर का इस्तेमाल किसी जहाज या दूसरी व्हेल को जोरदार टक्कर मारने के लिए कर सकती है.
200 साल पहले व्हेल ने डुबो दिया था जहाज
20 नवंबर 1820 को अमेरिकी व्हेलिंग जहाज 'एसेक्स' पर सवार नाविकों के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. जहाज पर मौजूद 15 साल के थॉमस निकर्सन ने अपनी आंखों से देखा था कि कैसे एक विशाल स्पर्म व्हेल ने जहाज को टक्कर मारकर तबाह कर दिया.
निकर्सन के मुताबिक, पहले एक व्हेल ने छोटी नाव में छेद कर दिया था. नाविक किसी तरह मुख्य जहाज तक पहुंचे. उन्हें लगा कि अब वे सुरक्षित हैं. लेकिन तभी एक और बड़ी व्हेल तेजी से जहाज की ओर आई और जोरदार टक्कर मार दी.इस घटना में जहाज डूब गया. एसेक्स की यह दुर्घटना बाद में मशहूर लेखक हरमन मेलविल के उपन्यास मोबी डिक की प्रेरणा बनी.
वैज्ञानिकों ने भी सही मानी व्हेल की टक्कर वाली थ्योरी
करीब दो शताब्दियों तक वैज्ञानिकों ने व्हेल के सिर को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की इस थ्योरी पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. लेकिन 2002 में विकासवादी जीवविज्ञानी डेव कैरियर ने इस विचार को फिर से परखा.
उनका मानना था कि स्पर्म व्हेल का विशाल सिर प्रतिद्वंद्वी को टक्कर मारने के लिए विकसित हुआ हो सकता है. इसकी तुलना उन्होंने उन जानवरों से की, जिनमें नर आपस में सिर भिड़ाकर मुकाबला करते हैं.
बाद में हवाई यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता एलेक बर्सलेम ने स्पर्म व्हेल को आपस में सिर से टक्कर मारते हुए कैमरे में रिकॉर्ड किया. यह घटना बेलिएरिक द्वीप समूह और अजोर्स के आसपास हुई थी. उन्होंने कई युवा व्हेल को ऐसा करते देखा. एक व्हेल करीब 4.5 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से दूसरी व्हेल की ओर बढ़ी और उससे टकराई. इस टक्कर का बल लगभग 460 किलो न्यूटन आंका गया.
शोधकर्ता का अनुमान है कि इसी रफ्तार से आने वाली एक पूरी तरह विकसित बड़ी स्पर्म व्हेल की टक्कर का बल करीब 1,200 किलो न्यूटन तक हो सकता है. यह लगभग 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही बस की टक्कर जैसा महसूस हो सकता है.
सिर से टक्कर मारने पर व्हेल को चोट क्यों नहीं लगती?
सवाल उठता है कि आखिर व्हेल अपने सिर से इतनी जोरदार टक्कर कैसे मार लेती है? क्या इससे उसके दिमाग या सिर को नुकसान नहीं होता? 2015 के एक अध्ययन के मुताबिक, स्पर्म व्हेल के सिर में मौजूद खास संरचना और उसके आसपास की वसा टक्कर के असर को कम करने में मदद कर सकती है. यही वजह है कि वह सिर का इस्तेमाल मुकाबले के दौरान कर सकती है.
हालांकि, वैज्ञानिक अभी भी स्पर्म व्हेल के इस खास अंग की भूमिका को पूरी तरह समझने की कोशिश कर रहे हैं. इतिहास में बड़े व्हेलिंग जहाजों पर व्हेल के हमले बहुत कम दर्ज हुए हैं. लेकिन छोटी नावों पर हमले की घटनाएं होती रही हैं. ऐसे में दक्षिण प्रशांत महासागर में हुई हालिया घटना एक बार फिर दिखाती है कि समुद्र में विशालकाय व्हेल से सामना कितना खतरनाक हो सकता है.
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